दिल्ली हिंसा: पुलिस ने 13 जोड़ी महिलाओं के अंडर गार्मेंट्स किए बरामद, 8 युवाओं के गैंग पर लूट का आरोप

दिल्ली दंगों के दौरान जली कार की फाइल फोटो
दिल्ली दंगों के दौरान जली कार की फाइल फोटो

दिल्ली हिंसा: पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट (Charge sheet) भी कोर्ट में दाखिल कर दी है. इस मामले से जुड़े 4 आरोपी पहले से ही जमानत पर चल रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 19, 2020, 1:37 PM IST
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नई दिल्ली. बीतते वक्त के साथ दिल्ली हिंसा (Delhi violence) की जांच से जुड़ी रिपोर्ट सामने आती जा रही हैं. कोर्ट में चार्जशीट भी फाइल हो रही हैं. इसी क्रम में भजनपुरा में हुई हिंसा की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. यह जांच दिल्ली पुलिस (Delhi Plice) ने की थी. पुलिस का आरोप है कि भजनपुरा में 8 लड़कों का गैंग हिंसा के दौरान हाथ में हथौड़ा, लोहे की रॉड और मिट्टी का तेल लेकर चल रहा था. ये लोग 50-60 लोगों की भीड़ के साथ धार्मिक नारे लगाते हुए चल रहे थे. रास्ते में जो भी मिल रहा था उसे लूट ले रहे थे. लूट के दौरान दुकानों को आग भी लगा रहे थे. इन्हीं में से एक आरोपी के घर की तलाशी के दौरान वहां से महिलाओं के 13 जोड़ी अंडर गार्मेंट्स (Undergarments) मिले हैं.

दिल्ली पुलिस ने बताया कि हिंसा के दौरान 8 लोगों का यह गैंग 50 से 60 लोगों की भीड़ को लेकर चल रहा था. हिंसा करने के दौरान जो भी मिल रहा था (जैसे चूड़ियां, कंघे, अंडर गारमेंट्स, मसाज मशीन, सोफा, कुर्सी, मेज, हीटर, लैपटॉप और गद्दे)उसे लूट ले रहे थे. आरोप है कि ये लोग लाखों रुपये का कैश भी लूट ले गए. पुलिस ने इन 8 युवाओं पर हिंसा के दौरान आगजनी और चोरी करने का आरोप लगाया है. इनके खिलाफ भजनपुरा थाने में 10 अलग-अलग लोगों की शिकायत पर 10 मामले दर्ज किए गए हैं.

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आरोपियों के नाम नीरज, मनीष, अमित गोस्वामी, सुनील शर्मा, सोनू, राकेश, मुकेश और श्याम पटेल बताए जा रहे हैं. हालांकि, इनमें से 4 आरोपियों को कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत दे दी थी कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे. जांच पूरी होते ही पुलिस ने इस मामले में कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दी है.

 

मुसलमानों के खिलाफ बनाया गया था WhatsApp ग्रुप
राष्ट्रीय राजधानी में फरवरी में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने कड़ी टिप्पणी की थी. अदालत ने कहा कि वॉट्सऐप समूह के सदस्यों ने कथित तौर पर मुसलमानों से बदला लेने के लिए अपना विवेक खो दिया और भीड़ की सोच के साथ काम करना शुरू कर दिया. अदालत ने फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान एक निवासी की हत्या के मामले में 9 लोगों के खिलाफ दायर आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की थी.
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