दिल्ली में प्राइवेट स्‍कूलों ने RTE का हवाला देकर ईडब्‍ल्‍यूएस श्रेणी के करीब 100 छात्रों को निकाला

दिल्‍ली के दो स्‍कूलों ने ईडब्‍ल्‍यूएस केटेगरी के 100 से ज्‍यादा छात्रों को स्‍कूल से निकाल दिया है.

दिल्‍ली के दो स्‍कूलों ने ईडब्‍ल्‍यूएस केटेगरी के 100 से ज्‍यादा छात्रों को स्‍कूल से निकाल दिया है.

दिल्‍ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्‍यक्ष अपराजिता गौतम कहती हैं कि आठवीं की परीक्षा समाप्‍त होके बाद उन्‍होंने बच्‍चे की पूरी फीस की मांग की है. अभी तो सिर्फ दो प्राइवेट स्‍कूलों के बच्‍चों के अभिभावक सामने आए हैं लेकिन जिस तरह से स्‍कूल आरटीई का हवाला दे रहे हैं पूरी दिल्‍ली से जाने कितने बच्‍चों को स्‍कूलों से निकाला गया है.

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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली में कोरोना के चलते जहां पहले ही स्‍कूलों के खुलने और बंद होने का सिलसिला चल रहा है वहीं यहां के दो स्‍कूलों के द्वारा ईडब्‍ल्‍यूएस केटगरी के 100 से ज्‍यादा छात्रों को निकालने का मामला सामने आया है. पंजाबी बाग स्थित एनसी जिंदल और हंसराज मॉडल स्‍कूल की ओर से बच्‍चों के माता-पिता को लेटर जारी किए गए हैं. जिनमें राइट टू एजुकेशन का भी हवाला दिया गया है.

ऐसे में स्‍कूलों के इस कदम से गुस्‍साए सभी बच्‍चों के अभिभावक पंजाबी बाग में ही इकठ्ठा हुए. जहां सभी ने स्‍कूलों के इस कदम की आलोचना करने के साथ ही दिल्‍ली सरकार और दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल से इस संबंध में एक्‍शन लेने की मांग की है. इस दौरान मौजूद दिल्‍ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्‍यक्ष अपराजिता गौतम ने बताया कि स्‍कूलों को अगर ऐसा करना था तो उसकी जानकारी पहले देनी चाहिए थी ताकि अभिभावक कुछ कदम उठा पाते.

अपराजिता कहती हैं कि आठवीं की परीक्षा समाप्‍त होके बाद उन्‍होंने बच्‍चे की पूरी फीस की मांग की है. अभी तो सिर्फ दो प्राइवेट स्‍कूलों के बच्‍चों के अभिभावक सामने आए हैं लेकिन जिस तरह से स्‍कूल आरटीई का हवाला दे रहे हैं पूरी दिल्‍ली से जाने कितने बच्‍चों को स्‍कूलों से निकाला गया है. इस संबंध में अभिभावक दिल्‍ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से भी मिलने गए लेकिन मंत्री ने उनसे मुलाकात नहीं की. जबकि स्‍कूलों की ओर से लगातार धमकी भरे पत्र अभिभावकों को मिल रहे हैं और जल्‍द से जल्‍द फीस भरने की मांग की जा रही है.

उन्‍होंने बताया कि स्‍कूलों की ओर से बच्‍चों को दिए लेटर में लिखा है कि 27 अगस्‍त 2009 को भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन में नोटिफाइड द राइट ऑफ चिल्‍ड्रन टू फ्री एंड कंपलसरी एजुकेशन एक्‍ट 2009 के अनुसार छात्रों को स्‍कूल में ईडब्‍ल्‍यूएस केटेगरी में दाखिला दिया गया था. ऐसे में अप्रैल में बच्‍चे अपनी अनिवार्य शिक्षा पूरी करने जा रहे हैं. इस एक्‍ट के अनुसार आठवीं के बाद बच्‍चे को इस कैटेगरी में पढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है और न ही केंद्र या राज्‍य सरकार की ओर से कोई मदद मिलती है. लिहाजा बच्‍चों को आगे पढ़ाने के लिए या तो सामान्‍य श्रेणी की पूरी फीस देनी होगी या फिर बच्‍चे को दूसरे स्‍कूल में दाखिला दिलाना होगा.
इतना ही नहीं अभिभावकों ने कहा कि स्‍कूलों की मनमानी इस बात से पता चलती है कि पिछले 10 सालों से स्‍कूल में पढ़ रहे बच्‍चों को ईब्‍ल्‍यूएस केटेगरी के तहत न तो किताबें और न ही यूनिफॉर्म फ्री मिली है. इसके साथ ही अब बाहर का रास्‍ता और दिखा दिया है. स्‍कूल लगातार टीसी काटने की बात कहकर दवाब बना रहे हैं. जबकि जब बच्‍चे का दाखिला हुआ तो 12 वीं तक फ्री पढ़ने की बात कही गई थी.

वहीं मीटिंग में मौजूद पेरेंट्स ने बताया कि इस घटना के बाद बच्चे बहुत ही मानसिक तनाव से गुज़र रहे हैं, क्योंकि वे नहीं जानते कि उनकी पढ़ाई का क्या होगा. पेरेंट्स DPA की सलाह के अनुसार सभी माननीय मंत्रियों/ विभागों, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा विभाग और बाल आयोग में शिकायत दर्ज़ करवाई जा चुकी है, पर कहीं से कोई उम्मीद की किरण नहीं दिखाई दे रही.
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