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Delhi Riots: दिल्ली दंगों की फाइल पढ़े बिना पेश हुए अफसर तो कोर्ट ने लगाई क्लास, DCP से मांगा जवाब

पिछले साल हुए दंगों में 50 से ज्‍यादा लोग मारे गए थे.

पिछले साल हुए दंगों में 50 से ज्‍यादा लोग मारे गए थे.

Delhi Riots: दिल्‍ली की कड़कड़डुमा कोर्ट (Karkardooma Court) ने पिछले साल फरवरी में हुई दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को उसके ढीले रवैये के लिए कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि पुलिस कमिश्नर और अन्य बड़े अधिकारियों द्वारा 2020 के दंगों के मामलों के उचित अभियोजन के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है.

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट (Karkardooma Court) ने ‘लापरवाही भरे रवैये’को लेकर शुक्रवार को दिल्‍ली पुलिस (Delhi Police) को फटकार लगाई है. इसके साथ कोर्ट ने कहा कि पुलिस आयुक्त और अन्य शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने 2020 के दंगा मामलों (Delhi Riots Cases) के उचित अभियोजन के लिए सही कदम नहीं उठाए हैं. मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने यह टिप्पणी तब की है जब अभियोजक बार-बार कॉल करने के बावजूद कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए और जांच अधिकारी (आईओ) पुलिस फाइल को पढ़े बिना अदालत में देर से आए और सवालों का जवाब देने में असमर्थ रहे.

इसके साथ न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार विशेष लोक अभियोजक पिछली कई तारीखों से इस मामले में उपस्थित नहीं हो रहे हैं और पिछली तारीख पर भी वह सुनवाई स्थगित होने के बाद अदालत पहुंचे थे. न्यायाधीश ने कहा, ‘इस अदालत को यह रेखांकित करते हुए दुख हो रहा है कि गोकलपुरी के एसएचओ ना सिर्फ दूसरे जांच अधिकारी की तैनाती करने में असफल रहे हैं बल्कि यह सुनिश्चित करने में भी असफल रहे कि अपराह्न तीन बजकर 25 मिनट पर अदालत में उपस्थित होने पर भी जांच अधिकारी कम से कम मुकदमे की फाइल देखकर आए. वह विशेष लोक अभियोजक की उपस्थिति सुनिश्चित करने में भी असफल रहे हैं.’

कड़कड़डूमा कोर्ट ने कही ये बात
कड़कड़डूमा कोर्ट ने कहा कि दंगों से जुड़े मामले में अभियोजन पक्ष और जांच एजेंसी की ओर से ऐसे लापरवाही भरे रवैये के बारे में ना सिर्फ उत्तर पूर्व जिले के डीसीपी और पूर्वी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त को बार-बार बताया गया बल्कि दिल्ली पुलिस के आयुक्त को भी इसकी सूचना दी गयी. न्यायाधीश गर्ग ने कहा कि उन सभी (अधिकारियों) की ओर से दंगों से जुड़े मामलों में उचित अभियोजन के लिए कदम नहीं उठाया गया. इसके अलावा कोर्ट ने उत्तर पूर्व जिले के डीसीपी को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि पुलिस विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दो प्राथमिकी कैसे दर्ज कर सकती है.

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