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Delhi : जबरन गर्भपात की शिकायत पर FIR दर्ज करने के आदेश पर सत्र अदालत ने लगाई रोक

Delhi : जबरन गर्भपात की शिकायत पर FIR दर्ज करने के आदेश पर सत्र अदालत ने लगाई रोक

रोहिणी कोर्ट (Rohini District Court) की एडिशनल सेशन जज किरण गुप्‍ता ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने वाले मजिस्‍ट्रेट कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी. (File Pic)

रोहिणी कोर्ट (Rohini District Court) की एडिशनल सेशन जज किरण गुप्‍ता ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने वाले मजिस्‍ट्रेट कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी. (File Pic)

Rohini District Court की एएसजे किरण गुप्‍ता ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की उस कार्रवाई पर रोक लगा दी, जिसमें मंगोलपुरी पुलिस स्टेशन के एसएचओ को 2017 में जबरन गर्भपात के लिए पति, सास, ससुर, भाभी और उसके पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था.

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नई दिल्ली : दिल्ली की एक सत्र अदालत ने एक महिला द्वारा अपने पति और उसके परिवार के खिलाफ कथित तौर पर जबरन गर्भपात (Forced Abortion) कराने की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने वाले मजिस्‍ट्रेट कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है. रोहिणी कोर्ट (Rohini District Court) की एडिशनल सेशन जज किरण गुप्‍ता ने यह आदेश जारी किए.

दरअसल, एएसजे किरण गुप्‍ता ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की उस कार्रवाई पर रोक लगा दी, जिसमें मंगोलपुरी पुलिस स्टेशन के एसएचओ को 2017 में जबरन गर्भपात के लिए पति, सास, ससुर, भाभी और उसके पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था. मजिस्ट्रेट द्वारा पारित इस आदेश के खिलाफ अधिवक्ता अमित साहनी (Advocate Amit Sahni) के माध्यम से सास द्वारा पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी. इस याचिका में एएसजे के समक्ष यह तथ्‍य प्रस्‍तुत किया गया कि असल में बहू ने 25-09-2021 को खाने में जहरीला पदार्थ मिलाकर सास को मारने का प्रयास किया था. जिसके बाद सास को हालत बिगड़ने पर एम्बुलेंस के जरिये पास के निजी अस्पताल ले जाया गया था. एम्बुलेंस में ही प्राथमिक उपचार के बाद उसे डीडीयू अस्‍पताल ले जाया गया, जहां उसी दिन एमएलसी की गई थी.

वकील अमित साहनी ने अदालत के समक्ष दलील देते हुए कहा कि सास द्वारा इसकी शिकायत की गई, लेकिन बहू की पुलिस से मिलीभगत के कारण कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी. सास की ओर से की गई शिकायत 26-9-2021 को बड़ी मुश्किल से थाने में रिसीव की गई. अधिवक्ता अमित साहनी ने आगे कहा कि इस शिकायत के तुरंत बाद प्रतिवाद के रूप में बहू ने भी 28-09-2021 को 2017 में पति और उसके परिवार के सदस्यों द्वारा जबरन गर्भपात का आरोप लगाते हुए एक शिकायत दर्ज कराई और तुरंत अगली तारीख यानी 29 नवंबर को अदालत का दरवाजा खटखटाया. एएसजे किरण गुप्ता ने सास की ओर से प्रार्थना की प्रकृति और तात्कालिकता को देखते हुए 9 अक्‍टूबर को ही ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड (टीसीआर) को तलब किया और दलीलें सुनीं. एडवोकेट साहनी की तरफ से कहा गया कि जबरन गर्भपात की शिकायत “सास पर दबाव बनाकर मामले को निपटाने के लिए की गई है”. उन्होंने कोर्ट से मजिस्ट्रियल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया.

अपने आदेश में एएसजे किरण गुप्ता ने कहा कि पुलिस द्वारा दायर की गई कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) में कहा गया है कि कथित घटना के संबंध में कोई भी दस्तावेज महिला या संबंधित डॉक्टरों द्वारा प्रदान नहीं किया गया था. न्यायाधीश ने आदेश दिया, “तथ्यों के संदर्भ में मजिस्ट्रियल कोर्ट के आदेश को सुनवाई की अगली तारीख 15 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया जाता है.”

Tags: Abortion, Delhi Court

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