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दिल्ली: ब्लैक फंगस से पीड़ित व्यक्ति का सफल ऑपरेशन, गुर्दे व फेफड़े के एक हिस्से को निकाला बाहर

बता दें कि म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस उन लोगों को हो जाता है जिनकी कोविड-19, मधुमेह, गुर्दे, व जिगर व दिल से संबंधित बीमारियों की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है. (सांकेतिक फोटो)

बता दें कि म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस उन लोगों को हो जाता है जिनकी कोविड-19, मधुमेह, गुर्दे, व जिगर व दिल से संबंधित बीमारियों की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है. (सांकेतिक फोटो)

अस्पताल (Hospital) ने एक बयान में बताया कि गाजियाबाद के रहने वाले मरीज को कोविड के बाद की जटिलता की वजह से अस्पताल लाया गया था. बयान के मुताबिक, मरीज़ को सांस लेने में परेशानी थी. साथ ही तेज़ बुखार था और बलगम में खून आ रहा था.

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    नई दिल्ली. दिल्ली (Delhi) के एक निजी अस्पताल ने कोरोना वायरस से उबरने के बाद ब्लैक फंगस से पीड़ित हुए 34 वर्षीय शख्स का एक गुर्दा और एक फेफड़े का हिस्सा निकालकर उसे नई जिंदगी दी है. सर गंगाराम अस्पताल (Sir Ganga Ram Hospital) में यह जटिल सर्जरी की गई थी. अस्पताल ने सोमवार को दावा किया कि कोविड संक्रमण के बाद म्यूकोरमाइकोसिस (Black Fungus) का यह मामला दुनिया में अपनी तरह का पहला मामला है. और इसे चिकित्सा जर्नल में प्रकाशित किया जा जा रहा है. इसमें गुर्दा, फेफड़ा और साइनस प्रभावित हुआ था.

    अस्पताल ने एक बयान में बताया कि गाजियाबाद के रहने वाले मरीज को कोविड के बाद की जटिलता की वजह से अस्पताल लाया गया था. बयान के मुताबिक, मरीज़ को सांस लेने में परेशानी थी. साथ ही तेज़ बुखार था और बलगम में खून आ रहा था. उसने बताया कि म्यूकर (एक प्रकार का फंगस) न केवल नाक के अंदर तक घुस गया था बल्कि बाएं फेफड़े और दाएं गुर्दे को भी इसने प्रभावित किया था. बयान में बताया गया कि फेफड़े का एक हिस्सा और गुर्दा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया तथा म्यूकर के और फैलने का अंदेशा था. लिहाज़ा म्यूकर से संक्रमित हिस्सों को निकालने की योजना बनाई गई.

    बड़ी मुश्किल से संक्रमित गुर्दे को निकाला गया
    बता दें कि म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस उन लोगों को हो जाता है जिनकी कोविड-19, मधुमेह, गुर्दे, व जिगर व दिल से संबंधित बीमारियों की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है. अस्पताल ने बताया कि म्यूकर से अन्य अंगों के भी क्षतिग्रस्त होने की आंशका थी, इसलिए, तुरंत बाएं फेफड़े का एक हिस्सा और पूरा दायां गुर्दा निकाल दिया गया. उसने बताया कि सर्जरी जटिल थी और छह घंटे तक चली. उसने बताया कि फंगस की वजह से साइनस की भी सर्जरी की गई. अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि मरीज की जान बच गई है और उसे 45 दिन के उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. अस्पताल में वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. मनु गुप्ता ने बताया कि सर्जरी के दौरान पाया गया कि फंगस करीब- करीब जिगर और बड़ी आंत तक पहुंच गया था. उन्होंने कहा कि आस-पास के अंगो को नुकसान पहुंचाए बिना बड़ी मुश्किल से संक्रमित गुर्दे को निकाला गया.

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