विदेश यात्रा में आड़े आ रही कोवैक्सीन? स्पष्टता न होने से असमंजस में छात्र और नौकरीपेशा लोग

विश्व के कई देशों ने अपने यहां कोवैक्सीन को मान्यता नहीं दी है, इससे विदेश यात्रा करने वाले लोगों के सामने दुविधा की स्थिति है

भारत ने कोवैक्सीन (Covaccine) की मान्यता के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में अर्जी दी है. इसको अभी मान्यता नहीं मिली है और इस पर अभी स्टडी चल रही है. विदेश जाने वाले लोगों में डर है कि उन्हें इस बारे में अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है और अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं

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नई दिल्ली. भारत में बनी कोवैक्सीन (Covaccine) लगवा चुके उन लोगों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई जो पढ़ाई, नौकरी या किसी अन्य काम से विदेश जाना चाहते हैं. भारत (India) ने कोवैक्सीन की मान्यता के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में अर्जी दी है. इसको अभी मान्यता नहीं मिली है और इस पर अभी स्टडी चल रही है. विदेश जाने वाले लोगों में डर है कि उन्हें इस बारे में अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है और अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं. कुछ देश कोवैक्सीन की डोज लगवाने वालों को नॉनवैक्सीनेटेड मान रहे हैं और अपने यहां आने पर उन्हें जरूरी क्वारंटाइन (Quarantine) कर रहे हैं. इसकी वजह से इन लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.

दिल्ली के यमुना विहार के रहने वाले आशुतोष शर्मा ने इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से होटल मैनेजमेंट में बैचलर का कोर्स किया है. आगे की मास्टर्स की पढ़ाने के लिए वो कनाडा जाना चाहते हैं. कोवैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके आशुतोष ने कहा कि कोवैक्सीन को वहां (कनाडा) मान्यता प्राप्त नहीं है. कोविशील्ड वहां मान्य है. यह बात सामने आने से पहले मैंने पहली डोज कोवैक्सीन की लगवा ली थी. कनाडा में जो वैक्सीन मान्य हैं उनके अलावा कोई भी वैक्सीन आपने लगवाई है तो वहां जाने पर 14 दिन क्वारंटाइन रहना होगा. वहां क्वारंटाइन का खर्च एक से डेढ़ लाख रुपये है. यह मेरे लिए बहुत खर्चीला है. आशुतोष के मुताबिक वो लोन लेकर पढ़ने जा रहे हैं. एक सेमेस्टर की फीस चार से पांच लाख रुपए है. एक महीना ऑनलाइन क्लास लेते हुए हो चुका है, अब मैं वहां जाता हूं तो क्वारंटाइन होना पड़ेगा. कुछ लोगों ने पहली वैक्सीन लगवाई है, वो असमंजस में हैं कि दूसरी वैक्सीन लगवाएं या नहीं.

कोवैक्सीन को मान्यता दी जाए और उसे लेकर चीजें स्पष्ट हों

आशुतोष का कहना है कि हम चाहते हैं कोवैक्सीन को मान्यता दी जाए और उसे लेकर चीजें स्पष्ट हों. आशुतोष के पिता मोहन शर्मा कहते हैं कि बच्चे की पढ़ाई के लिए लोन लिया उसकी EMI शुरू हो चुकी है. कोवैक्सीन की वजह से हम बच्चे के भविष्य के लिए दुविधा में हैं कि यह बाहर जा पाएगा भी या नहीं. अगर इतना पैसा लगाने के बाद भी ऑनलाइन क्लास लेनी है तो क्या फायदा इतना खर्च करने का.

पढ़ाई या कामकाज के सिलसिले में विदेश यात्रा करने वाले लोग चाहते हैं कि सरकार औऱ विश्व स्वास्थ्य संगठन कोवैक्सीन को लेकर जल्द अपनी स्थित स्पष्ट करे


गुरुग्राम के रहने वाले आईटी प्रोफेशनल प्रतीक प्रकाश को काम के सिलसिले में अमेरिका, ब्रिटेन जाना होता है. इन्होंने कोवैक्सीन की पहली डोज ली है, दूसरी डोज का समय भी नजदीक है. प्रतीक कहते हैं कि मैंने कोवैक्सीन की पहली डोज लगवाई है, दूसरी डोज भी कुछ दिनों में लगनी है. मैं अपनी नौकरी की वजह से बाहर जाने की योजना बना रहा हूं. मैंने कोवैक्सीन ली हुई है और ये WHO से एप्रूव्ड नहीं है. कई देशों ने वैक्सीन पासपोर्ट का कॉन्सेप्ट लाया हुआ है. हमारे सामने अभी कोई स्पष्टता नहीं है कि जिन्होंने कोवैक्सीन लिया हुआ है वो विदेश यात्रा कर पाएंगे या नहीं, करेंगे तो किस तरह का क्वारंटाइन होगा. एक भ्रम यह है कि जब कोविशील्ड को वैक्सीन पासपोर्ट से लिंक किया गया है तो कोवैक्सीन को क्यों नहीं? या वैक्सीन अनिवार्य है भी या नहीं. इसी वजह से हम विदेश यात्रा करने की योजना नहीं बना पाए रहे हैं. संबंधित विभाग से मांग है कि इसमें स्पष्टता लाया जाये.

WHO की मान्यता न मिलने से अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल करने वालों के लिए चुनौती  

कोवैक्सीन लगवाने वालों की विदेश यात्रा पर वैक्सीन एंड पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉक्टर चंद्रकांत लहारिया ने कहा कि कोवैक्सीन को WHO की मान्यता ना मिलने से निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल करने वालों के लिए चुनौती है. लेकिन यह याद रखना होगा कि उनको ट्रैवल की अनुमति है. फिलहाल ट्रैवल के लिए वैक्सीनेशन अनिवार्य नहीं है. जिन्हें अपने कार्यस्थल पर जाना है या किसी देश की स्थानीय बाध्यता है तो उनके सामने मुश्किल आ सकती है. उन्होंने कहा कि अब कुछ लोग एप्रूव्ड वैक्सीनेशन की मांग कर रहे हैं ऐसे में जरूरी होगा कि अब जो लोग प्लान कर रहे हैं वो WHO एप्रूव्ड वैक्सीन लगवाएं. लेकिन जिन्होंने कोवैक्सीन लगवा ली है इसमें मेरा मानना है कि भारत बायोटेक अपने नतीजे पब्लिश कर देगी और जो डोजियर WHO को दिया हुआ, आने वाले कुछ सप्ताह में अप्रूवल मिल जाएगा.

11 जून को स्वास्थ्य मंत्रालय की हुई प्रेस कांफ्रेंस में कोवैक्सीन की इस समस्या पर विभाग के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा था जैसा कि हमने आपको बताया था कि वैक्सीन पासपोर्ट का कांसेप्ट यह होता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉमन अंडरस्टैंडिंग होती है. इसके लिए WHO में अभी इस बारे में तकनीकी चर्चा चल रही है. एक साल के अंदर ही सभी वैक्सीन आई हैं. इसके एविडेन्स को अभी स्टडी कर रहे हैं. जब भी इस पर फैसला लिया जाएगा तो कार्य किया जाएगा.

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