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DU और सरकार में तकरार! डिप्टी CM मनीष सिसोदिया बोले- भ्रष्टाचारियों को बचाने अफसर करते हैं षडयंत्र

दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने डीयू के वीसी पर निशाना साधा. फाइल फोटो.
दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने डीयू के वीसी पर निशाना साधा. फाइल फोटो.

दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) और राज्य की केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) के बीच तकरार बढ़ गया है.

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नई दिल्ली. दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) और राज्य की केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) के बीच तकरार बढ़ता जा रहा है. डीयू के 28 कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में सदस्यों की नियुक्ति को लेकर बीते मंगलवार को हंगामा हो गया. कॉलेजों में नई गवर्निंग बॉडी नहीं बनने को लेकर विवाद की स्थिति बनी. दिल्ली सरकार में डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने वाइस-चांसलर योगेश त्यागी और कार्यकारी परिषद को मामले के लिए जिम्मेदार बताया. डीयू के उन 28 कॉलेजों को लेकर हंगामा हुआ, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती है. डिप्टी सीएम सिसोदिया ने डीयू के वाइस-चांसलर त्यागी को एक पत्र भी लिखा है.

सूत्रों के मुताबिक दिल्ली सरकार की ओर से डीयू के कॉलोजों की गवर्निंग बॉडी के लिए बीते 20 मार्च को 6 नामों की सूची यूनिवर्सिटी प्रबंधन को दी गई थी, लेकिन 26 मई तक की स्थिति में इस पर कोई पहल नहीं की गई. इसको लेकर ही डीयू प्रबंधन और सरकार में तकरार की स्थिति बनी है.

'भ्रष्टाचारियों के लिए षडयंत्र'
दिल्ली से प्रकाशित टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने डीयू वीसी को एक पत्र भेजा है. जिसमें उन्होंने लिखा, 'विश्वविद्यालय के सर्वोच्च अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपियों को बचाने के लिए षडयंत्र करते हैं.' डीयू से संबंधित 28 कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी बनाने में देरी जान बूझकर की जा रही है. इन कॉलेजों में भ्रष्टाचार की कई शिकायतें सरकार को मिली हैं.'
लॉकडाउन के कारण देरी


खबर के मुताबिक विश्वविद्यालय के एक सूत्र ने कहा कि गवर्निंग बॉडी बनने में देरी लॉकडाउन के कारण हुई थी. इसके अलावा देरी का कारण दिल्ली सरकार ने उन छह उम्मीदवारों के नामों पर पुनर्विचार करने से इनकार कर देना था, जिनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं. बताया जा रहा है कि जून के पहले सप्ताह तक गवर्निंग बॉडी बना ली जाएगी.

वित्तिय संकट का हवाला
खबर के मुताबिक डीयू के 28 कॉलेजों में से 16 को केवल 5 फीसदी ही आर्थिक मदद दिल्ली सरकार से मिलती है. जबकि अन्य 12 को दिल्ली सरकार से 100 प्रतिशत आर्थिक मदद करती है. 12 कॉलेज इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि इस कैलेंडर वर्ष में दो बार, शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए उनकी राशि को रोक दिया गया था. कॉलेजों ने शिकायत की कि अब तक जारी किए गए फंड उनके कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए पर्याप्त नहीं थे और उन्हें कुछ शिक्षकों को भुगतान करने के लिए अपनी बचत की राशि का उपयोग करने के लिए मजबूर किया गया है.

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