दिल्ली: कलावती हॉस्पिटल में Corona संक्रमित दो वर्षीय मासूम की मां बिन बैचेनी में कट रही हैं रातें
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दिल्ली: कलावती हॉस्पिटल में Corona संक्रमित दो वर्षीय मासूम की मां बिन बैचेनी में कट रही हैं रातें
उन्होंने बताया कि इसी बीच, एक अज्ञात महिला अस्वस्थ होने का बहाना बनाकर उसी वार्ड में बिस्तर पर लेट गई, जहां संजू लेटी थी. (सांकेतिक तस्वीर)

दिल्ली के कलावती हॉस्पिटल (Kalawati Hospital में गुरूवार को दो वर्षीय का बालक दाखिल हुआ. शुक्रवार को पता चला कि वह कोरोना पॉजिटिव (Corona Patient) है. अब उसे मां के बगैर बैचेनी में रातें गुजारनी पड़ रही हैं.

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दिल्ली. दिल्ली के कलावती सरन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल  (Kalawati Saran Children Hospital) में दो साल का एक बच्चा कोविद -19 (Covid-19) पॉजिटिव निकला. 8 मई की शाम 7 बजे बच्चे के कोविड-19 पॉजिटिव मिलते ही बच्चे को तुरंत उसके माता-पिता से दूर एक आइसोलेशन वार्ड (Isolation Ward) में ले जाया गया. बच्चे के माता-पिता भी अपने कोविड-19 के टेस्ट के रिज़ल्ट की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, कलावती सरन चिल्ड्रेन अस्पताल में बीते शुक्रवार की रात को ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्सों ने बताया कि किस तरह बच्चे ने अपने माता-पिता से अलग रहकर रात बिताई और किस तरह स्टाफ ने बच्चे को सहज रखने की हरसंभव कोशिश की. स्टाफ ने बताया कि बच्चा शुरूआती कुछ घंटे मजे से रहा लेकिन उसके बाद उसने बहुत ही बैचेनी में रात बिताई.

 



बच्चा श्वांस संबंधित गंभीर बीमारी से है पीड़ित
एक वरिष्ठ चिकित्सक, जो शुक्रवार रात से बच्चे के साथे थे, ने कहा कि बच्चे को गुरुवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और शुक्रवार को उसके टेस्ट का रिज़ल्ट पॉजिटिव आया. वह अस्पताल की बहुत श्वांस संबंधित गंभीर बीमारी (SARI) वार्ड में था लेकिन टेस्ट रिज़ल्ट आने के तुरंत बाद बच्चे को कोविड वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया.

बच्चा अभी भी मां की दूध पर है निर्भर

अस्पताल की ही एक नर्स ने पहचान न बताने की शर्त पर बताया कि ऐसे शिशुओं की देखभाल करना तब बहुत मुश्किल है जब वे अपने माता-पिता के बिना आइसोलेशन में रहने के लिए मजबूर होते हैं. यह कार्य और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है क्योंकि बच्चा अभी भी माँ के दूध पर निर्भर है और उसे नियमित रूप से दूध पिलाया जाता था. ऐसे मुश्किल मामलों में, मां अपना दूध कटोरी में इकट्ठा करके देती और नर्स बच्चे को चम्मच से दूध पिलाती है.

रोता हुआ सोया और रोता ही जगा

उसने कहा कि शिशु को अस्पताल में अस्पताल के पीपीई पहने कर्मचारियों से डर लग सकता है. बच्चा रात भर जागता रहा और शनिवार तड़के करीब 4 बजे फिर से रोता हुआ उठा.

डॉक्टरों को नहीं पता कि बच्चा कैसे हुआ पॉजिटिव

डॉक्टर इस विषय को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि बच्चे को इस वायरस ने कैसे और कहाँ जकड़ लिया. स्वास्थ्यकर्मी भी माता पिता के टेस्ट के परिणामों के आने का इन्तजार कर रहे हैं ताकि उसके परिणाम आते ही वे अपने संपर्क ट्रेसिंग कार्यक्रम को शुरू करें जिसमें उनके संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति का पता लगाया जा सके.

इस शर्त पर मिलेगा मां-पिता को देखरेख का जिम्मा

बच्चे की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि आने वाले दिनों में अगर बच्चे के माता-पिता के टेस्ट परिणाम नेगेटिव आ जाते हैं, तो उन्हें बच्चे को मिलने और उसकी देखभाल की अनुमति दे दी जाएगी. हालांकि यह सुविधा भी केवल सुरक्षा उपकरणों के साथ ही दी जाएगी.

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