JDU दिल्ली में अकेले लड़ेगी चुनाव, पूर्वांचली वोटरों के वोट बंटे तो किसका होगा नुकसान?
Patna News in Hindi

JDU दिल्ली में अकेले लड़ेगी चुनाव, पूर्वांचली वोटरों के वोट बंटे तो किसका होगा नुकसान?
नीतीश कुमार ने बिहारवासियों को सरस्वती पूजा की बधाई व शुभकामनाएं दीं (फाइल फोटो)

दिल्ली की उत्तर-पूर्वी संसदीय सीट पर करीब 28 से 30 फीसदी, पश्चिमी दिल्ली संसदीय सीट पर तकरीबन 20 से 22 प्रतिशत, चांदनी चौक पर करीब 18 से 20 फीसदी, पूर्वी दिल्ली पर करीब 16 से 20 फीसदी और दक्षिणी दिल्ली (South Delhi) पर करीब 15 से 17 फीसदी पूर्वांचली मतदाता (Purvanchali Voters) हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2019, 1:14 PM IST
  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
नई दिल्ली. देश में इस समय सभी की निगाहें महाराष्ट्र (Maharashtra) में बदलते राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है, लेकिन इस बीच बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के नेतृत्व वाली जेडीयू (JDU) ने भी आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया है. जेडीयू ने ऐलान किया है कि वह दिल्ली विधानसभा का चुनाव अपने दम पर ही लड़ेगी. हालांकि, चुनाव आयोग ने अभी तक दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है. लेकिन, राजनीतिक जानकारों का मनना है कि जेडीयू भी शिवसेना की तरह बीजेपी पर प्रेशर पॉलिटिक्स का खेलना शुरू कर दिया है. महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी का उम्मीद के मुताबिक, प्रदर्शन न करना और शिवसेना का एनडीए से जाना वजह मानी जा रही है. जेडीयू द्वारा दिल्ली की सभी 70 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का निर्णय बीजेपी की चिंता बढ़ा सकती है. जेडीयू का अभी तक दिल्ली में कोई राजनीतिक जनाधार नहीं है.

दिल्ली विधानसभा चुनाव में जेडीयू भी ताल ठोकेगी

दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में करीब 27 से 30 सीटें ऐसी हैं, जहां पर पूर्वांचली मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है. बीते रविवार को दिल्ली के बुराड़ी में आयोजित एक सभा में पार्टी के राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर और झंझारपुर के लोकसभा सांसद रामप्रीत मंडल ने दिल्ली की सभी सीटों पर जेडीयू प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया. जेडीयू ने कहा कि जिस तरह से नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में विकास किए जा रहे हैं, उसी तरह से दिल्ली में भी विकास किए जाएंगे. जेडीयू ने ऐलान किया है कि अगर दिल्ली में पार्टी की सरकार बनाती है तो बिहार की तरह दिल्ली में भी पूर्ण शराबबंदी कानून लागू की जाएगी. जेडीयू ने कुछ महीने पहले अरविंद केजरीवाल के उस बयान की भी आलोचना की, जिसमें केजरीवाल ने कहा था कि बिहार के लोग 500 रुपये का टिकट कटा कर दिल्ली आते हैं और 5 लाख रुपये का मुफ्त इलाज कराकर चले जाते हैं.



दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में करीब 27 से 30 सीटें ऐसी हैं जहां पर पूर्वांचली मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है
दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में करीब 27 से 30 सीटें ऐसी हैं जहां पर पूर्वांचली मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है




बता दें कि राजनीतिक दलों के आंकड़ों की मानें तो दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में करीब 27 से 30 सीटों ऐसी हैं जहां पर पूर्वांचली मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है. इन सीटों पर 35 से 45 प्रतिशत वोटर पूर्वांचली हैं. अगर आंकड़ों की बात करें तो बीते लोकसभा चुनाव में दिल्ली में करीब 1 करोड़ 38 लाख वोटर्स थे. वहीं, साल 2009 के लोकसभा चुनाव में वोटरों की संख्या तकरीबन 1 करोड़ 9 लाख थी. आंकड़े बताते हैं कि बीते लोकसभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या में जो तेजी आई है, उसमें 65 से 70 फीसदी मतदाता पूर्वांचली हैं. दिल्ली की कुल मतदाताओं की संख्या में एक तिहाई से भी ज्यादा मतदाता पूर्वांचली हैं.

पूर्वांचली वोटरों पर है जेडीयू की नजर

अगर पूर्वांचलियों की दबदबे की बात करें तो दिल्ली की उत्तर-पूर्वी संसदीय सीट पर करीब 28 से 30 फीसदी, पश्चिमी दिल्ली संसदीय सीट पर तकरीबन 20 से 22 प्रतिशत, चांदनी चौक पर करीब 18 से 20 फीसदी, पूर्वी दिल्ली पर करीब 16 से 20 फीसदी और दक्षिणी दिल्ली पर करीब 15 से 17 फीसदी मतदाता पूर्वांचल से ताल्लुक रखते हैं.

भाजपा, आम आदमी पार्टी, मनोज तिवारी, अरविंद केजरीवाल, दिल्ली, BJP, Aam Aadmi Party, Manoj Tiwari, Arvind Kejriwal, Delhi,
सियासी पार्टियों ने पूर्वांचलियों को अहमियत देने की शुरुआत कर दी है (फाइल फोटो)


दिल्ली में पूर्वांचली वोटरों की बढ़ती तदाद के सवाल पर वोटर्स मूड रिसर्च (वीएमआर) के डायरेक्टर तरित प्रकाश न्यूज 18 हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'दिल्ली में बीते कुछ वर्षों में पूर्वांचली वोटरों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों की अच्छी खासी तादाद दिल्ली के वोटरों में शामिल हो गए हैं. कुछ साल पहले हमने दिल्ली में सर्वे किया था. वर्तमान में मेरे पास कोई डाटा नहीं है, लेकिन मैं कह सकता हूं कि दिल्ली में पूर्वांचली वोटरों की संख्या 45 से 50 प्रतिशत तक पहुंच गई होगी! हर चुनाव के बाद पूर्वांचली वोटरों की संख्या में तेजी आ जाती है. खासकर बिहार के लोगों की संख्या में बेतहाशा बढोतरी हुई है. इनमें भी अपर कास्ट के वोटर्स ज्यादा हैं, जिसमें ब्रह्मण वोटरों की तादाद अधिक है. इसी का नतीजा है कि बीजेपी ने मनोज तिवारी को पिछले कुछ सालों से दिल्ली बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है.'

पूर्वांचली वोट के बंटवारे से किसको नुकसान?

बता दें कि हाल के दिनों में दिल्ली में पूर्वांचली वोटरों की संख्या में बढ़ोतरी के बाद ही सियासी पार्टियों ने पूर्वांचलियों को अहमियत देने की शुरुआत कर दी है. बीजेपी ने जहां मनोज तिवारी को दिल्ली में पूर्वांचल का चेहरा बना रखा है तो वहीं आम आदमी पार्टी ने गोपाल राय को प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री पद से नवाज रखा है. दोनों नेताओं का पूर्वांचली वोटरो पर अच्छा खासा प्रभाव है. वहीं कांग्रेस ने भी पूर्वांचली वोटर्स पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बीजेपी के पूर्व सांसद और हाल ही में पार्टी में शामिल हुए कीर्ति झा आजाद को प्रदेश कांग्रेस कमिटी में महत्वपूर्ण पद दिया है.

नीतीश कुमार, संजय झा
दिल्ली जेडीयू के प्रभारी तथा बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने कहा कि ने कहा कि अब दिल्ली में भी नीतीश मॉडल चलेगा.


दिल्ली की राजनीति को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय न्यूज 18 हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'अगर जेडीयू भी दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ती है तो पूर्वांचली वोटों का बंटवारा तय है. दिल्ली में बड़े पैमाने पर पूर्वांचली खासकर बिहार के लोग हैं. ये वे लोग हैं, जिन्होंने लालू प्रसाद यादव के राज में बिहार से पलायन का डंक झेला है. बाद में इन्हीं लोगों को देखा-देखी और लोग भी बिहार से दिल्ली रोजगार की तलाश में आए. पिछले एक दशक में जो लोग बिहार से दिल्ली आए हैं, उनमें से अधिकांश लोगों का मानना है कि नीतीश कुमार की वजह से ही बिहार ने विकास की रफ्तार पकड़ी है. ये वे लोग हैं जो कहीं न कहीं बीजेपी की विचारधारा से प्रभावित हैं, लेकिन अब जेडीयू अगर मैदान में उतरती है तो कम से कम पूर्वांचली दबदबे वाली विधानसभा सीटों पर बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकती है.'

दिल्ली की सियासत में डेढ़ दशक पहले तक पंजाबी और वैश्य समुदाय का दबदबा हुआ करता था. लेकिन बीते कुछ चुनावों से पूर्वांचलियों ने इनके दबदबे को खत्म कर दिया है. साल 2013 और 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी आप ने पूर्वांचली वोटरों को बड़े पैमाने पर आकर्षित किया और लगभग 14 पूर्वांचली विधानसभा में चुनकर पहुंचे.

ये भी पढ़ें-

प्रदूषण पर SC सख्त, कहा-लोगों को बम से एक ही बार में क्यों नहीं मार देते?
First published: November 27, 2019, 12:40 PM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading