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दिल्ली हिंसा: बेटे की देखभाल के लिए सफूरा जरगर को कोर्ट से मायके जाने की मिली इजाजत

तिहाड़ जेल में बंद सफूरा जरगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी साल 23 जून को जमानत दी थी (फाइल फोटो)
तिहाड़ जेल में बंद सफूरा जरगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी साल 23 जून को जमानत दी थी (फाइल फोटो)

उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में आरोपी सफूरा जरगर (Safoora Zargar) को अपने नन्हें बच्चे की उचित देखभाल के लिए दो महीने के लिए अपने मायके जाने की इजाजत मिली है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अभियोजन के आपत्ति नहीं जताने पर जरगर को गुरुवार से हरियाणा में अपने मायके जाने की इजाजत दे दी

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 25, 2020, 10:27 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हिंसा (Delhi Violence) और उपद्रव के मामले में गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के तहत मुकदमे का सामना कर रही सफूरा जरगर (Safoora Zargar) को अपने बच्चे की उचित देखभाल के लिए दो महीने के लिए अपने मायके जाने की इजाजत दी है. जरगर इस मामले में फिलहाल जमानत (Bail) पर हैं. इसी साल 12 अक्टूबर को उन्होंने एक बच्चे को जन्म (Child Birth) दिया था.

दिल्ली हाईकोर्ट ने मानवीय आधार पर सफूरा जरगर को 23 जून को जमानत दे दी थी क्योंकि उस समय वो 23 हफ्ते की गर्भवती थीं. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने अभियोजन के आपत्ति नहीं जताने पर जरगर को गुरुवार से हरियाणा में अपने मायके जाने की इजाजत दे दी.

कोर्ट ने जरगर को गूगल मैप के जरिए अपना पता भी देने को कहा ताकि जांच अधिकारी उनकी मौजूदगी और स्थान की पड़ताल कर सके. जज ने जरगर को हाईकोर्ट द्वारा जमानत के समय दिए गए सभी निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया है.



सफूरा जरगर की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील रितेश दुबे ने अदालत से कहा कि वो स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं और उन्हें अपने नन्हें बच्चे की देखभाल करनी है. इसके लिए वो दो महीने के लिए मायके जाना चाहती हैं.
पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने कहा कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है और अदालत आवश्यक शर्तें लगा सकती है.

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते 23 जून को सफूरा जरगर को चार शर्तों के साथ जमानत दी थी. यह शर्तें इस प्रकार से हैं...
- जिस मामले में उनके खिलाफ जांच चल रही है, उसमें वो शामिल नहीं होंगी
- जांच को प्रभावित नहीं करेंगी
- दिल्‍ली को छोड़ने से पहले संबंधित अदालत से इसकी पूर्व में अनुमति लेंगी
- फोन के माध्यम से हर 15 दिन में जांच अधिकारी से संपर्क करेंगी
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