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दिल्ली हिंसा : अदालत ने जामिया के छात्र को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

अदालत ने आसिफ इकबाल तनहा को 31 मई तक के लिए जेल भेज दिया.
अदालत ने आसिफ इकबाल तनहा को 31 मई तक के लिए जेल भेज दिया.

अदालत (Court) ने पहले हैदर को नौ दिन की हिरासत में भेजा था क्योंकि पुलिस ने कहा था कि उसे मामले में बड़ी साजिश का पता लगाने की जरूरत है.

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नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर पूर्वी दिल्ली (North East Delhi) में सांप्रदायिक दंगे भड़काने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) के छात्र को बुधवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रोहित गुलिया ने पीएचडी के छात्र और राजद की युवा इकाई के दिल्ली प्रदेश प्रमुख मीरान हैदर (35) को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

हैदर के वकील अकरम खान ने बताया कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगे से संबंधित मामले में हैदर की पुलिस हिरासत खत्म होने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. अदालत ने पहले हैदर को नौ दिन की हिरासत में भेजा था, क्योंकि पुलिस ने कहा था कि उसे मामले में बड़ी साजिश का पता लगाने की जरूरत है.

राज्यसभा सदस्य और राजद नेता मनोज झा ने पहले ट्वीट किया था, "दिल्ली पुलिस ने उसे जांच के लिए बुलाया था और ऊपर से आदेश मिलने पर मीरान हैदर को गिरफ्तार कर लिया, जो कोरोना वायरस महामारी के समय में लोगों की मदद कर रहा है." जामिया समन्वय समिति (जेसीसी) ने हैदर की गिरफ्तारी की निंदा की और उसकी तुरंत रिहाई की मांग की. जेसीसी में जामिया के पूर्व छात्र और मौजूदा छात्र शामिल हैं. उत्तर पूर्वी दिल्ली में 23 फरवरी को सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिनमें कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी और करीब 200 लोग जख्मी हुए थे.



क्या है नागरिकता संशोधन कानून
नागरिकता संशोधन कानून 2019 में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिश्चन धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया है. पहले किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य था. इस नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर 6 साल किया गया है यानी इन तीनों देशों के ऊपर उल्लिखित छह धर्मों के बीते एक से छह सालों में भारत आकर बसे लोगों को नागरिकता मिल सकेगी. आसान शब्दों में कहा जाए तो भारत के तीन मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के नियम को आसान बनाया गया है.

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