दिल्ली हिंसा: कोर्ट ने ताहिर हुसैन और स्कूल मालिक के खिलाफ दायर 4 आरोपपत्रों पर लिया संज्ञान

दंगों के दौरान आगजनी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल थे. (फाइल फोटो)
दंगों के दौरान आगजनी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल थे. (फाइल फोटो)

मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पुरुषोत्तम पाठक ने शिव विहार (Shiv Vihar) इलाके स्थित राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारूक और 17 अन्य के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लिया है.

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नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को इस साल फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए साम्प्रदायिक दंगे (Delhi violence) के मामलों में दाखिल चार आरोपपत्रों पर संज्ञान लिया. इनमें से दो आरोपपत्र आम आदमी पार्टी से बर्खास्त पार्षद ताहिर हुसैन (Councilor Tahir Hussain) और दो आरोपपत्र निजी स्कूल मालिक के खिलाफ हैं. मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पुरुषोत्तम पाठक ने शिव विहार (Shiv Vihar) इलाके स्थित राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारूक और 17 अन्य के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लिया. जिसमें आरोप है कि वे पास के डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल (DRP Convent School) को दंगों के दौरान आगजनी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल थे.

इसके साथ ही अदालत ने दो आरोपपत्रों पर संज्ञान लिया है.  एक हुसैन और नौ अन्य के खिलाफ और दूसरा हुसैन और पांच अन्य के खिलाफ है, जो खजूरी खास में दंगों से जुड़े हैं. अदालत ने कहा कि इन आरोपपत्रों में मामले को संज्ञान में लेने के लिए पर्याप्त सामग्री है.

दो आरोपियों को जमानत दे दी थी
बता दें कि 14 अक्टूबर को खबर सामने आई थी कि दिल्ली में हुई हिंसा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने मंगलवार को दो आरोपियों को जमानत दे दी. अदालत ने दोनों आरोपियों की जमानत (Bail) मंजूर करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ पुलिस कोर्ट में पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई. ऐसे में यह साबित नहीं हो सका कि दोनों ने दिल्ली हिंसा के दौरान दुकानों में लूटपाट की थी. दिल्ली हाईकोर्ट ने जिन दो आरोपियों को जमानत दी है उनके नाम मोहम्मद रेहान उर्फ अरशद प्रधान और अरशद कय्यूम उर्फ मोनू (Mohammad Rehan Alias Arshad Pradhan And Arshad Qayyum Alias Monu) है. इन दोनों के ऊपर आरोप थे कि ये आम आदमी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन द्वारा उकसाई गई भीड़ का हिस्सा बनकर दुकानों में लूटपाट की थी.
7 दुकानों में भी लूटपाट और तोड़फोड़ करने के आरोप


दोनों के ऊपर शिकायतकर्ता के साथ-साथ अन्य 7 दुकानों में भी लूटपाट और तोड़फोड़ करने के आरोप थे. इसी के आधार पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था. लेकिन पुलिस कोर्ट में घटना से संबंधित साक्ष्य पेश नहीं कर पाई. ऐसे में कोर्ट ने दोनों को जमानत दे दी. जानकारी के मुताबिक, अरशद प्रधान हिंसा के चार अन्य मामलों में आरोपी है. वहीं मोनू भी पांच अन्य मामलों में आरोपी है.
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