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दिल्ली हिंसा का दर्द : किसी मासूम के सिर से उठा साया, तो कहीं नई दुल्हन का उजड़ा सुहाग
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News18India
Updated: February 28, 2020, 7:21 PM IST
दिल्ली हिंसा का दर्द : किसी मासूम के सिर से उठा साया, तो कहीं नई दुल्हन का उजड़ा सुहाग
GTB अस्पताल में गम का नजारा था. (फाइल फोटो)

हिंसा की घटनाएं थमने के बाद जहां दिल्ली पुलिस और सरकार प्रभावित इलाकों में शांति व्यवस्था कायम करने में जुटे हुए हैं. वहीं दूसरी ओर इन घटनाओं में मारे गए लोगों के परिजन अपनों के खोने का दर्द भूल नहीं पा रहे हैं.

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नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन और विरोध में हुई हिंसा का शिकार हुए लोगों की संख्या बढ़कर 42 तक पहुंच गई है. शुक्रवार तक इनमें से अधिकतर लोगों की पहचान की जा चुकी है, वहीं कई मृतकों को अब भी पहचाना जाना बाकी है. हिंसा की घटनाएं थमने के बाद जहां दिल्ली पुलिस और सरकार प्रभावित इलाकों में शांति व्यवस्था कायम करने में जुटे हुए हैं. वहीं दूसरी ओर इन घटनाओं में मारे गए लोगों के परिजन अपनों के खोने का दर्द भूल नहीं पा रहे हैं. किसी ने पति खोया तो किसी के बेटे की जान चली गई. किसी के घर में छोटे बच्चे अनाथ हुए तो कहीं किसी के भाई की जान चली गई.

दिल्ली पुलिस की ओर से गुरुवार देर शाम तक हिंसा में मारे गए 35 लोगों की पहचान की गई है. पुलिस की लिस्ट के मुताबिक कुल 35 लोगों में 13 लोगों की मौत गोली लगने से हुई है. वहीं गंभीर रूप से जख्मी हुए 22 लोगों की जान मार-पीट या बुरी तरह से पीटे जाने की वजह से हुई. मारे गए लोगों में अधिकतर युवा हैं, जिनकी उम्र 18 से 40 साल के बीच है. इधर, अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने मारे गए 30 मृतकों के परिजनों से बातचीत की. इसके मुताबिक हिंसा पीड़ितों में से अधिकतर युवा हैं, जिनके जाने से उनके घरों में अंधेरा छा गया है.

मुबारक अली, 35 वर्ष
भजनपुरा में पेंटर का काम करने वाले मुबारक अली के घर में उनकी पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है. मुबारक के भतीजे ने बताया कि उसके चाचा भजनपुरा से आ रहे थे, लेकिन घर नहीं पहुंचे.



आलोक तिवारी, 24 वर्ष
यूपी के हरदोई के रहने वाले आलोक तिवारी करावल नगर की फैक्ट्री में काम करते थे. जीटीबी अस्पताल में उनका शव लेने के इंतजार में खड़े उनके भाई ने बताया कि आलोक के पीछे उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं. इस खबर से परिवार पर क्या गुजरेगी, नहीं बता सकता.

मोहम्मद इरफान, 32 वर्ष
जीटीबी हॉस्पिटल के शवगृह के बाहर खुरैशा ने बताया कि हिंसा में उनका बेटा इरफान भी मारा गया है. इरफान मजदूरी करता था. उनकी मां ने बताया कि 8 हजार रुपये महीना कमाने वाले इरफान के परिवार की देखरेख कौन करेगा, समझ नहीं आता.

राहुल ठाकुर, 23 साल
भजनपुरा के राहुल ठाकुर सिविल सर्विसेस परीक्षा की तैयारी करते थे. आरपीएफ में कार्यरत राहुल के पिता ने बताया कि उसके सीने में गोली लगी थी. एंबुलेंस न मिलने की वजह से किसी तरह स्कूटर से अस्पताल ले गए, जहां बाद में उसकी मौत हो गई.

सुलेमान, 22 साल
यूपी के हापुड़ का रहने वाला सुलेमान हिंसा की घटनाओं के बाद से मंगलवार से लापता था. उसे ढूंढते हुए उसका भाई यूनुस जीटीबी अस्पताल पहुंचा, जहां उसकी शिनाख्त हो पाई.

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अंकित शर्मा, 25 साल
आईबी में कार्यरत अंकित शर्मा की हत्या का आरोप आप पार्षद ताहिर हुसैन पर लगाया गया है. हिंसा फैलने के बाद से अंकित लापता थे. उनका शव एक दिन बाद चांदबाग के नाले से बरामद किया गया था.

मो. शाहबान, 22 साल
वेल्डिंग का काम करने वाले शाहबान को मुस्तफाबाद में उस समय गोली मार दी गई, जब वह अपनी दुकान बंद कर रहे थे. भीड़ ने उनकी दुकान भी जला दी.

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संजीत ठाकुर, 32 साल
वेल्डिंग यूनिट में काम करने वाले संजीत के घर में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं. खजूरी के रहने वाले संजीत पथराव की वजह से जख्मी हो गए थे. बाद में उनकी मौत हो गई.

रतन लाल, 42 साल
राजस्थान के सीकर के रहने वाले रतन लाल दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल थे. उनके घर में पत्नी और तीन बच्चे हैं. दिल्ली हिंसा में रतन लाल शहीद हो गए थे.

अकबरी, 85 साल
गमरी गांव में भीड़ ने एक घर में आग लगा दी, जिसमें झुलसकर 85 साल की बुजुर्ग अकबरी की मौत हो गई. इसी घर के ऊपरी मंजिल पर अकबरी के बेटे की कपड़े की दुकान है.

अनवर, 58 वर्ष
शिव विहार में रहने वाले अनवर पॉल्ट्री फॉर्म चलाते थे. उनकी मौत के बाद घर में अब पत्नी और दो बेटिय़ां हैं. उनके रिश्तेदार ने बताया कि अनवर का शरीर इतने बुरी तरीके से झुलसा हुआ था कि चेहरा पहचानना भी मुश्किल था.

दिनेश कुमार, 35 साल
पेशे से ड्राइवर दिनेश के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं. उनके भाई ने बताया कि उसे इतनी बुरी हालत में अस्पताल लाया गया था कि 8 घंटे तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका.

आमिर, 30, हाशिम 17
ओल्ड मुस्तफाबाद के रहने वाले आमिर और हाशिम बुधवार दोपहर से लापता थे. दोनों के बड़े भाई ने बताया कि गुरुवार को जब वे हॉस्पिटल पहुंचे, तब उनके शव की पहचान की जा सकी.

मुशर्रफ, 35 साल
यूपी के बदायूं निवासी मुशर्रफ को उपद्रवियों ने गोकुलपुरी के नाले में फेंक दिया था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी. पेशे से ड्राइवर मुशर्रफ के परिवार में पत्नी और 3 बच्चे हैं.

विनोद कुमार, 50 वर्ष
अरविंद नगर निवासी विनोद अपने बेटे नितिन के साथ घर आ रहे थे, तभी भीड़ ने उन पर हमला किया और पीट-पीटकर जान ले ली. बाइक भी जला दी.

वीर भान, 48 साल
पेशे से कारोबारी वीर भान को उपद्रवियों ने करावल नगर इलाके में गोली मार दी थी. उनके परिवार में पत्नी और बेटा-बेटी हैं.

जाकिर, 26 साल
ब्रजपुरी में वेल्डर का काम करने वाले जाकिर को भीड़ ने गोली मार दी थी. इससे पहले उसकी बेरहमी से पिटाई की गई थी.

इश्तियाक खान, 24 साल
वेल्डिंग मशीन का काम करने वाले इश्तियाक भी उपद्रवियों की हिंसा के शिकार हुए. भीड़ ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी. उनके घर में डेढ़ साल का बेटा और 3 साल की बेटी है.

दीपक कुमार, 34 वर्ष
झिलमिल में एक निजी फैक्ट्री में काम करने वाले दीपक को भी भीड़ ने गोली मार दी थी. उनकी मौत से पत्नी और बेटा-बेटी पर पहाड़ टूट पड़ा है.

अशफाक हुसैन, 22 साल
पेशे से बिजली मैकेनिक अशफाक को 5 गोलियां लगी थीं. उनके परिवार में नवविवाहिता है. इसी 14 फरवरी को उनका निकाह हुआ था.

परवेज आलम, 50 साल
घोंडा के रहने वाले परवेज आलम मोटर गैराज चलाते थे. मंगलवार को भीड़ की हिंसा के वो भी शिकार हुए थे. उपद्रवियों ने उनके पेट में गोली मार दी थी.

महताब, 21 साल
मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले महताब को उपद्रवियों ने पीट-पीटकर मार डाला. उनके परिजन दो दिनों तक महताब को ढूंढते रहे. आखिरकार गुरुवार को जीटीबी हॉस्पिटल में उन्हें महताब का शव मिला.

मो. फुरकान, 32 साल
लकड़ी के बक्से बनाने वाले फुरकान के घर में अब उनकी पत्नी, 4 साल की बेटी और 3 साल का बेटा बचा है. फुरकान भी उपद्रवियों के हमले का शिकार हो गए थे.

राहुल सोलंकी, 26 साल
सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद निजी कंपनी में नौकरी कर रहे राहुल की बहन की शादी अप्रैल में होनी है. दिल्ली हिंसा के दौरान गोली लगने से राहुल की मौत हो गई.

मुदस्सर खान, 35 वर्ष
ऑटो चलाने वाले मुदस्सर भी दिल्ली हिंसा की भेंट चढ़ गए. उनके घर में दो बच्चे हैं.

शाहिद अल्वी, 24 साल
यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले शाहिद ऑटो चलाते थे. सोमवार को भीड़ ने उन पर भी हमला किया. पेट में गोली लगने से उनकी मौत हो गई. 4 महीने पहले शाहिद का निकाह हुआ था. उनकी पत्नी साजिया गर्भवती हैं.

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अमन, 17 वर्ष
सीलमपुर में रहने वाले अमन को गंभीर अवस्था में हॉस्पिटल लाया गया था.

महरूफ अली, 30 साल
इलेक्ट्रिक सामान की दुकान चलाने वाले महरूफ भी उपद्रवियों की हिंसा के शिकार हुए. भीड़ ने सिर में गोली मारकर महरूफ की हत्या कर दी.

मो. यूसुफ, 52 वर्ष
ओल्ड मुस्तफाबाद के रहने वाले मो. यूसुफ कारपेंटर का काम करते थे. नोएडा से काम करके लौटते वक्त भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उनकी हत्या कर दी. यूसुफ के घर में 7 बच्चे हैं.

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First published: February 28, 2020, 6:00 PM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 10 (08:00 AM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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