दिल्ली हिंसा: आरोपियों की शिकायत पर कोर्ट में सुनवाई, जज बोले- खुद जेल जाऊंगा निरीक्षण करने

इसी साल फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा और उपद्रव की तस्वीर (फाइल फोटो)
इसी साल फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा और उपद्रव की तस्वीर (फाइल फोटो)

अदालत ने जेल महानिदेशक को निर्देश दिया कि वो मामले के सभी 15 आरोपियों की शिकायतों को देखें और मंडोली व तिहाड़ जेल (Tihar Jail) में स्थिति का निरीक्षण करने का किसी को आदेश दें. कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि वो 23 नवंबर को स्थिति के बारे में अदालत को अवगत कराएं

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2020, 10:06 PM IST
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नई दिल्ली. बीते फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंसा (Delhi Violence) और उपद्रव से संबंधित एक मामले में दिल्ली की एक अदालत (Delhi Court) ने तिहाड़ जेल (Tihar Jail) के अधिकारियों के प्रति आरोपियों की इस शिकायत के बाद नाराजगी जताई है कि उन्हें वो बुनियादी चीजें भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिनकी अनुमति जेल नियम (जेल मैनुअल) देते हैं. अदालत ने कहा कि यदि चीजों में सुधार नहीं होता है तो जेल में स्थिति का निरीक्षण (मुआयना) करने जज खुद जाएंगे.

अदालत ने जेल महानिदेशक को निर्देश दिया कि वो मामले के सभी 15 आरोपियों की शिकायतों को देखें और मंडोली व तिहाड़ जेलों में स्थिति का निरीक्षण करने का किसी को आदेश दें. कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि वो 23 नवंबर को स्थिति के बारे में अदालत को अवगत कराएं. इन आरोपियों को गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत नामजद किया गया है.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा, ‘यह खत्म होना चाहिए. महानिदेशक जेल, को स्थिति का निरीक्षण करने, समस्याओं को देखने के लिए किसी को निरीक्षण करने का आदेश देने का निर्देश दिया जाता है. यदि चीजें नहीं सुधरती हैं तो मैं स्वयं निरीक्षण के लिए जाऊंगा और मेरे साथ वकील भी चल सकते हैं.’



तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली हिंसा के आरोपियों ने यहां बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराए जा का आरोप लगाया है, जिनकी अनुमति जेल नियम देते हैं (फाइल फोटो)

वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई सुनवाई में 15 में से सात आरोपियों ने कहा कि उन्हें गरम कपड़े नहीं दिए गए हैं जबकि जेल नियमों के तहत इसकी अनुमति है. वहीं जेल अधिकारियों ने कहा कि इसके लिए उन्हें अदालत के आदेश की आवश्यकता है. इस पर जज ने असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि उनकी समझ में नहीं आ रहा कि आरोपियों को इस तरह की मूलभूत चीजों के लिए हर बार अदालत से संपर्क क्यों करना पड़ता है.

उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों को जेल में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.



दिल्ली हिंसा के दौरान 53 लोग मारे गए थे, लगभग 200 घायल

बता दें कि इसी वर्ष 24 फरवरी को संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हिंसा भड़क उठी थी. यह हिंसा नागरिकता कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद शुरू हुई थी. इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे. घटना के वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने परिवार के साथ भारत दौरे पर आए हुए थे. (भाषा से इनपुट)
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