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CAA के विरोध में की गई दिल्ली हिंसा का मकसद भारत में असंतोष पैदा करना था

CAA के विरोध में की गई दिल्ली हिंसा का मकसद भारत में असंतोष पैदा करना था

दिल्‍ली हिंसा में काफी संख्‍या में लोग मारे गए थे.
 (फाइल फोटो)

दिल्‍ली हिंसा में काफी संख्‍या में लोग मारे गए थे. (फाइल फोटो)

कोर्ट ने UAPA के तहत गिरफ्तार आसिफ इकबाल तन्हा की जमानत याचिका (Bail Application) को दूसरी बार सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन विधयेक (CAA) की आड़ में किया गया आंदोलन हिंसा और अन्य गतिविधियों से जुड़ा था जिससे यह पता चलता है कि इसका उद्देश्य देश में असंतोष पैदा करना था.

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नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Millia University) के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा की जमानत याचिका (Bail Application) को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन विधयेक (CAA Protest) की आड़ में किया गया आंदोलन हिंसा और अन्य गतिविधियों से जुड़ा था जिससे यह पता चलता है कि इसका उद्देश्य भारत के खिलाफ असंतोष पैदा करना था. कोर्ट ने UAPA के तहत गिरफ्तार इकबाल की जमानत याचिका को दूसरी बार सिरे से खारिज कर दिया. दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने इकबाल पर जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शर्जील इमाम पर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में चक्का जाम लगाकर सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रचने का आरोप लगाया है.

नकली दस्तावेजों से खरीदी गई सिम कार्ड का हिंसा में हुआ इस्तेमाल
दिल्ली पुलिस का आरोप है कि आसिफ इकबाल तन्हा ने नकली दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड खरीदा और इसका इस्तेमाल दंगा फैलाने में किया. दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि बाद में यह सिम जामिया के एक अन्य छात्र और सह-आरोपी सफूरा जरगर को दे दी गयी थी. मामले की सुनवाई के दौरान जब तन्हा के वकील सिद्धार्थ ने कोर्ट में कहा कि नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन वाले संगठन जामिया समन्वय समिति और छात्रों के इस्लामिक संगठन यूएपीए के तहत आतंकी संगठन नहीं थे.

इस पर कोर्ट के अतिरिक्त सत्र जज अमिताभ रावत ने कहा, 'ऐसे काम जो भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं, सामाजिक विषमता पैदा करते हैं और लोगों के किसी भी वर्ग में आतंक पैदा करते हैं उन्हें हिंसा में डरा हुआ महसूस कराते हैं यह भी आतंकी गतिविधियों में शामिल है.' हालांकि, मामले की सुनवाई करने वाले जज इस बात से सहमत थे कि इन संगठनों पर यूएपीए के तहत मुकदमा नहीं चलाया गया था. लेकिन उन्होंने कहा कि हमें आतंकवादी अधिनियम के तहत आतंकवादी गतिविधियों को समझना होगा.

दिल्ली हिंसा के दौरान 53 लोग मारे गए थे
बता दें कि इसी वर्ष 24 फरवरी को संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हिंसा भड़क उठी थी. यह हिंसा नागरिकता कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद शुरू हुई थी. इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे.

Tags: Delhi news, Delhi riots, Delhi Violence

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