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दिल्ली हिंसा के दौरान 2020 में हुए दंगे पूर्व नियोजित साजिश थी: उच्च न्यायालय

इब्राहिम की जमानत याचिका को खारिज करते हुए, अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को तलवार के साथ दिखाने वाला उपलब्ध वीडियो फुटेज ‘‘काफी भयानक’’ था  (File)

इब्राहिम की जमानत याचिका को खारिज करते हुए, अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को तलवार के साथ दिखाने वाला उपलब्ध वीडियो फुटेज ‘‘काफी भयानक’’ था (File)

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद (Justice Subramaniam Prasad) ने दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की कथित हत्या से संबंधित मामले में आरोपी मोहम्मद इब्राहिम द्वारा दाखिल जमानत याचिका पर विचार करते हुए कहा कि घटनास्थल के आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरों को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया गया.

  • News18Hindi
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    नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में एक आरोपी को जमानत देने से इनकार (Refusal To Grant Bail) कर दिया. अदालत ने कहा कि ‘‘शहर में कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए यह पूर्व नियोजित साजिश’’ थी और ये घटनाएं ‘‘पल भर के आवेश में नहीं हुईं.’’ न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद (Justice Subramaniam Prasad) ने दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की कथित हत्या से संबंधित मामले में आरोपी मोहम्मद इब्राहिम द्वारा दाखिल जमानत याचिका पर विचार करते हुए कहा कि घटनास्थल के आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरों को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया गया.

    अदालत ने कहा, ‘‘फरवरी 2020 में देश की राष्ट्रीय राजधानी को हिला देने वाले दंगे स्पष्ट रूप से पल भर में नहीं हुए, और वीडियो फुटेज में मौजूद प्रदर्शनकारियों का आचरण, जिसे अभियोजन पक्ष द्वारा रिकॉर्ड में रखा गया है, स्पष्ट रूप से चित्रित करता है. यह सरकार के कामकाज को अस्त-व्यस्त करने के साथ-साथ शहर में लोगों के सामान्य जीवन को बाधित करने के लिए सोचा-समझा प्रयास था.’’ इब्राहिम की जमानत याचिका को खारिज करते हुए, अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को तलवार के साथ दिखाने वाला उपलब्ध वीडियो फुटेज ‘‘काफी भयानक’’ था और उसे हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त है. याचिकाकर्ता इब्राहिम को दिसंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में है. उसने इस आधार पर जमानत मांगी थी कि उसने कभी भी किसी विरोध प्रदर्शन या दंगों में भाग नहीं लिया था.

    वे लगाए गए आरोप में शामिल रहे हैं
    वहीं, बीते हफ्ते खबर सामने आई थी कि दिल्ली के एक अदालत ने दिल्ली हिंसा मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं. अदालत ने कहा है कि सभी तथ्यों व गवाहों के बयानों के आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के पर्याप्त साक्ष्य हैं. कोर्ट ने आरोपी गुरमीत सिंह (Gurmeet Singh), गौरव, दीपक तोमर, राज कमल व विक्रम के खिलाफ अभियोग तय करते हुए अभियोजन पक्ष को उनके खिलाफ गवाहों को पेश करने का निर्देश दिया है. इससे पहले पांचो आरोपियों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए मुकदमें का सामना करने का तर्क रखा. कोर्ट ने उनके खिलाफ दंगा करने, गैरकानूनी रूप से एकत्रित होने, 50 रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाने व आगजनी करने के आरोप में अभियोग तय किए हैं. अदालत (Court) ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ लिखित शिकायत के अलावा गवाहों से स्पष्ट है कि वे लगाए गए आरोप में शामिल रहे हैं.

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