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दिल्ली हिंसा: जान जोखिम में डाल मुस्लिम परिवार को बाहर निकाला, चांदबाग की लड़की को छोड़ा घर
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Updated: February 27, 2020, 10:49 AM IST
दिल्ली हिंसा: जान जोखिम में डाल मुस्लिम परिवार को बाहर निकाला, चांदबाग की लड़की को छोड़ा घर
दिल्ली में हिंसा की घटनाओं के बीच कुछ कहानियां वाकई प्रेरणा देने वाली साबित हो रही हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दिल्ली के हिंसा के बीच कुछ कहानियां इंसानियत को भी बयां करती है. इन कहानियों में एक हिन्दू दोस्त ने हिंसाग्रस्त इलाके में रहने वाले अपने मुस्लिम दोस्त के परिवार को बाहर निकाला. वहीं, एक और कहानी एक ऐसी मुस्लिम लड़की की है जो रास्ता भटक गई थी, उसे भी सुरक्षित उसके घर भेजा गया.

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  • Last Updated: February 27, 2020, 10:49 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हिंसा (Delhi Violence) के बीच चंद कहानियां इंसानियत को भी बयां करती हैं. यमुना विहार इलाके (Yamuna Vihar Area) में रहने वाले हाजी नूर मोहम्मद का परिवार हिंसा के बीच फंस गया था. उपद्रवियों ने उनके मोहल्ले को चारों तरफ से घेर लिया. सऊदी अरब (Saudi Arabia) में रहकर नौकरी करने वाले हाजी नूर मोहम्मद परेशान थे, उनका परिवार मदद के लिए उन्हें बार-बार फोन कर रहा था. वहां की स्थित काफी खराब थी जिस कारण उनका कोई भी रिश्तेदार वहां जाकर नूर मोहम्मद के परिवार को सुरक्षित निकालने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था. संकट की इस घड़ी में हाजी नूर मोहम्मद को अपने दोस्त पूरन चुघ की याद आई. चुघ ने उन्हें अपना मकान बेचा था. नूर मोहम्मद ने चुघ को फोन पर इसकी जानकारी दी.

हिंसा के माहौल में दोस्त के परिवार को निकाला
इसकी जानकारी मिलने के बाद पूरन चुघ ने बिना समय जाया किए अपनी गाड़ी निकाली और उनके घर पहुंच गए. हिंसा और तनाव के माहौल के बीच चुघ ने किसी तरह अपने मुस्लिम दोस्त के परिवार को वहां से बाहर निकाला. इसके अलावा उन्होंने वहां किराए पर रहने वाले एक परिवार को भी बचाया. जिसके बाद उन सभी को उनके रिश्तेदारों के घर ले जाकर सुरक्षित छोड़ा.

दफ्तर से निकली लड़की को भी बचाया 



नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार, एक हिंदू महिला ने मुस्लिम लड़की को हिंसाग्रस्त इलाके से निकालकर सुरक्षित उसके घर पहुंचाया. घोंडा इलाके की रहने वाली पिंकी गुप्ता ने मीडिया को बताया कि उन्हें करिश्मा नाम की एक लड़की मिली, जो शास्त्री नगर में जॉब कर वापस घर लौट रही थी. लेकिन हिंसा और उपद्रव में वो घिर गई. ऐसे समय में पिंकी गुप्ता उसके लिए फरिश्ता बनकर आईं और उन्होंने उसे सकुशल उसके एक रिश्तेदार के घर पहुंचाया.

डरी लड़की को सुरक्षित होने का दिलाया यकीन
दरअसल जब करिश्मा नौकरी के बाद शाम को अपने घर लौट रही थी तो वो नहीं जानती थी कि बाहर हालात इतने ज्यादा खराब हो चुके हैं. मेट्रो स्टेशन बंद होने के लगातार अनाउंसमेंट होने के कारण वो सीलमपुर मेट्रो स्टेशन पर उतर गई. यहां से वो भटक कर पिंकी गुप्ता के मोहल्ले जा पहुंची. यहां उसे कुछ लड़कों ने घेर लिया. यह देख वो बुरी तरह घबरा गई लेकिन इस दौरान पिंकी गुप्ता तत्काल उसकी मदद के लिए वहां पहुंची. उन्होंने करिश्मा को उसके घर पहुंचाकर यकीन दिलाया कि वो अब सुरक्षित है.

चांद बाग में था माहौल खराब, लड़की को रिश्तेदार के यहां छोड़ा
लड़की ने उनसे चांद बाग में उसके घर छोड़ने की अपील की. लेकिन बताया गया कि भड़की हिंसा की वजह से वहां की स्थिति काफी खराब थी. तब पिंकी गुप्ता ने लड़की को उसके मामा के पास सुरक्षित छोड़ने का निर्णय लिया. पिंकी ने कहा कि लड़की को इस स्थिति में देखने के बाद मैंने बिना वक्त गंवाए उसकी मदद की. पिंकी का मानना है कि बेटी चाहे जिसकी भी हो लेकिन वो हमारी (समाज) जिम्मेदारी है.

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First published: February 27, 2020, 10:18 AM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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