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दिल्ली हिंसा: शादी के सालभर के भीतर उजड़ी मांग, कोख में पल रहा 3 महीने का बच्चा

दिल्ली हिंसा: शादी के सालभर के भीतर उजड़ी मांग, कोख में पल रहा 3 महीने का बच्चा

जीटीबी अस्पताल के शवगृह में लोग बदहवास हो कर हर आने-जाने वाले और रुकी गाड़ियों की तरफ आशा भरी  नजरों से देख रहे थे.

जीटीबी अस्पताल के शवगृह में लोग बदहवास हो कर हर आने-जाने वाले और रुकी गाड़ियों की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहे थे.

पिछले तीन दिन से उत्तर-पूर्वी दिल्ली (North-East Delhi) के सबसे बड़े अस्पताल गुरु तेग बहादुर अस्पताल (GTB Hospital) में हर तरफ अफरा-तफरी का आलम है. हर तरफ महिलाएं और बच्चों के लगातार रोने की आवाजें आ रहीं हैं. शवगृह (Mortuary) के सामने हिंसा में जिन परिवारों के चिराग बुझ गए हैं, उनके परिजन बॉडी लेने का इंतजार कर रहे हैं

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नई दिल्ली. न्यूज़ 18 हिंदी की टीम जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सबसे बड़े अस्पताल गुरु तेग बहादुर अस्पताल (GTB Hospital) में पहुंची तो वहां चारों तरफ अफरा-तफरी का आलम था. महिलाएं और बच्चों के लगातार रोने की आवाजें आ रही थीं. जीटीबी अस्पताल के शवगृह (Mortuary) के सामने लोगों का हुजूम उमड़ा था. इस हिंसा और उपद्रव में जिन परिवारों का चिराग बुझ गया है, उसको देखने उनके परिजन आए थे. दूसरी तरफ जीटीबी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में घायलों का इलाज चल रहा था. लोग इधर-उधर भाग रहे थे. आपातकालीन वार्ड से स्ट्रेचर के निकलने और अंदर जाने की आवाजें आ रही थीं. डॉक्टर, नर्स, नर्सिंग स्टाफ मुंह पर मास्क लगाए घायलों को इधर से उधर ले जा रहे थे.

GTB अस्पताल में चारों तरफ पसरा था गम
जीटीबी अस्पताल परिसर में गम का नजारा था. बुधवार का दिन था, हिंसाग्रस्त इलाकों में हालात सामान्य हो रहे थे. सबसे पहले हम मोर्चरी गए. यहां गुस्सा नहीं, सबके चेहरों पर तकलीफ थी. लोग बदहवास हो कर हर आने-जाने वाले और वहां रुक रही गाड़ियों की तरफ देख रहे थे. सब अपनों के शव का जल्द पोस्टमॉर्टम कराकर उसे घर ले जाने का इंतजार कर रहे थे. यहां जमीन पर हिंसा में मारे गए राहुल सोलंकी के पिता हरि सिंह सोलंकी बैठे हुए थे. उन्हें पोस्टमॉर्टम के बाद अपने बेटे का शव मिलने का इंतजार था. आसपास महिलाओं का हुजूम था, जो लगातार रो रही थीं, उनकी आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे. शवगृह के सामने पार्क की रेलिंग पर दो महिलाएं खड़ी थीं. पार्क के साथ खड़ी एक महिला के देवर मेहताब को उपद्रवियों ने गोली मार दी थी, वो भी बाकियों की तरह शव मिलने का इंतजार कर रहीं थी.

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जीटीबी अस्पताल के परिसर में दुख और गम का माहौल था


दूध लेने गया, वहीं मार दिया
न्यूज़ 18 हिंदी ने मेहताब के बारे में उनकी भाभी से पूछा तो उन्होंने रोते हुए कहा, 'मैं बृजपुरी इलाके की गली नंबर 51 की रहने वाली हूं. मेरा देवर मेहताब भी मेरे साथ रहता था. मैंने अपने देवर को दूध लाने के लिए भेजा था. लेकिन वो उपद्रवियों के हत्थे चढ़ गया. काफी देर तक वो दूध ले कर नहीं लौटा तो मैंने अपने पति को फोन किया. इसके बाद मैं अपने बच्चों को घर में अकेला छोड़कर उसको खोजने निकली तो गली के ही कुछ लोगों को बाहर के कुछ लोग मेरे देवर का फोटो दिखा कर पूछ रहे थे. उन लोगों ने कहा कि इसको जला दिया गया है और उसकी लाश दूसरी गली में सड़क पर पड़ी है. जब मैं वहां भागकर गई तो देखा कि मेरे देवर मेहताब की मौत हो गई है.'

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दिल्ली हिंसा में शिकार हुए मेहताब की भाभी (दाहिने तरफ हाथ पर हाथ रखी हुई)


दो भाई से ब्याही दो बहनें, एक की मांग उजड़ी
शवगृह के आसपास मीडिया का हुजूम था, सभी जानना चाह रहे थे कि आखिर यह सब कैसे हुआ. थोड़ा आगे बढ़ने पर हमें एक लड़का बैठा हुआ मिला, जिसके भाई को भीड़ ने बीच रास्ते में रोक कर मार डाला था. वो भी औरों की तरह अपने भाई का शव मिलने का इंतजार कर रहा था. उसका आरोप था कि शवगृह के गेट पर मौजूद गार्ड शव सौंपने की एवज में उससे चार हजार रुपये मांग रहा है. जब न्यूज़ 18 हिंदी की टीम ने गार्ड से इस बारे में पूछा तो वो आरोपों से मुकर गया.

मृतक शाहिद का भाई इमरान न्यूज़ 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहता है, 'हम लोग बुलंदशहर के रहने वाले हैं. हम तीन भाई हैं, जिसकी हत्या हुई है वो सबसे छोटा है. यहां (दिल्ली) हम मुस्तफाबाद में 15 फुटा रोड, 17 नंबर गली में रहते हैं. हम तीनों भाई काम पर गए हुए थे. दो भाई ऑटो चलाते हैं और मैं मैकेनिक का काम करता हूं. ये घटना चांदबाग भजनपुरा दरगाह वाला इलाके की है जहां से मेरा छोटा भाई शाम के तीन-चार बजे लौट रहा था. उसको गाड़ी से उतार कर पेट में गोली मार दी गई. हमारी गली के पीछे वाले नर्सिंग होम में कुछ लोग उसको लेकर आए लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई थी. हम दोनों की शादी नौ महीने पहले ही हुई थी. हम दोनों की पत्नियां आपस में सगी बहनें हैं. उसकी पत्नी के गर्भ में तीन महीने का बच्चा पल रहा है. उसकी पत्नी का रो-रोकर हाल बुरा है. वो अभी सीमापुरी अपने घर चली गई है. परिवार गहरे सदमे है. शादी को साल भर भी नहीं बीता है और अब ये हो गया.'

शाहिद के भाई इमरान ने बताई उस हिंसाग्रस्त शाम की कहानी



अर्धसैनिक बलों ने बचाया

इसके बाद न्यूज़ 18 हिंदी की टीम अस्पताल में घायलों के वॉर्ड की तरफ बढ़ी. बुधवार को भी इमरजेंसी वॉर्ड में हिंसा में घायल हुए लोगों के आने का सिलसिला जारी था. आपातकालीन वॉर्ड के पीछे वाली गेट पर स्ट्रेचर पर घायल पड़ी एक महिला सुरैया मिली, जिसको दंगाइयों ने बुरी तरह मारा-पीटा था. सुरैया के शरीर पर कई पट्टियां बंधी थी. उसके दाहिने पैर और दाहिने हाथ में फ्रैक्चर था, जिस पर प्लास्टर चढ़ा था. सुरैया के साथ वहां उसका पति मजरूल हसन मौजूद था जो पेशे से ड्राइवर है. ये लोग शिव विहार की गली नंबर 22 में रहते हैं.

सुरैया के पति ने न्यूज़ 18 हिंदी को बताया कि 'मेरे तीन बच्चे हैं. मंगलवार शाम तक उसके इलाके में कुछ नहीं था, लेकिन अचानक ही 20-25 लोगों की भीड़ आ गई और सब दरवाजा पीटने लगे. मुझे लगा कि ये लोग दरवाजा तोड़ देंगे. मैं अपने बच्चों और पत्नी को लेकर छत की तरफ भागा. बच्चे और मैं तो छत पर पहुंच गए लेकिन दंगाइयों ने मेरी पत्नी को खींच लिया और उसे बुरी तरह पीटा. मैं किसी भी तरह जान बचाकर अपनी छत से दूसरी ओर बच्चों के साथ निकल भागा. जब भीड़ चली गई तो मैं वापस घर लौटा. यहां मैंने पत्नी को बेहोश पाया. रात के तकरीबन साढ़े तीन बजे पुलिस आई और उसने हमें वहां से निकाला. उस इलाके में करीब एक हजार लोगों को पुलिस ने बाहर निकाला. वो रात बहुत डरावनी थी.'

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सुरैया के दाहिना पैर और दाहिने हाथ में फ्रैक्चर था, जिस पर प्लास्टर चढ़ा था


पीड़ित का आरोप कि पुलिस ने भी पीटा
अभी तक पुलिस के बचाने की बात सुन रहे थे लेकिन जब अस्पताल में न्यूज़ 18 हिंदी ने घायल एक बुजुर्ग व्यक्ति से बात की तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई. लगभग 70 वर्षीय मोहम्मद अब्बास कहते हैं, 'मुझे तो पुलिस ने ही बुरी तरह से पीटा और घायल कर दिया. मंगलवार की शाम को मगरिब की नमाज (शाम की नमाज) पढ़ कर उठा ही था कि पुलिसवालों ने आकर पीट दिया. जब पुलिस गई तो उसके बाद आई 10-12 लोगों की भीड़ ने मारपीट की. मुझे बहुत चोटें आई हैं. बाद में मेरा बेटा मुझे अस्पताल ले कर आया.'

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70 साल के मोहम्मद अब्बास ने कहा कि मुझे तो पुलिस ने ही बुरी तरह से पीटा और घायल कर दिया


सड़क पर रोक कर पीटा
इसके बाद हमे घोंडा में रहने वाले कासिम और शाहनवाज मिले, इन दोनों को भीड़ ने जमकर पीटा. दोनों का इलाज जीटीबी अस्पताल में चल रहा है. इसके साथ ही यहां कई और भी शख्स मिले जो बीते दो-तीन दिनों से इलाके के अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे, लेकिन हालत ज्यादा खराब होने के कारण उनको जीटीबी अस्पताल में रेफर किया गया है.

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