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दिल्ली हिंसा: 9 महीनों से जारी जांच से पुलिस ही 'अनजान', कोर्ट ने दलील को बताया हास्यास्पद

दिल्ली हिंसा मामले में एक नीचली अदालत ने पुलिस को फटकार लगाई है. (सांकेतिक तस्वीर)

दिल्ली हिंसा मामले में एक नीचली अदालत ने पुलिस को फटकार लगाई है. (सांकेतिक तस्वीर)

Delhi News: उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा मामले में हुई सुनवाई. निचली अदालत ने पुलिस की ‘अजीबो-गरीब’ दलील से नाराज होकर कड़ी फटकार लगाई.

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    नई दिल्ली. नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली (North-East Delhi) में हुई हिंसा मामले में पुलिस की ‘अजीबो-गरीब’ दलील से नाराज होकर एक निचली अदालत (Court) ने उसे कड़ी फटकार लगायी है. यदि पुलिस की दलीलें मानें तो उसे खुद 9 महीने तक पता ही नहीं था कि नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े एक मामले की वह जांच भी कर रही है. इसके अलावा पुलिस ने इसी तरह की कुछ और दलीलें भी कोर्ट में पेश की. इन दलीलों पर कोर्ट ने आश्चर्य प्रकट करने के साथ ही इन्हें हास्यास्पद भी बताया है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सरकारी वकील को फटकार भी लगाई है.

    टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि मामले को बिना जांच के ही खारिज कर दिया गया, जबकि जांच शिकायत दर्ज कराने के बाद ही शुरू होती है.
    जज ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हो रहे विशेष सरकारी वकील के रवैये को ‘हास्यास्पद’ और ‘अतर्कसंगत’ भी पाया. वकील ने दलील दी थी कि जांच अधिकारी ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में इस बात का जिक्र ‘अनजाने’ में नहीं किया था कि संबंधित व्यक्ति की शिकायत दूसरे मामले के साथ सम्बद्ध कर दी गयी थी एवं निश्चित तौर पर आरोपों की जांच जारी है.

    अदालत ने कही ये बाद
    अदालत ने कहा, “यदि इस दलील को मान भी लिया जाये, तो इसका अर्थ है कि संबंधित आईओ/एसएचओ को मार्च से लेकर नवम्बर 2020 में जवाब दायर करने और इस अवधि में मजिस्ट्रेट के समक्ष हुई सुनवाई में हिस्सा लेने के बावजूद ये तक पता नहीं था कि इस शिकायत को एफआईआर संख्या 109/20 के साथ जोड़ दिया गया था. मौजूदा पुनरीक्षण याचिका दायर करने के समय ही उसे किसी प्रकार यह मालूम हुआ कि वह इस मामले की पहले से जांच कर रहा है.” कोर्ट की यह व्यंग्यात्मक टिप्पणी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ पुलिस द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर आयी. मजिस्ट्रेट ने सलीम नामक व्यक्ति की शिकायत पर अलग से प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था. यह पुनरीक्षण याचिका एडवोकेट महमूद प्राचा के जरिये दायर की गयी.

    नामजद आरोपियों के खिलाफ शिकायत
    सलीम ने नामजद और गैर-नामजद आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी थी कि दंगों के दौरान उनलोगों ने 24 फरवरी 2020 को उस पर हमले किये थे. उधर पुलिस का कहना था कि सलीम खुद दंगे में शामिल था. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में कोई गड़बड़ी नहीं है. उन्होंने नॉर्थ-ईस्ट पुलिस उपायुक्त को सात दिन के भीतर पृथक एफआईआर दायर करने का निर्देश दिया.

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