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Yamuna River News: यमुना के पानी की क्‍वालिटी में सुधार के लिए 2023 तक करना होगा इंतजार, जानें पूरा मामला

यमुना का पानी तमाम कवायदों के बाद भी साफ नहीं हो पा रहा है.

यमुना का पानी तमाम कवायदों के बाद भी साफ नहीं हो पा रहा है.

Yamuna River News: दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (Delhi Pollution Control Committee) की रिपोर्ट के मुताबिक, यमुना नदी के पानी की गुणवत्ता (Water Quality) में सुधार का कोई लक्षण देखने के लिए कम से कम 2023 तक इंतजार करना पड़ेगा. हालांकि इस समय कई प्रोजेक्‍ट पर काम चल रहा है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. राजधानीवासियों को ‘मैली’ यमुना के पानी की गुणवत्ता में (Water Quality) सुधार का कोई लक्षण देखने के लिए कम से कम 2023 तक तो इंतजार करना ही होगा. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (Delhi Pollution Control Committee) की रिपोर्ट तो कम से कम यही बयां करती है.

    टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, डीपीसीसी की ओर से तैयार की गयी नयी रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी दिल्ली में सीवेज ट्रैपिंग प्रोजेक्ट्स और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) निर्माण कार्य के 2023 के मध्य से लेकर अंतिम महीने तक पूरा होने उम्मीद है, इसलिए यमुना के पानी की गुणवत्ता में कोई दृश्यात्मक सुधार 2023 से पहले तो नहीं हो सकता है.

    रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में फिलहाल 2715 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) की संयुक्त क्षमता के 35 एसटीपी मौजूद हैं. जबकि राजधानी में 3273 एमएलडी सीवेज का उत्पादन होता है अर्थात 559 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता अब भी मौजूद नहीं है. इस अंतर को पाटने के लिए यमुना विहार एसटीपी, कोंडली, रिठाला, कोरोनेशनल पिलर एसटीपी एवं ओखला एसटीपी में काम चल रहा है.

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    कोंडली एवं रिठाला एसटीपी का 2023 में होगा पूरा काम
    कोंडली एवं रिठाला एसटीपी के अपग्रेडेशन का काम मार्च 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है. जबकि ओखला एसटीपी का 36 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है. इस परियोजना को दिसम्बर 2022 में पूरा किया जाना है. यमुना विहार एसटीपी को पूरा करने के लिए पहले निर्धारित की गयी अवधि जल्द ही संशोधित की जाएगी.

    रिपोर्ट में उपलब्ध समयसीमा के अनुसार, इंटरसेप्टर सीवर प्रोजेट मार्च 2023 तक 1082 एमएलडी के सम्पूर्ण फ्लो को ट्रैप कर पाएगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में वजीराबाद और ओखला के बीच 18 प्रमुख नालों में से 13 को अब तक ट्रैप किया जा चुका है. इसके अलावा आईएसपी परियोजना में दो मुख्य नाले नजफगढ़ और शाहदरा शामिल हैं, जहां उपनालों से आने वाले पर्याप्त बहाव को ट्रैप करके ट्रीट किया जाएगा. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि शेष तीन नालों (महारानी बाग, मोरी गेट और बारापुला) के लिए कार्य योजना तैयार की जा चुकी है.

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