...तो क्या फिर मॉनसून में डूबेगी दिल्ली, जानिये नालों की डिसिल्टिंग का कैसा है हाल?

प्री मॉनसून में हुई घंटों की बारिश में राजधानी के कई इलाकों की सड़कों पर भरे लबालब पानी ने मॉनसून से निपटने की तैयारियों पर पानी फेर दिया था. (File Photo)

Delhi Monsoon: प्री मॉनसून में हुई घंटों की बारिश में राजधानी के कई इलाकों की सड़कों पर भरे लबालब पानी ने दिल्ली सरकार (Delhi Government) और सिविक एजेंसियों (Civic Agencies) की मॉनसून से निपटने की तैयारियों पर पानी फेर दिया था. बावजूद इसके दिल्ली सरकार और सिविक एजेंसियां नालों की सफाई का दंभ भर रही हैं.

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    नई दिल्ली. दिल्ली में 2 से 3 दिन बाद मॉनसून (Monsoon) के आने की प्रबल संभावना है. लेकिन प्री मॉनसून में हुई घंटों की बारिश में राजधानी के कई इलाकों की सड़कों पर भरे लबालब पानी ने दिल्ली सरकार (Delhi Government) और सिविक एजेंसियों (Civic Agencies) की मॉनसून से निपटने की तैयारियों पर पानी फेर दिया था. बावजूद इसके दिल्ली सरकार और सिविक एजेंसियां नालों की सफाई का दंभ भर रही हैं.

    दिल्ली की तीनों नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 4 फुट से कम गहरे नालों की डिसिल्टिंग का काम करीब-करीब पूरा माना जा रहा है. वहीं, साउथ एमसीडी (South MCD) की ओर से तो यह भी दावा किया जा रहा है कि उसने अपने लक्ष्य से निर्धारित ज्यादा डिसिल्टिंग काम पूरा कर लिया है.

    तीनों निगमों का दावा-गाद निकालने का काम पूरा
    साउथ एमसीडी के अंतर्गत 272 नाले आते हैं जो कि कुल 188.38 किलोमीटर लंबे नाले हैं. 1 जुलाई तक इन सभी नालों में से 37,760 मीट्रिक टन गाद निकालने का काम पूरा करने का दावा किया गया है. ऐसा ही कुछ दावा ईस्ट एमसीडी (East MCD) और नॉर्थ एमसीडी (North MCD) की ओर से किया जा रहा है. इन दोनों एमसीडी (MCD) के अंतर्गत करीब 450 नाले आते हैं. इन सभी नालों की डीसिल्टिंग (Desilting) का काम भी करीब-करीब पूरा माना जा रहा है.

    वहीं, तीनों निगम भी दावा कर रही हैं कि मॉनसून के दौरान किसी भी तरह की वाटर लॉगिंग (Water Logging) से निपटने के लिए पूरी तरीके से तैयारियां की गई हैं. जहां पर वॉटर लॉगिंग होने की संभावना है, उन जगहों पर पंपों की विशेष व्यवस्था की गई है.

    दिल्ली नगर निगमों के अलावा अगर बात करें 4 फुट से ज्यादा गहरे नालों की साफ सफाई करने वाली दूसरी सरकारी एजेंसी की तो लोक निर्माण विभाग भी दावा कर रहा है कि उसने अपने अधीनस्थ आने वाले 90 फ़ीसदी नालों की साथ सफाई यानी डिसिल्टिंग का काम पूरा कर लिया है.

    दिल्ली का ड्रेनेज नेटवर्क में 3,320 किलोमीटर 
    इस बीच देखा जाए तो दिल्ली में 3,320 किलोमीटर ड्रेनेज नेटवर्क है जिसमें 70 प्रतिशत 2,588 किलोमीटर दिल्ली सरकार (Delhi Government) और 14 प्रतिशत 521.87 किलोमीटर दिल्ली नगर निगम (MCD) के पास तथा बाकी केन्द्र सरकार (Central Government) के अधीन है.

    PWD ने निकाला सर्कुलर, अफसरों की तय की जिम्मेदारी
    पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की माने तो दिल्ली भर में उसके अंतर्गत आने वाले 17 मंडलों में 1,260 किलोमीटर लंबी सड़क के साथ 2,050 किलोमीटर नालों का डिसिल्टिंग का काम उसके द्वारा किया जा रहा है. अब तक इन नालों की 90 फीसदी डिसिल्टिंग की जा चुकी है. साथ ही इस बार जलभराव को लेकर किसी भी तरह की अप्रिय घटना होने की स्थिति में अफसरों की जवाबदेही भी तय की गई है.

    लोक निर्माण विभाग की ओर से एक सर्कुलर भी जारी किया गया है जिसमें साफ किया गया है कि अगर उसके अधीनस्थ क्षेत्र में जलभराव होती है और कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी कार्यपालक अभियंताओं की होगी.

    बताते चलें कि पिछले साल मिंटो ब्रिज (Minto Bridge) के पास वाटर लॉगिंग होने के दौरान एक 56 वर्षीय शख्स मिनी ट्रक चालक की पानी में डूबने से मौत हो गई थी. इस तरह की घटना के मद्देनजर पीडब्ल्यूडी ने इस बार विशेष तौर पर जिम्मेदारी तय की है.

    पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ने किया यह दावा
    लोक निर्माण विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने नालों की सफाई का काम समय से शुरू कर दिया था. लेकिन कोरोना के चलते मजदूरों की भारी कमी की वजह से बीच में इस कार्य को रोक दिया गया था. कोरोना वायरस के चलते मजदूर बीच में ही काम छोड़ कर अपने घरों को लौट गए. जहां तक पूरी तरीके से नालों की सफाई का सवाल है तो कुछ ही इलाकों में गाद निकालने का काम बाकी है और वह कुछ ही दिनों में पूरा कर लिया जाएगा.

    उधर, नॉर्थ दिल्ली नगर निगम (NDMC) में कांग्रेस दल के नेता मुकेश गोयल ने आरोप लगाया कि मॉनसून से पूर्व हर साल दिल्ली सरकार के अंतर्गत PWD, Irrigation and Flood Department, DSIDC, APMC और दिल्ली नगर निगम अपने अधीन नालों की सफाई का दावा करते हैं. परंतु डिसिल्टिंग भ्रष्टाचार का एक बड़ा जरिया होने के कारण प्रति वर्ष भाजपा (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार नालों की सफाई के नाम पर हजारों करोड़ भ्रष्टाचार करके डकार जाती है.

    उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार द्वारा सैंकड़ों करोड़ द्वारा चांदनी चौक के सौंदर्यकरण के नाम खर्च किए गए परंतु मानसून की पहली बारिश में चांदनी चौक में लबालब जल भराव ने दिल्ली सरकार की पोल खोल कर रख दी कि भ्रष्टाचार बड़ी मात्रा में हुआ है.

    सीएम के नेतृत्व में डिसिल्टिंग के लिए बनी हुई है अपैक्स कमेटी
    इस बीच देखा जाए तो डिसिल्टिंग की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) की अध्यक्षता में एक अपैक्स कमेटी भी गठित की हुई है. इस कमेटी में दिल्ली नगर निगम, दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार के प्रशासनिक अधिकारी, विधायक, डीडीए सहित सभी संबधित विभागों के अधिकारी भी सदस्य हैं. डिसिल्टिंग तैयारियों का जायजा लेने के लिए कमेटी की 23 जून को बैठक भी हुई थी जिसमें सीएम केजरीवाल उपस्थित नहीं हो‌ सके थे.

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