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लॉकडाउन में साफ-सुथरी हुई यमुना में फिर बढ़ा प्रदूषण, नदी में दिख रहा झाग का अंबार

दिल्ली में यमुना नदी में इस दिनों झाग ही झाग दिख रहा है जो बताता है कि नदी में प्रदूषण का स्तर फिर काफी बढ़ चुका है

दिल्ली में यमुना नदी में इस दिनों झाग ही झाग दिख रहा है जो बताता है कि नदी में प्रदूषण का स्तर फिर काफी बढ़ चुका है

जानकार मानते हैं कि यमुना नदी (Yamuna River) में देखे जा रहे झाग के पीछे कई वजह हो सकती है. हालांकि सीधे तौर पर किसी खास वजह को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है. हालांकि कुछ लोग मान रहे हैं कि कोविड 19 (Covid 19) से बचाव के लिए बड़ी आबादी वाले दिल्ली (Delhi) शहर में लोग हाथ धोने या कपड़े धोने जैसा काम बहुत ज्यादा कर रहे हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 6:02 PM IST
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नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में यमुना नदी (Yamuna River) में झाग का अंबार लगा दिख रहा है. आईटीओ ब्रिज (ITO Bridge) के पास आम तौर पर ऐसा नहीं दिखता है. खास कर लॉकडाउन (Lockdown) के समय दिल्ली में यमुना का प्रदूषण (Yamuna Pollution) स्तर काफी गिर गया था. लेकिन अचानक आए इस बदलाव के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं. बीते दो दिन से यमुना नदी का दृष्य काफी चौंकाने वाला है. जबकि कुछ महीने पहले कोविड लॉकडाउन के दौरान लोग यमुना को देखकर इतरा रहे थे. जो काम दशकों से कोई सरकार नहीं कर पाई थी, लॉ़कडाउन ने यमुना को उस स्तर तक साफ कर दिया था.

जानकार मानते हैं कि यमुना में देखे जा रहे इस तरह से झाग के पीछे कई वजह हो सकती है. हालांकि सीधे तौर पर किसी खास वजह को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है. हालांकि कुछ लोग मान रहे हैं कि कोविड 19 से बचाव के लिए बड़ी आबादी वाले दिल्ली शहर में लोग हाथ धोने या कपड़े धोने जैसा काम बहुत ज्यादा कर रहे हैं. इसके अलावा अचानक गर्मी महसूस होने से भी लोग नहाने से परहेज नहीं कर रहे हैं, और इस सबमें बड़ी संख्या में केमिकल इस्तेमाल होता है जो आखिरकार यमुना में जा रहा है.

INTACH (The Indian National Trust for Art and Cultural Heritage) के मनु भटनागर लंबे समय से यमुना और बाकी नदियों और तालाबों को लेकर काम कर रहे हैं. उनका मानना है कि इंडस्ट्री और घरेलू प्रदूषण के अलावा दिल्ली के तापमान में अचानक आए बदलाव से ऐसा दिख रहा है. उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री का पॉल्युशन है जो ज्यादा ट्रीट नहीं होता है. दो इंडस्ट्री अलग-अलग वेस्ट निकालती हैं और किसी दिन यह एक साथ मिल जाएं और उसमें झाग बनने का गुण हो तो यह देखा जा सकता है. इसके अलावा नदी में पानी कम है, पानी का बहाव हो तो पाल्यूटेंट बहकर नकल जाते हैं, लेकिन यमुना में पानी बहुत कम है.



भटनागर ने कहा कि लॉकडाउन में माइग्रेंट लेबर्स बड़ी संख्या में बाहर थे तो लोड कम था. इंडस्ट्रीज उस दौरान बंद थे जिसका असर यमुना पर दिखता था. लेकिन अब हालात बदल गए हैं और हर लेवल पर पॉल्युशन बढ़ा है. उन्होंने कहा कि माइग्रेंट लेबर्स या झुग्गियों में जो पानी इस्तेमाल करते हैं वो ट्रीट नहीं होता है. इससे साबुन और बाकी गंदगी के साथ नाइट्रेट और फॉस्फेट यमुना में आते हैं और फिर धूप भी पिछले कुछ दिनों से तेज हो गई है जो इस तरह के केमिकल या पानी से साथ रिएक्शन करता है. इसलिए यमुना में झाग वाले प्रदूषण के कई कारण हैं, और किसी एक कारण को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं.
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