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Dengue Fever: क्‍या यूपी-बिहार में कोरोना जितना गंभीर हो गया है डेंगू, बढ़ते मामलों पर ये बोले विशेषज्ञ

देश में डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. राज्‍यों में कोविड के लिए तैयार किए गए इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को डेंगू के इलाज में इस्‍तेमाल किया जा रहा है.

देश में डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. राज्‍यों में कोविड के लिए तैयार किए गए इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को डेंगू के इलाज में इस्‍तेमाल किया जा रहा है.

Dengue fever: देश के कई राज्‍यों में डेंगू कहर बरपा रहा है. यूपी, एमपी, बिहार, हरियाणा, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्‍यों में डेंगू के मरीजों बढ़ने के साथ ही इससे अभी तक 100 से ज्‍यादा बच्‍चों की मौत हो चुकी है. बीमारी के कहर के कारण डेंगू के मरीजों के लिए अब कोविड डेडिकेटेड सुविधाओं को इस्‍तेमाल किया जा रहा है.

  • News18Hindi
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नई दिल्‍ली. कोरोना के घटते मामलों से जहां देश को राहत मिल रही है वहीं मौसमी बीमारियों ने एकाएक पैर पसार लिए हैं. यूपी, बिहार, मध्‍य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्‍यों में बड़ी संख्‍या में बच्‍चे और बड़े डेंगू (Dengue) और वायरल फीवर (viral Fever) की चपेट में आ रहे हैं. इन राज्‍यों में अभी तक 100 से ज्‍यादा बच्‍चों की मौत इन मौसमी बीमारियों से हो चुकी है. ऐसे में इन मौसमी बीमारियों के भी कोरोना (Covid-19) की तरह गंभीर होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं.

यूपी के कई जिलों खासकर मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, कानपुर, लखनऊ, मेरठ और प्रयागराज आदि में डेंगू और वायरल फीवर के मरीजों के साथ ही मृतकों की संख्‍या भी बढ़ रही है. इन मामलों को लेकर स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार देश में डेंगू काफी खतरनाक स्थिति में है. आईसीएमआर की ओर से भी कहा गया है कि इस बार डेंगू के डीटू स्‍ट्रेन (D2 Strain) के चलते मौतें ज्‍यादा हो रही हैं. यह डेंगू का खतरनाक स्‍ट्रेन है. वहीं वायरल फीवर के अलावा स्‍क्रब टाइफस (Scrub-Typhus) और लैप्‍टोस्‍पाइरोसिस जैसी नई बीमारी भी फैल रही है.

लहर की तरह आता है डेंगू-चिकनगुनिया  

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) में ऑपरेशनल रिसर्च ग्रुप ऑफ द नेशनल टास्‍क  फोर्स फॉर कोविड-19 डॉ. नरेंद्र कुमार अरोड़ा कहते हैं कि डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां लहर की तरह आती हैं. यह लहर तीन से चार साल में भी आ सकती है, उससे ज्‍यादा भी समय ले सकती है. 2017-18 के बाद 2021 में इस बार डेंगू के मामले तेजी से बढ़े हैं और मौतें भी हुई हैं. डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि डेंगू इस बार ज्‍यादा असर कर रहा है लेकिन राज्‍यों में जिला स्‍तर पर कोविड के मरीजों के लिए की गई व्‍यवस्‍थाएं आज अस्पतालों में मौजूद हैं. पिछले सालों के मुकाबले इस बार स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ज्‍यादा मजबूत स्थिति में है. ऐसे में डेंगू पर नियंत्रण पाया जा सकता है. हालांकि लोगों को अपने स्‍तर पर भी मच्‍छरों से बचाव और डेंगू की चपेट में आने से बचने के अलावा इससे प्रभावित होने पर तत्‍काल इलाज के लिए जाना होगा.

कोविड इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, बेड का हो रहा इस्‍तेमाल

मथुरा जिला महामारी विज्ञानी डॉ. हिमांशु मिश्र ने बताया कि डेंगू से निपटने के लिए जिला अस्‍पतालों में मच्‍छरदानी के साथ बेड की व्‍यवस्‍थाएं की गई है. कोरोना के दौरान राज्‍य सरकार की ओर से सभी जिलों में इंटीग्रटेड कोविड कमांड सेंटर्स (ICCC) बनाए गए थे. ये मुख्‍य रूप ये हेल्‍पलाइन सेंटर्स थे जहां कोविड के मामलों को रिपोर्ट करने पर जिला स्‍तर से एंबुलेंस आदि की सुविधा दी जाती थी. अब कोविड के मामले तो न के बराबर हैं. ऐसे में आईसीसीसी को डेंगू या वायरल फीवर के लिए हेलप्‍लाइन सेंटर (Helpline Center) के रूप में इस्‍तेमाल किया जा रहा है. यहां तक कि कोई भी व्‍यक्ति सामान्‍य बुखार (Fever) को लेकर भी यहां फोन कर सकता है.

डॉ. मिश्र कहते हैं कि इसके अलावा कोविड मरीजों के लिए बनाए गए कोविड डेडिकेटेड बेड्स (Covid Dedicated Beds) को भी डेंगू के मरीजों के लिए उपयोग में लाया जा रहा है. वहीं कोविड को लेकर बने आईसीयू बेड (ICU Bed) या पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (PICU) को भी मथुरा की तरह सभी जिलों में जहां मौसमी बीमारियों के मरीज सामने आ रहे हैं, इस्‍तेमाल किया जा रहा है. फिलहाल डेंगू या वायरल फीवर से निपटने के लिए सुविधाओं या स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों की कमी नहीं है.

 कोविड जितना भयंकर नहीं है डेंगू

आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज में डेंगू फीवर को लेकर नोडल अधिकारी बनाए गए प्रोफेसर मृदुल चतुर्वेदी का कहना है कि पिछले 10-15 सालों के बाद यूपी में डेंगू के इतने मामले सामने आए हैं और इसकी वजह भी डीटू स्‍ट्रेन बताई जा रही है. 90 के दशक में दिल्‍ली में कुछ केस डीटू स्‍ट्रेन के मिले थे लेकिन यहां यह स्‍ट्रेन नहीं मिलता था और ऐसे में डेंगू से मौतें भी कम होती थीं. इस बार मरीज बढ़ रहे हैं. एसएन में आसपास के जिलों जैसे शिकोहाबाद, एटा, इटावा, मैनपुर से रोजाना आधा दर्जन मामले गंभीर डेंगू मरीजों के आ रहे हैं. ये या तो रैफर किए हुए केस होते हैं या डेंगू के शॉक सिंड्रोम या हैमरेजिक स्थिति में पहुंच चुके मरीज होते हैं. हालांकि इसके बावजदू हालात काबू में हैं. मेडिकल कॉलेज हों या राज्यों के सरकारी अस्पताल इनमें पिछले साल से कोविड मैनेजमेंट में लगे मेडिकल उपकरण, बेड, आईसीयू सुविधाएं, डॉक्टर्स और स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारी लगे हैं.

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