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दिल्ली में निर्माण क्षेत्र से जुड़े मजदूरों का होगा पंजीकरण, मिलेंगी सरकारी सुविधाएं: डिप्टी सीएम

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि निर्माण क्षेत्र से जुड़े मजदूरों को श्रम विभाग पंजीयन करेगा.
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि निर्माण क्षेत्र से जुड़े मजदूरों को श्रम विभाग पंजीयन करेगा.

दिल्ली (Delhi) के उपमुख्यमंत्री व श्रम मंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने कहा है कि दिल्ली में निर्माण क्षेत्र (Constraction) से जुड़े मजदूरों (Labours) का पंजीयन होगा और उनको सरकारी सुविधाएं मिलेगी. इसके लिए दिल्ली सरकार 45 पंजीयन केंद्र बनाया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 22, 2021, 3:50 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली सरकार (Delhi Government) के डिप्टी सीएम और श्रम मंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने आज यानी सोमवार को ऐलान किया है कि उनकी सरकार निर्माण क्षेत्र से जुड़े मजदूरों को श्रम बोर्ड (Labor Board) से जोड़ने के लिए अभियान चलाएगी. इस मुहिम के तहत सरकार दिल्ली में 300 से अधिक स्थानों पर पंजीकरण विज्ञापन और पंजीकरण अभियान शुरू कर रही है.

दिल्ली में इन पंजीकरण शिविरों का आयोजन 45 जगहों पर किया जायेगा. मनीष सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली में 10 लाख कंस्ट्रक्शन वर्कर हैं. इनमें, मज़दूर, गार्ड, प्लंबर आदि हैं, जिनमें से दो लाख 12 हज़ार वर्कर ही रजिस्टर्ड हैं. बाकी के बचे हुये वर्कर्स को इस अभियान से जोड़ने के लिए 300 जगहों पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. दिल्ली में 262 ऐसी जगहें हैं, जहां पर मज़दूर इकट्ठे होते हैं. इन जगहों को लेबर चौक कहते हैं. दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने बताया कि दिल्ली में 45 साइट्स पर रजिस्ट्रेशन कैम्प लगाए जाएंगे.

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बता दें कि श्रम बोर्ड से जुड़ने पर निर्माण क्षेत्र से जुड़े मज़दूरों को कई तरह का लाभ मिलता है, जिनमें पेंशन, मेडिकल, शिक्षा, शादी इत्यादि से जुड़े लाभ शामिल हैं. इनमें महिला को मैटरनिटी के लिए 30 हज़ार, मिसकैरेज में 3000 रुपए, मजदूर को 60 साल का होने पर 3000 हजार की पेंशन, घर खरीदने के लिए 3 से 5 लाख की मदद दी जाती है.
डिसेबल होने 3000 रुपए पेंशन मिलती है. टोटल डिसेबल होने पर 1 लाख मदद, महंगे टूल पर 20 हजार, नेचुरल डेथ में 1 लाख रुपए और साइट पर डेथ होने पर दो लाख की मदद दी जाती है. इसके अलावा मेडिकल सहायता के लिए 10 हजार रुपए की मदद दी जाती है. लेबर का बच्चा का 1 से 8 तक हर साल 6 हज़ार, 9-10 तक 8400 प्रति वर्ष, इंटरमीडिएट के लिए 12 हजार की मदद दी जाती है. सरकार की कोशिश है दिल्ली के सभी 10 लाख मजदूरों को श्रम बोर्ड से जोड़कर इस योजना से मिलने वाले लाभों से लाभान्वित किया जाए.
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