Farmer Protest: आवेश में आकर नहीं उठाएं ऐसा कदम, नुकसान ही होगा! आखि‍र राकेश टिकैत ने किसानों से क्यूं कही ऐसी बात?

राकेश टिकैत (फोटो साभार-ANI)

राकेश टिकैत (फोटो साभार-ANI)

Farmer Protest: राकेश टिकैत के फसल कुर्बान करने के आह्वान पर बिजनौर में एक किसान ने अपनी पूरी की पूरी फसल जला दी थी. इस पर राकेश टिकैत ने कहा है कि यह तरीका ठीक नहीं है. ऐसा करना ठीक नहीं है. इससे नुकसान होता है. हमने अभी केवल यह आव्हान किया है कि किसान आंदोलन के लिए अपनी एक फसल कुर्बान करने को तैयार रहें. इसका मतलब यह नहीं है कि फसल में आग लगा दें, नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 20, 2021, 10:49 PM IST
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नई दिल्ली. तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस लेने की मांग पर अड़े संयुक्त किसान मोर्चा का किसान आंदोलन गाजीपुर बॉर्डर पर लगातार चल रहा है. यूपी गेट गाजीपुर बॉर्डर पर 28 नवंबर से लगातार चल रहे किसान आंदोलन की अगुवाई भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) कर रहे हैं.




टिकैत के फसल कुर्बान करने के आह्वान पर बिजनौर में एक किसान ने अपनी पूरी की पूरी फसल जला दी थी. इस पर राकेश टिकैत ने कहा है कि यह तरीका ठीक नहीं है.



टिकैत ने कहा कि ऐसा करना ठीक नहीं है. इससे नुकसान होता है. हमने अभी केवल यह आव्हान किया है कि किसान आंदोलन के लिए अपनी एक फसल कुर्बान करने को तैयार रहें. इसका मतलब यह नहीं है कि फसल में आग लगा दें, नहीं.




आंदोलन के लिए जरूरत पड़ी तो किसान फसल का मोह छोड़ने को तैयार रहें. हालांकि अभी आंदोलन उस स्थिति में नहीं है. यह आव्हान बहुत ही विपरीत स्थिति के लिए किया गया था. उन्होंने किसानों से अपील की है कि आवेश में आकर अभी ऐसा कोई कदम न उठाएं.








आंदोलनकारी किसानों ने मंच से हुंकार भरी कि जब तक भारत सरकार नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती, किसान दिल्ली की सीमाओं से अपने घर जाने वाला नहीं है.








राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को लगता है कि किसान गर्मी से डरकर भाग जाएगा, ऐसा नहीं है. जो किसान सर्दी से नहीं डरा, वह गर्मी से भी नहीं डरने वाला. उन्होंने शनिवार को एक बार फिर दोहराया जब तक बिल वापसी नहीं, तब तक घर वापसी नहीं.




उन्होंने कहा कि खेतों में भी काम प्रभावित ना हो, इसके लिए हमने रणनीति तैयार कर ली है. किसान नंबर-बारी से आंदोलन स्थल पर आते रहेंगे और फिर जाते रहेंगे. इसके अलावा यह भी तय किया गया है कि जो किसान आंदोलन में रहेगा, गांव वाले उसके खेत का, उसके काम का पूरा ध्यान रखेंगे.









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