AAP विधायक प्रकाश जरवाल की जमानत खारिज, ससुर के अंतिम संस्कार में नहीं हो सकेंगे शामिल
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AAP विधायक प्रकाश जरवाल की जमानत खारिज, ससुर के अंतिम संस्कार में नहीं हो सकेंगे शामिल
AAP विधायक प्रकाश जारवाल की जमानत याचिका खारिज.

आम आदमी पार्टी के विधायक के ऊपर डॉक्टर आत्महत्या मामले में हुई सुनवाई. AAP के विधायक प्रकाश जरवाल के ऊपर पानी के टैंकर मालिकों से 60 लाख रुपए का रिश्वत लेने का आरोप लगा है.

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नई दिल्ली. देवली विधानसभा से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक प्रकाश जारवाल (Prakash Jarwal) की जमानत याचिका राउज एवेन्यू कोर्ट ने खारिज कर दी है. विधायक ने अपने ससुर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जमानत याचिका दाखिल की थी. प्रकाश जरवाल के ससुर की कोरोना वायरस से संक्रमण की वजह से मौत हो गई थी. लेकिन कोर्ट ने आप विधायक की जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. पानी के टैंकर मालिकों से रिश्वत लेने के मामले में आरोपों के घेरे में आए विधायक प्रकाश जरवाल अभी तिहाड़ जेल में  हैं.

AAP के विधायक प्रकाश जरवाल के ऊपर पानी के टैंकर मालिकों से 60 लाख रुपए का रिश्वत लेने का आरोप लगा है. विधायक को लेकर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की क्राइम ब्रांच ने अपने जांच में दावा किया था कि उन्होंने टैंकर मालिकों से एक महीने में लगभग 60 लाख रुपए की रिश्वत ली है. क्राइम ब्रांच ने कहा था कि दिल्ली के 20 टैंकर मालिकों से जरवाल ने पैसे मांगे थे. इनमें से 4 ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना बयान भी दर्ज कराया है. इन टैंकर मालिकों ने कहा कि उन्होंने अपनी फाइल पास कराने के लिए 20000 रुपए दिए. साथ ही हर बार की सप्लाई के लिए 500 रुपए भी अदा किए.


आपको बता दें कि दिल्ली में ऐसे 60 टैंकरों से विभिन्न इलाकों में पानी की सप्लाई की जाती है. यानी विधायक प्रकाश जरवाल के पास रिश्वत के तौर पर हर महीने करीब 60 लाख रुपए पहुंचते थे. टैंकर मालिकों ने यह शिकायत भी की है कि अगर रिश्वत देने में देरी होती थी तो उनके टैंकरों को सप्लाई की लिस्ट से बाहर कर दिया जाता था. यही नहीं, जल बोर्ड के कार्यालय से ऐसे टैंकर मालिकों को पानी भी नहीं भरने दिया जाता था. इन्हीं में से एक टैंकर मालिक ने बीते दिनों आत्महत्या कर ली थी. दिवंगत टैंकर मालिक के बेटे ने जरवाल के खिलाफ अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसके पिता ने सुसाइड से दो दिन पहले 60000 रुपए दिए थे. इसके बाद उन्हें भरोसा दिया गया था कि उनके टैंकर को डी-लिस्ट नहीं किया जाएगा. आरोप है कि फिर भी विधायक ने उनके टैंकर का नाम लिस्ट से हटा दिया.



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