Doctor's Day 2020: दिल्‍ली में COVID-19 का इलाज शुरू करने वाले डॉक्‍टर सहित 8 को एक फाइल ने बनाया मरीज, जानें पूरी कहानी

एक छोटी सी चूक आपको कोरोना संक्रमण के चपेट में ला सकती है. (फाइल फोटो)
एक छोटी सी चूक आपको कोरोना संक्रमण के चपेट में ला सकती है. (फाइल फोटो)

सरकारी पॉलिसी में बदलाव के बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल (Dr Ram Manohar Lohia Hospital) के डीन डॉ. राजीव सूद (Dr. Rajeev Sood) के दफ्तर में COVID-19 वार्ड से आयी एक महिला हेल्‍थ वर्कर को तैनात कर दिया गया था.

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नई दिल्‍ली. तमाम सावधानियों के बावजूद एक छोटी सी चूक आपको कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित कर सकती है. कुछ ऐसा ही हुआ डॉ. राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल (Dr Ram Manohar Lohia Hospital) के डीन डॉ. राजीव सूद (Dr. Rajeev Sood) के साथ हुआ. कोरोना संक्रमित स्‍टाफ के हाथों आई एक फाइल ने न केवल डॉ. राजीव सूद को, बल्कि उनके परिवार और स्‍टाफ को भी कोरोना का मरीज बना दिया. कोरोना संक्रमित होने वालों में डॉ. सूद की पत्‍नी, बेटी, दामाद, बेटा, नौकर, पीए और एक असिस्‍टेंट भी शामिल था. फिलहाल, डॉ. सूद अपने परिवार के साथ स्‍वस्‍थ्‍य होकर घर वापस आए गए हैं. न्‍यूज़ 18 हिंदी ने डॉ. सूद से पहले दिन से कोरोना की तैयारियों को लेकर अब तक आए बदलाव पर बात की.

डॉ. राजीव सूद बताते हैं कि शुरुआती दौर में भारत में कोरोना को लेकर शोर नहीं था, बस लोगों को यह पता था कि कोरोना नाम का कोई वायरस है. इसी बीच, विदेशों में फंसे भारतीयों का दिल्‍ली आने का सिलसिला शुरू हुआ. ज‍िन मुसाफिरों में कोरोना के लक्षण थे, उनके लिए एक आसोलेशन वार्ड आरएलएल हॉस्पिटल में बनाया गया था. शुरुआत में एक ऐसे ही मुसाफिर को आरएमएल हॉस्पिटल लाया गया, जिसे बुखार, खांसी और जुखाम था. उस समय हम लोगों ने इसे इतना गंभीरता से नहीं लिया. क्‍योंकि, भारत में कोरोना वायरस को लेकर बहुत अधिक जानकारी नहीं थी. इसके बाद, केरल सहित कुछ राज्‍यों से कोरोना संक्रमित मरीजों के सामने आने की खबरे आईं. उस हमने सोचा था कि हर साल दिल्‍ली में डेंगू, चिकनगुनिया, एन1एच1 जैसे वायरस आते हैं, हम इस वायरस से भी निपट लेंगे.





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आइसोलेशन की पॉलिसी में बदलाव पड़ा मंहगा
डॉ. राजीव सूद बताते हैं कि आरएमएल हॉस्पिटल को देश का पहला आइसोलेशन सेंटर बनाया गया था. कोरोना पॉजिटिव के दो-तीन केस आने के बाद हमें एहसास हुआ कि यह वायरस बहुत खतरनाक है. हमने पाया कि मरीज के संपर्क में आने वाले मरीजों के में यह वायरस तेजी से फैल रहा है. जिसके बाद, सरकार की तरफ से आई गाइडलाइन के अनुसार, हमने अपनी तैयारियों को पूरा कर मरीजों का इलाज शुरू किया. इसी बीच, सरकार की पॉलिसी आई कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज में लगे ऐसे हेल्‍थ वर्कर, जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं हैं, उन्‍हें न ही आइसोलेशन में भेजा जाएगा और न ही उनके टेस्‍ट होंगे. सरकार का यह मानना था कि चूंकि हमने अपने हेल्‍थ वर्कर्स को सभी सुरक्षा के सभी उपकरण उपलब्‍ध कराए हुए हैं, लिहाजा, उनको आइसोलेशन में भेजने और कोरोना टेस्‍ट कराने की जरूरत नहीं है.

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कोरोना वायरस की चपेट में आए डॉ. राजीव सूद
सरकार की इस नई पॉलिसी के बाद, कोविड वार्ड में काम करने वाली एक महिला हेल्‍थ वर्कर की तैनाती डॉ. राजीव सूद के दफ्तर में कर दी गई. इस महिला में कोरोना पॉजिटिव होने के लक्षण भी नहीं थे. इस महिला वर्कर का काम डॉ. सूद के दफ्तर तक फाइल पहुंचाना और वहां से फाइल लाना था. कुछ दिनों बाद, डॉ. सूद में कोरोना पॉजिटिव होने के लक्षण दिखना शुरू हो गए. इसके बाद, जब जांच हुई तो इस महिला हेल्‍थ वर्कर को कोविड पॉजिटिव पाया गया. इस महिला के साथ, डॉ. सूद का पूरा परिवार, पीए, ऑफिस अटेंडेंट सहित अन्‍य कर्मचारी भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए. चूंकि, 61 वर्ष के डॉ. सूद डाइबिटीज और ब्‍लडप्रेशर के मरीज थे. उनके हार्ट का एक ऑपरेशन भी हो चुका था, लिहाजा स्थिति गंभीर थी. डॉ. सूद को तत्‍काल हॉस्पिटल में एड‍मिट गया. लंबे उपचार के बाद अब डॉ. सूद स्‍वस्‍थ्‍य होकर अपने घर आ गए हैं.
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