Doctor's Day 2020: तमाम सावधानियों के बावजूद आप हो सकते हैं CORONA का शिकार, यह है बड़ी वजह

सोशल मीडिया में दवाओं को लेकर भी कई तरह की अफवाह फैलाई जा रही हैं. (फाइल फोटो)
सोशल मीडिया में दवाओं को लेकर भी कई तरह की अफवाह फैलाई जा रही हैं. (फाइल फोटो)

दफ्तरों की कॉमन क्राकरी, इक्विपमेंट और कम्प्यूटर सिस्‍टम भी कोरोना संक्रमण (Corona Infection) बढ़ाने में मददगार बन रहे हैं.

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नई दिल्ली. अनलॉक-1 के बाद राजधानी दिल्ली में जितनी तेजी से व्यावसायिक गति‍विधियां बढ़ीं, उससे कहीं तेजी से कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के मामलों में इजाफा भी हुआ. ऐसा नहीं है कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लोगों ने जरूरी एहतियात नहीं बरते, बल्कि सभी जरूरी एहतियात बरतने के बावजूद वे कोरोना वायरस (Coronavirus) की चपेट में आ गए. अब ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसी कौन सी वजहें रहीं, जिनके चलते लोग कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) हुए. डॉक्‍टर्स-डे 2020 (Doctor's Day 2020) पर इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए न्‍यूज 18 हिंदी ने मेडॉर हॉस्पिटल के वरिष्‍ठ चिकित्‍सक डॉ. मनोज शर्मा (Dr. Manoj Sharma) से बात की.

डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए मॉस्‍क, ग्‍लब्‍स और सैनेटाइजर का इस्‍तेमाल प्राथमिक कदम है. कोरोना वायरस की चपेट में आने से बचने के लिए हमें कई अन्‍य सावधानियों को भी बरतने की जरूरत है. उन्‍होंने उदाहरण देते हुए बताया कि ज्‍यादातर लोग अपने दफ्तरों में खाना खाने या चाय पीने के लिए दफ्तर की कॉमन क्रॉकरी का इस्‍तेमाल करते हैं. लोगों की यह आदत उन्‍हें कोरोना संक्रमित बना सकती है. इसके अलावा, ऑफिस में कई बार होता है कि एक सिस्‍टम का इस्‍तेमाल कई लोग कर रहे होते हैं, यह प्रक्रिया भी कोरोना संक्रमण बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है.

डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि कई बार दफ्तर में चाय पीने के लिए हम ग्रुप में खड़े हो जाते हैं और चाय पीने के लिए अपना मास्‍क मुंह से हटा देते हैं. इस दौरान भी कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है. इसी तरह, लगभग सभी दफ्तरों में कॉमन टॉयलट होते हैं. टॉयलट का गेट खोलने के लिए सभी लोग उसका हैंडल छूते हैं. इस तरह से भी कोरोना का संक्रमण बढ़ सकता है. लिहाजा, हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम टॉयलट में प्रवेश करने के बाद अच्‍छे से हाथ धोएं. टॉयलट से बाहर आने के बाद हाथ को सैनेटाइज करें. कोरोना संक्रमण से बचने के लिए हम दफ्तर में भी अपनी निजी क्रॉकरी का इस्‍तेमाल करें. साथ ही, हर हाल में सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन करें. इसी तरीके से हम कोरोना के संक्रमण से बच सकते हैं.



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ये हैं कोरोना संक्रमण के नए लक्षण
बीते समय में, इस बात की बहुत चर्चा रही कि अब कोरोना पॉज‍िटिव पाए जाने वाले वाले मरीजों में किसी तरह के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कोरोना पॉजिटिव होने वाला मरीज यह कैसे पहचान करे कि वह कोरोना पॉज‍िटिव है या नहीं. इस सवाल पर डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव मरीज में कोई न कोई लक्षण जरूर होता है. शुरुआती दौर में सूखी खांसी, तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ को कोरोना संक्रमण का लक्षण बताया गया था. दरअसल, उस समय जानकारी कम होने की वजह से हम लक्षणों को लेकर सीमित थे. लेकिन, जैसे-जैसे मरीजों के इलाज के दौरान केस सामने आए, नए लक्षणों की जानकारी सामने आई. इनमें स्‍वाद न आना, सूंघने की क्षमता खत्‍म होना और कमजोरी महसूस होना को भी कोरोना का लक्षण माना जाता है.

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दवाओं को लेकर सोशल मीडिया में अफवाह
सोशल मीडिया पर लगातार दवाओं को लेकर सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं. कुछ लोग कह रहे हैं कि कोरोना मरीज को पैरासिटामोल जैसी एंटी एनाल्जेसिक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए. इससे इम्‍युनिटी कम होती है. कुछ लोग एंटीबायोटिक दवाओं से परहेज की बात कहते हैं. इस पर डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि सबसे पहली बात किसी भी मरीज को डॉक्‍टर की सलाह के बिना किसी भी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए. यदि आप हॉस्पिटल नहीं जा सकते हैं तो आप टेलीफोन पर अपने डॉक्‍टर से सलाह ले लें. मौजूदा समय में ज्‍यादातर डॉक्‍टर फोन पर मरीजों को सलाह दे रहे हैं. वहीं, जहां तक इन दवाओं की बात है तो पैरासिटामोल हर तरह के बुखार में खाई जा सकती है. इस दवा से किसी तरह की बॉडी इम्‍युनिटी कम नहीं होती है. वहीं, किसी तरह के भी वायरल बुखार में एंटीबायोटिक दवाओं की किसी तरह की कोई भूमिका नहीं होती है.
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