Doctor's Day 2020 : 400 मरीजों को CORONA से‍ निजात दिलाने वाले ITBP के डॉक्‍टर ने बताई COVID-19 की ‘अचूक दवा’
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Doctor's Day 2020 : 400 मरीजों को CORONA से‍ निजात दिलाने वाले ITBP के डॉक्‍टर ने बताई COVID-19 की ‘अचूक दवा’
COVID-19 के खिलाफ जारी जंग में गृह मंत्रालय ने आईटीबीपी को नोडल एजेंसी के तौर पर तैनात किया है. (फाइल फोटो)  

सीएपीएफ रेफरल हॉस्पिटल (CAPF Referral Hospital) के सीएमओ डॉ. बलराज बेगरा (CMO Dr Balraj Begra) अब तक 400 से अधिक कोरोना संक्रमित (Corona Infected) अर्धसैनिक बलों के जवानों का इलाज कर चुके हैं.

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नई दिल्‍ली. 400 से अधिक कोरोना पॉजिटिव पीड़ित जवानों का संक्रमण से निजात दिलाने वाले डॉ. बलराज बेगरा ने इस महामारी से निजात दिलाने वाली ‘अचूक दवा’ बताई है. सेंट्रल आर्म्‍ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) रेफरल हॉस्पिटल में बतौर चीफ मेडिकल ऑफ‍िसर तैनात डॉ. बलराज बेगरा (CMO Dr Balraj Begra) ने इस अचूक दवा का नाम ‘आत्‍मविश्‍वास’ बताया है. डॉ. बलराज बेगरा ने बताया कि कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज के दौरान, उनका अनुभव रहा है कि जिस मरीज का आत्‍मविश्‍वास जितना मजबूत रहा है, वह उतनी जल्‍दी संक्रमण से निजात पाकर घर चला गया है. उन्‍होंने बताया कि मौजूदा दौर में लोगों के लिए कोरोना वायरस (Coronavirus) से ज्‍यादा खतरनाक उसका डर रहा है.

डॉ. बलराज बेगरा उन चुनिंदा डॉक्‍टर्स में भी हैं, जिन्‍हें देश में सबसे पहले कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज की जिम्‍मेदारी सौंपी गई थी. अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्‍होंने बताया कि भारत सरकार ने सबसे पहले विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने का फैसला किया था. चूंकि, इन देशों में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा था, लिहाजा यह फैसला लिया गया कि इन देशों से आने वाले भारतीयों को पहले 14 दिनों के लिए क्‍वारंटाइन किया जाएगा. इसी फैसले के तहत, गृह मंत्रालय ने आईटीबीपी को नोडल एजेंसी के तौर पर नियुक्‍त कर विदेश से आने वाले भारतीयों को क्‍वारंटाइन करने की जिम्‍मेदारी सौंपी थी. इसी जिम्‍मेदारी के तहत, आईटीबीपी ने छावला कैंप में 600 बेड का क्‍वारंटाइन सेंटर तैयार किया गया और विदेश से आने वाले मुसाफिरों को यहां क्‍वारंटाइन किया गया.





COVID-19 इलाज के लिए रेफरल हॉस्पिटल बना कोरोना सेंटर
डॉ. बलराज बेगरा ने बताया कि कोरोना वारियर्स के तौर पर अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई थी. ड्यूटी के दौरान कई जवान कोरोना पॉजिटिव हो गए, जिसके बाद, सीएपीएफ रेफरल हॉस्पिटल को कोरोना हॉस्पिटल के तौर पर तब्‍दील किया गया है. अपने अनुभव साझा करते हुए उन्‍होंने बताया कि सीएपीएफ रेफरल हॉस्पिटल में सभी तरह के कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती किया जा रहा है. अब तक, इस हॉस्पिटल से करीब 400 कोरोना पीडि़त मरीजों का इलाज कर उन्‍हें घर भेजा जा चुका है. वहीं डॉक्‍टर्स की मेहनत का नतीजा है कि अभी तक इस हॉस्पिटल में एक भी मरीज की कोरोना के चलते जान नहीं गई है. मौजूदा समय में, इस हॉस्पिटल में भर्ती सभी मरीजों की हालत स्थिर बनी हुई है. यह मरीज भी जल्‍द ही पूरी तरह से स्‍वस्‍थ्‍य होकर अपने घर चले जाएंगे.

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कोरोना पीडि़त मरीजों के मन में है यह सबसे बड़ा डर
उन्‍होंने बताया कि हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले मरीजों के मन में कई तरह का डर था. उदाहरण देते हुए उन्‍होंने बताया कि वार्ड में एक मरीज माइल्‍ड सिंटम वाला है और दूसरा मरीज मॉडरेट है. माइल्‍ड सिंटम वाले को हमेशा डर लगा रहता था कि कहीं ज्‍यादा बीमार वाले मरीज के चलते मैं कहीं ज्‍यादा बीमार हो जाऊं. हमें उन्‍हें समझाने में वक्‍त लगता था कि ऐसा नहीं है. हर आदमी की अपनी इम्‍युनिटी है और उसकी बीमारी से आपको ज्‍यादा फर्क नहीं पड़ेगा. वहीं, दूसरी बड़ी समस्‍या यह होती थी कि मरीज को अचानक उसके परिवार से अलग कर दिया जाता है. इलाज के दौरान, मरीज को एक सीमित क्षेत्र में रहना है और उसकी गतिविधियां बहुत सीमित थीं.

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इलाज के साथ मरीज की मानसिक मजबूती पर भी होता है ध्‍यान
ऐसे में, मरीज के मन में मानसिक तौर पर दबाव काफी बढ़ जाता है. ऐसे में, मरीजों को समझाना बहुत मुश्किल होता था कि कि यह सब उनके हित में और इलाज के लिए किया जा रहा है. इस तरह से, हॉस्पिटल में तैनात डॉक्‍टर्स की जितनी ऊर्जा मरीजों के इलाज में खर्च होती है, उससे कहीं अधिक ऊर्जा का इस्‍तेमाल मरीजों के मानसिक मनोबल को मजबूत करने में खर्च की जाती है. वहीं, कुछ दिन रहने के बाद मरीजों को यह भी समझ में आता था कि जब यहां तैनात मैरामेडिकल स्‍टाफ और डॉक्‍टर्स हमारी देखभाल के लिए दिन-रात लगे हुए हैं. उन्‍हें कोरोना संक्रमित होने का डर नहीं है, हम भी अपनों की बेहतरी के लिए उनसे कुछ द‍िन अलग रह सकते हैं. इस साइकोलॉजिकल प्रैक्टिस ने हमें इलाज के दौरान सकारात्‍मक परिणाम दिए हैं.

 
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