स्‍मृति शेष: 'फोटोग्राफिक मेमोरी' के धनी डीपी त्रिपाठी आपातकाल के दौरान थे JNUSU के अध्‍यक्ष, जेटली संग की थी जेल यात्रा

डीपी त्रिपाठी आपातकाल के दौरान अरुण जेटली के साथ गए थे जेल (File Photo)
डीपी त्रिपाठी आपातकाल के दौरान अरुण जेटली के साथ गए थे जेल (File Photo)

हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और संस्कृत साहित्य के विद्वान रहे देवी प्रसाद त्रिपाठी (DP Tripathi) इलाहाबाद विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्राध्यपक रहे, जेएनयू (JNU) छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 2, 2020, 5:58 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्व सांसद और राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक देवी प्रसाद त्रिपाठी (DP Tripathi) को बहुत से लोग अपने-अपने तरीके से याद करते हैं. एक छात्र नेता के तौर पर. एक अध्यापक के तौर पर और बहुत से लोग उन्हें राजनेता के रूप में ही जानते हैं. लेकिन DPT के लोकप्रिय नाम से मशहूर डॉक्टर त्रिपाठी को साहित्यकार रवींद्र कालिया ने बहुत ही अलग तरीके से याद किया है. अपनी आत्मकथा– ग़ालिब छुटि शराब में – कालिया जी लिखते हैं– “हम लोग डीपीटी की क्षमता से परिचित थे, वह अनंत काल तक लोक गीत सुना सकते हैं. इसका भरपूर परिचय उन्होंने कुछ दिन पहले ही दिया था, जब भीष्‍म साहनी सपत्‍नीक हमारे यहाँ रुके हुए थे. शाम को अनायास ही डीपीटी प्रकट हो गए थे, भए प्रगट कृपाला. भीष्‍म जी से परिचय होते ही उसने 'चीफ की दावत' के अंशों का पाठ शुरू कर दिया. भीष्‍म जी और उनकी पत्‍नी शीला जी चमत्‍कृत रह गईं कि यह कैसा शख्‍स है, जो कविता की तरह कहानी याद रख सकता है.

'पैदल जा रहे टीचर के पीछे छात्र भी पैदल चल पड़ते थे'
इसी में आगे वे लिखते हैं– “मुझे मालूम था, डीपीटी की स्‍मरण शक्‍ति ही नहीं घ्राण शक्‍ति भी विलक्षण है. उसने कमरे में घुसते ही सूँघ लिया था कि माहौल सुवासित है. उसने अपना कश्‍कोल (भिक्षापात्र) आगे बढ़ा दिया मय और माशूक के दरबार में कश्‍कोल ही बढ़ाया जा सकता है, यह इस कोठे का दस्‍तूर था. कोठे का ही नहीं, इलाहाबाद की संस्‍कृति का भी. यहाँ ताज भी कश्‍कोल में हासिल किया जाता है, जैसे विश्‍वनाथ प्रताप सिंह ने किया था, यह नारा बुलंद करके : 'राजा नहीं फकीर है, देश की तकदीर है.' उन दिनों फकीरी फैशन में आ चुकी थी, वरना डीपीटी जैसा इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय के राजनीतिशास्‍त्र विभाग का प्राध्‍यापक फकीरों के अंदाज में चप्‍पल चटकाते हुए पैदल विश्‍वविद्यालय क्‍यों जाता? गुरु जी को पैदल चलते हुए देख छात्र साइकिल से उतरकर गुरु जी के पीछे हो लेते.“

राजीव गांधी के सलाहकार रहे
दरअसल, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और उर्दू के बेहतरीन जानकार और फक्कड़ स्वभाव वाले डॉक्टर देवी प्रसाद त्रिपाठी थे ही ऐसे. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले डॉक्टर त्रिपाठी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के अध्यापन का काम किया. राजनीति की समझ और शानदार भाषण शैली की क्षमता को पहचानते हुए उन्हें राजीव गांधी का सलाहकार नियुक्त किया गया. राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वे लंबे समय तक इस पद पर रहे. डॉक्टर त्रिपाठी को कुछ समय पहले गले का कैंसर हो गया था.



जेटली के साथ तिहाड़ में रहे
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर पोलिटकल स्टडीज से पढ़ाई करने वाले डीपीटी छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे हैं. आपातकाल के दौर में वे विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रहे. उस दौर के छात्र याद करते हैं कि अब तक जेएनयू में एक दो ही इतने अधिक लोकप्रिय छात्र-नेता हुए हैं. आपातकाल में उन्हें भी तिहाड़ में रखा गया था और बीजेपी के दिवंगत नेता अरुण जेटली के साथ ही वे गिरफ्तार किए गए थे और रिहा भी दोनों साथ ही हुए थे.

सुनने के लिए लोग पहुंचते थे

शरद पवार ने जब कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का गठन किया तो डॉक्टर त्रिपाठी को पार्टी का प्रवक्ता नियुक्त किया और बाद में एनसीपी से ही वे राज्यसभा के सदस्य भी बने. सांसद के तौर पर उनके सारगर्भित भाषणों के लिए भी उन्हें याद किया जाएगा. वामपंथी दलों, कांग्रेस या फिर एनसीपी की राजनीति करने के बाद भी उनके संबंध सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से रहे. बेहद सक्रिय रहने वाले डीपीटी न सिर्फ बड़ी राजनीतिक बहसों के बीच मौजूद पाए जाते रहे, बल्कि दिल्ली में होने वाली तामम छोटी-बड़ी गोष्ठियों सभाओं में उन्हें सक्रियता से सुना देखा जाता रहा. उन्हें जानने वाले कई बार सिर्फ उनको सुनने के लिए गोष्ठियों में जाते रहे हैं.

‘थिंक इंडिया’ नाम की पत्रिका का किया प्रकाशन
 उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में 1952 में जन्मे श्री त्रिपाठी को ठेठ अवधी बोलते भी सुना जा सकता था. वैसे वे थिंक इंडिया नाम की एक पत्रिका का प्रकाशन भी करते रहे, जो वैचारिक स्तर पर अच्छी पत्रिकाओं में शामिल है. डॉक्टर त्रिपाठी ने 67 साल की उम्र में 2020 के दूसरे दिन करीब नौ बजे दिन में आखिरी सांस ली. परिवार में उनकी पत्नी के अलावा तीन बेटे हैं.

जन्मदिन पर जनवरी में आयोजन करने वाले थे मित्र 

डॉक्टर त्रिपाठी के कुछ मित्र उनके जन्मदिन को लेकर जनवरी में आयोजन करने वाले थे. नेपाल कांग्रेस महासचिव प्रदीप गिरि और कांग्रेस नेता मोहन प्रकाश भी डॉक्टर त्रिपाठी के पुराने मित्र हैं. इन लोगों ने तय किया था कि 6 जनवरी को डॉक्टर त्रिपाठी के जन्मदिन को लेकर आयोजन करना तय किया था. इन मित्रों के लिए दुखद है कि डॉक्टर त्रिपाठी आयोजन से चार दिन पहले ही चले गए. उन्हें याद करते हुए कांग्रेस नेता मोहन प्रकाश कहते हैं - "वे एक ऐसे नेता थे जो अपने आलोचकों-विरोधियों की मदद के लिए भी तैयार रहते थे." समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहे मोहन प्रकाश के मुताबिक डीपीटी के जाने से दिल्ली की राजनीति का एक कोना खाली हो गया है.

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