डीयू कॉलेज शिक्षकों को नहीं मिल रही सैलरी, LG से लगाई गुहार, कहा-दिल्ली के सर्वेसर्वा हैं!

वित्तीय परेशानियों का समाधान कराने काे अब शिक्षक संगठन एलजी से हस्तक्षेप करने की गुहार लगा रहे हैं. (File Photo)

वित्तीय परेशानियों का समाधान कराने काे अब शिक्षक संगठन एलजी से हस्तक्षेप करने की गुहार लगा रहे हैं. (File Photo)

दिल्ली सरकार और 12 पूर्ण वित्त पोषित कॉलेजों के बीच सैलरी का मामले को लेकर बना गतिरोध अभी बरकरार है. शिक्षक संगठनों का मानना है कि संसद से पारित कानून के बाद अब दिल्ली के सर्वेसर्वा के रूप में उप-राज्यपाल अनिल बैजल (LG Anil Baijal) अपनी पावर का प्रयोग कर कॉलेज शिक्षकों के वित्तीय संकट को दूर कर सकते हैं. शिक्षक संगठन ने उप-राज्यपाल से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 10, 2021, 9:58 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) से संबद्ध दिल्ली सरकार (Delhi Government) के 12 पूर्ण वित्त पोषित कॉलेजों के शिक्षकों व स्टॉफ की सैलरी का मुद्दा अभी अधर में लटका हुआ है. इसको लेकर दिल्ली सरकार और कॉलेज शिक्षकों के बीच अभी ठनी हुई है.

दिल्ली सरकार जहां कॉलेजों को लेकर अडिग है, वहीं शिक्षक भी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं. लेकिन इस दौरान शिक्षकों को सैलरी नहीं मिलने से उनको को हो रही वित्तीय परेशानियों का समाधान कराने के लिए अब शिक्षक संगठन दिल्ली के उप-राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की गुहार लगा रहे हैं.

संसद से पारित कानून के बाद अब दिल्ली के सर्वेसर्वा के रूप में उप-राज्यपाल अनिल बैजल (LG Anil Baijal) अपनी पावर का प्रयोग कर कॉलेज शिक्षकों के वित्तीय संकट को दूर कर सकते हैं. शिक्षक संगठनों ने उप-राज्यपाल से इस मामले में तुरंत  हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है.

नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (NDTF) की ओर से 'राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सरकार अध्यादेश-मंत्रिमंडल या उप राज्यपाल की शक्तियां और इनका दिल्ली सरकार के वित्त पोषित कॉलेजों पर प्रभाव' विषय पर  वेबीनार आयोजित किया गया.
एनडीटीएफ अध्यक्ष डॉ ए के भागी ने कहा कि दिल्ली सरकार (Delhi Government) पैटर्न ऑफ असिस्टेंट, वेतन और ग्रांट रोकने तथा जबरदस्ती सीनियर अकाउंट अधिकारी की नियुक्ति जैसी परेशानियां पैदा कर 12 पूर्ण वित्त पोषित कॉलेजों का निजीकरण करने पर आमदा है.

दिल्ली सरकार के निजीकरण से उच्च शिक्षा न केवल कमजोर वर्ग की पहुंच से बाहर होगी बल्कि उसमें राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ेगा. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अध्यादेश के पारित होने और उसमें उप-राज्यपाल (Lieutenant Governor) को सर्वेसर्वा होने से इन कॉलेजों के बचने की एक उम्मीद जगी है. एनडीटीएफ इन कॉलेजों को दिल्ली सरकार के निजीकरण अभियान से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा.

एडवोकेट और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की नवनिर्वाचित कार्यकारी परिषद सदस्य मोनिका अरोडा ने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों के काम का समय पर वेतन न देना मानव अधिकारों का उल्लंघन है.



वैश्विक महामारी में दिल्ली सरकार के अंतर्गत काम कर रहे डॉक्टर, सफाई कर्मचारी, पैरामेडिकल स्टाफ,  इंजीनियर तथा शिक्षकों व कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने के कारण अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा. कोर्ट के आदेशों के बाद भी स्थिति अत्यंत सोचनीय है. कॉलेजों में पर्याप्त ग्रांट न मिलने के कारण अनेक समस्याएं पैदा हो रही हैं.

मोनिका अरोड़ा ने कहा कि नए अध्यादेश के तहत संविधान में उप-राज्यपाल दिल्ली के सर्वेसर्वा हैं. इस आदेश के अनुसार दिल्ली राजधानी सरकार का मतलब उप-राज्यपाल है. संसद इस संबंध में कानून बना सकती है. मंत्रिमंडल को कोई भी निर्णय लेने से पहले उप-राज्यपाल की अनुमति प्राप्त करनी होगी. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र होने के कारण परस्पर टकराव से बचने के लिए शक्ति का स्पष्टीकरण अनिवार्य था.

उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपनी समस्या के लिए समुचित प्रक्रिया का पालन करते हुए उप-राज्यपाल को ज्ञापन देना चाहिए और वेतन ,ग्रांट और अकादमिक स्वायतता की लड़ाई को कोर्ट से लेकर संसद तक लड़ा जाना चाहिए.

दिल्ली विश्वविद्यालय की वित्तीय समिति के सद्स्य एड्वोकेट राजेश गोगना ने बताया कि पावर का विभाजन होने बाद अब उप-राज्यपाल को सुनिश्चित करना चाहिए कि वेतन जैसा मानव अधिकार समय पर मिले.

एनडीटीएफ के पूर्व अध्यक्ष डॉ आई एम कपाही ने कहा कि दिल्ली सरकार और उप-राज्यपाल की शक्तियों का स्पष्ट विभाजन होने से उम्मीद है कि यह  मुद्दा समाधान की दिशा में आगे बढ़े.

पूर्व डूटा अध्यक्ष डॉ एन के कक्कड़ ने कहा कि उपराज्यपाल को अब शिक्षक और कर्मचारियों की वेतन के मुद्दे पर दिल्ली सरकार को स्पष्ट निर्देश जारी करना चाहिए.

दिल्ली विश्वविद्यालय कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ बीएस नेगी ने कहा कि वेतन और ग्रांट को अपर्याप्त और अनियमित करना तथा प्रशासनिक परेशानियां  पैदा करने के पीछे का कारण यही है कि दिल्ली सरकार की नीयत इन कॉलेजों को लेकर साफ नहीं है. वह जानबूझकर संवैधानिक संकट पैदा कर शिक्षकों कर्मचारियों के जीवन से खिलवाड़ कर रही है.

इस अवसर पर इन 12 कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों ने वेतन और ग्रांट रोक देने के बाद वैश्विक महामारी में उनके जीवन पर पड़े प्रभाव को लेकर अपने दर्द भरे अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि समय पर वेतन न मिलने से उन्हें किराए देने की दिक्कत से लेकर, बच्चों की स्कूल की फीस, तथा इलाज में आने वाली परेशानियों जैसी दिक्कतों को झेला है. इस कार्यक्रम में सैकड़ों शिक्षकों ने भाग लिया.
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