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दिल्ली हिंसा : मुस्लिम भाइयों ने कराई हिंदू बहन की शादी, कहा-हम हमेशा देंगे तुम्हारा साथ

दिल्ली हिंसा के दौरान हिंदू परिवार की बेटी की शादी की कहानी मिसाल कायम करने वाली है. तनाव से भरे माहौल के बीच मुस्लिम पड़ोसियों की मदद से एक हिंदू लड़की की शादी संपन्न कराई गई

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 28, 2020, 3:50 PM IST
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नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के कुछ इलाकों में कई दिनों तक लगातार हिंसा (Delhi Violence) की घटनाएं हुईं. इस दौरान मुस्लिम बहुल इलाके (Muslim Dominated) में रहने वाला एक हिंदू परिवार (Hindu Family) मायूस दिख रहा था. क्योंकि इस मुश्किल घड़ी में शादी समारोह का आयोजन कठिन था. ऐसे में मदद के लिए सामने आए उनके पड़ोसी, जो मुस्लिम थे. हिंदू परिवार की शादी में पड़ोस के मुस्लिम युवाओं ने दुल्हन का भाई बनकर रिश्ता निभाया और हिंसा की घटनाओं के बीच मानवता की मिसाल पेश की. दरअसल, यहां रहने वाली एक लड़की की शादी के एक दिन पहले ही इलाके में हिंसा की बड़ी घटना हुई. इसको देखते हुए हिंदू परिवार बेटी की शादी रोकने या तारीख आगे बढ़ाने पर विचार कर रहा था. लेकिन मुस्लिम पड़ोसियों की पहल पर शादी की तैयारियां शुरू हुईं और समारोह पूरा किया गया.

हाथों में मेहंदी लगाए रो रही थी दुल्हन
मीडिया से बातचीत में 23 वर्षीय सावित्री प्रसाद ने बताया कि वो अपने घर में रो रही थीं. हिंसा की शुरुआत के बाद इलाके में तनाव पसरा था और मंगलवार को उसकी शादी होने वाली थी. इस शुभ दिन के इंतजार में उसके हाथों में मेहंदी लगी थी. ऐसे में किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था कि आगे क्या किया जाए. इसी दौरान लड़की के पिता ने घोषणा की कि शादी अगले दिन होगी और उसमें मुस्लिम पड़ोसी मौजूद रहेंगे. यह सुन सभी हैरान रह गए.

घर पर हुई शादी और कुछ दूर लगता था...
शादी का आयोजन सावित्री के घर पर ही हुआ. उसका घर हिंसाग्रस्त चांद बाग इलाके की एक संकरी गली में है. जबकि कुछ ही दूरी पर गुजरने वाली मुख्य सड़क पर हिंसा का तांडव जारी था. इस दौरान कारों और दुकानों में काफी तोड़फोड़ की गई थी. सड़क पर दोनों तरफ से भीड़ के बीच की लड़ाई में इस्तेमाल किए जाने वाले पत्थर तबाही और भय का मंजर बता रहे थे. सावित्री ने रायटर से बातचीत में कहा कि मेरे मुस्लिम भाई आज मेरी रक्षा कर रहे हैं. इस समारोह के दिन घर पर आई एक महिला ने कहा कि उसके परिवार और पड़ोसियों ने दिलासा दिया.



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छत से दिख रहा था केवल धुआं
सावित्री के पिता का कहना था कि उन्हें छत पर से केवल आग का धुआं दिख रहा था. उन्होंने कहा कि वह कई सालों से बिना किसी परेशानी और शांति के साथ इस क्षेत्र में मुसलमानों के साथ रहते आए हैं. उन्होंने साफ तौर पर किसी भी दुश्मनी से इनकार किया. साथ ही कहा कि हिंसा में कौन लोग हैं इसकी जानकारी उन्हें नहीं है.

दुल्हन ने लिए 7 फेरे और फिर हुई विदाई
हिंसा के बीच तनाव भरे माहौल में यह शादी संपन्न कराई गई. लड़की के पिता के हौसले और पड़ोसियों की मदद से पूरा कार्यक्रम संपन्न हुआ. दूल्हा पहुंचा और शादी के 7 फेरे भी लिए गए. जिसके बाद दुल्हन की घर से विदाई भी हुई. हिंसा के माहौल के बीच इस तरह की कहानी समरसता से भरे समाज की कहानी कहती है.

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