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Lockdown: शेल्टर होम से घर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन की लाइन में भूखे पेट खड़ी है गर्भवती महिला
Delhi-Ncr News in Hindi

News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 12:56 PM IST
Lockdown: शेल्टर होम से घर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन की लाइन में भूखे पेट खड़ी है गर्भवती महिला
विनोद नगर में लगी मजदूरों की लाइन.

वेस्ट विनोद नगर के शेल्टर होम (Shelter Home) में भी मजदूरों की लाइन लगी हुई है. इस लाइन में ऐसे भी मजदूर (Migrant labour) हैं जिनका रजिस्ट्रेशन हो चुका है. मोबाइल पर मैसेज भी आ चुका है. बावजूद इसके उनकी स्क्रीनिंग और दूसरी प्रक्रिया अभी भी नहीं की जा रही है.

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नई दिल्ली. पूर्वी दिल्ली (Delhi) के ईस्ट विनोद नगर इलाके में एक सरकारी स्कूल (Government School) को शेल्टर होम बनाया गया है. यहां सैकड़ों की तादात में मजदूर लाइन में खड़े हैं. उन्हें घर जाने का इंतज़ार है. यह लाइन उन लोगों की है जो घर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना चाहते हैं. लाइन के बीच में ही एक भूखी-प्यासी गर्भवती महिला (Pregnant woman) भी खड़ी हुई है. महिला का कहना है कि अभी तक उसका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है. वहीं दूसरी ओर वेस्ट विनोद नगर में प्रवासी मजदूरों (Migrant labour) के लिए बने शेल्टर होम में भी मजदूरों की लाइन लगी हुई है.

इस लाइन में ऐसे भी मजदूर हैं जिनका रजिस्ट्रेशन हो चुका है. मोबाइल पर मैसेज भी आ चुका है. बावजूद इसके उनकी स्क्रीनिंग और दूसरी प्रक्रिया अभी भी नहीं की जा रही है. आरोप है कि न तो कोई रजिस्ट्रेशन के बारे में सही जानकारी दे रहा है और न ही कोई खाना देने वाला है. रजिस्ट्रेशन करा चुके और कराने वाले दोनों ही मजदूर लाइन में लगे हुए हैं.

4 दोस्त मिलकर घर पहुंचा रहे मजदूरों को



मजदूरों को घर पहुंचाने की ऐसी ही एक मुहिम चार दोस्तों ने मिलकर शुरू की है. जो एक एनजीओ 'उद्देश्य' के साथ मजदूरों को राशन देने के साथ उनके सफर में सारथी भी बने हुए हैं. ये उन्हें तब तक रास्ता दिखा रहे हैं जब तक कि वो सुरक्षित अपने गांव-घर न पहुंच जाएं. ये चारों दोस्त हैं- ललित कुमार, अनिमेष मुखर्जी, मधुरम और शारदा.



ऐसे करते हैं मजदूरों से संपर्क, फिर करते हैं गाइड

इस समूह में शामिल अनिमेष मुखर्जी बताते हैं कि यूपी की करीब छह ऐसी जगहें उन्होंने चुनी हैं जहां से प्रवासी मजदूरों का आना-जाना होता है. इन पॉइंट्स पर उद्देश्य एनजीओ के साथ मिलकर उनके साथी मजदूरों को खाने का पैकेट देते हैं. चूंकि ये प्रवासी मजदूर 20-30 या ज्यादा के समूहों में आगे बढ़ रहे होते हैं तो इनके ग्रुप में से तीन लोगों का फोन नंबर ले लेते हैं और इन्हें भी अपना नंबर दे देते हैं.

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First published: May 21, 2020, 12:37 PM IST
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