क्या दिल्ली पर किसी बड़े खतरे का संकेत हैं भूकंप के ये छोटे झटके?
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क्या दिल्ली पर किसी बड़े खतरे का संकेत हैं भूकंप के ये छोटे झटके?
झारखंड के जमशेदपुर में आज सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए.

दिल्‍ली वालों ने खुद पैदा किया है खतरा, यहां बिना भूकंप के भी गिर चुकी हैं कई बिल्‍डिंगें, बड़ा भूकंप आने पर हो सकती है भारी तबाही. नियमों को अनदेखी कर हुए हैं ज्यादातर निर्माण

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नई दिल्ली. पिछले दो माह में दिल्ली-एनसीआर (Earthquake in delhi ncr) की धरती 9 बार हिल चुकी है. लंबे समय बाद भूकंप का केंद्र दिल्ली, फरीदाबाद, और रोहतक बन रहे हैं. सवाल ये है कि क्या यह किसी बड़ी अनहोनी का संकेत है या फिर सामान्य बात ही है? भारत सरकार के रिकॉर्ड बताते हैं कि राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली और एनसीआर (Delhi-NCR) भूकंप को लेकर अधिक तीव्रता वाले जोन 4 में आते हैं. जहां रिक्‍टर पैमाने पर 8 तीव्रता वाले भूकंप की भी संभावना होती है.

इस मसले पर हमने नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद के चीफ साइंटिस वीके गहलौत से बातचीत की. वो नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के डायरेक्टर भी रह चुके हैं.

गहलौत कहते हैं कि पिछले करीब 300 साल में दिल्ली में किसी बड़े भूकंप का एपिसेंटर नहीं बना है. यहां रिक्टर स्केल (Richter scale) पर 5.5 तीव्रता से छोटे भूकंप ही आए हैं. इसलिए इससे बहुत ज्यादा खौफ खाने की जरूरत नहीं है. दिल्ली-हरिद्वार रिज में गतिविधि हो रही है. कभी ऐसी ही हलचल जयपुर और अजमेर में भी थी.



कुछ लोगों ने 1720 और उसके बाद कुछ बड़े भूकंप दिखाए हुए हैं लेकिन तब रिक्टर पैमाना नहीं था. उनका बस अनुमान लगाया गया है. जो सही नहीं है. कुछ का एपिसेंटर कहीं दूसरी जगह था, जिसे मथुरा और दिल्ली के आसपास बता दिया गया. फिर भी भविष्य में बड़े भूकंप से इनकार नहीं किया जा सकता.



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ये है भूकंप के लिहाज से दिल्ली का सबसे संवेदनशील क्षेत्र


इसलिए, घर बनवाते समय नेशनल बिल्डिंग कोड का पालन करना जरूरी है. क्योंकि राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली अधिक तीव्रता वाले जोन 4 में आता है. नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार घर बनवाएंगे तो सुरक्षित रहेंगे वरना तो आप जानते ही हैं. बता दें कि भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards) ने विभिन्‍न एजेंसियों से प्राप्त विभिन्न वैज्ञानिक जानकारियों के आधार पर देश को चार भूकंपीय क्षेत्रों (seismic zone) में बांटा है.

पिछले दो माह में भूकंप के झटके

-12 अप्रैल 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.5, केंद्र दिल्ली, गहराई 8 किलोमीटर.

-13 अप्रैल 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.7, केंद्र दिल्ली, गहराई 5 किलोमीटर.

-15 मई 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.2, केंद्र दिल्ली, गहराई 22 किलोमीटर.

-28 मई 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.5, केंद्र फरीदाबाद, गहराई 10 किमी.

-29 मई 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.9, केंद्र रोहतक, गहराई 10 किलोमीटर.

-29 मई 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.5, केंद्र रोहतक, गहराई 15 किलोमीटर.

-1 जून 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.0, केंद्र रोहतक, गहराई 10 किलोमीटर.

-1 जून 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 1.8,  केंद्र रोहतक, गहराई 5  किलोमीटर.

-3 जून 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.0, केंद्र फरीदाबाद, गहराई 4 किलोमीटर.

(National center for seismology के मुताबिक)

क्या कहती है दिल्ली के नीचे की धरती?

भूकंप के दुष्परिणामों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्‍ली क्षेत्र की जमीन के नीचे की मिट्टी की जांच करवाकर यह पता किया है कि इसके कौन से क्षेत्र सबसे ज्‍यादा संवेदनशील (Earthquake prone area) हैं. जमीन के भीतर की संरचना पर होने वाले अध्‍ययन को भू-वैज्ञानिक सिस्‍मिक माइक्रोजोनेशन (Seismic microzonation) कहते हैं. उससे जानकारी मिलती है कि भूकंप के लिहाज से कौन से क्षेत्र सुरक्षित और खतरनाक हैं. दिल्ली की रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि घनी आबादी वाले यमुनापार समेत तीन जोन सर्वाधिक खतरनाक हैं.

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दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके क्या बड़े खतरे का संकेत है


ये कौन क्षेत्र हैं?

बड़ा भूकंप आने पर दिल्ली में ज्यादा नुकसान की आशंका वाले क्षेत्रों में यमुना तट के करीबी इलाके, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर आदि आते हैं. यहां यमुना के फ्लड प्लेन में कई बड़े अवैध निर्माण हैं. फरीदाबाद और गुरुग्राम (गुड़गांव) भी ऐसे ही क्षेत्र में आते हैं.

सभी को आगाह किया लेकिन...

वैज्ञानिकों ने 2014 में ही डीडीए से जुड़े अधिकारियों, सभी आर्किटेक्ट, सिविल इंजीनियरों और प्लानिंग से जुड़े लोगों को आगाह किया था कि माइक्रोजोनेशन  के हिसाब से भूकंपरोधी मकान बनने चाहिए. लेकिन उसे लोग मानते नहीं. गलत तरीके से घर बनाने के लिए घूस दे देंगे लेकिन सही तरीके से घर नहीं बनवाएंगे. इसलिए अगर बड़ा भूकंप आया तो सबसे ज्यादा नुकसान इसी क्षेत्र में होगा.

अवैध निर्माण पर कोर्ट की चिंता

सूत्रों का कहना है कि 2015 में नेपाल भूकंप त्रासदी के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली में अवैध निर्माण पर चिंता जाहिर की थी. अदालत ने कहा था कि जिस तरह से राजधानी में अवैध कंस्ट्रक्शन और अवैध कॉलोनियां बनी हुई हैं, वैसी स्थिति में यहां अगर वैसा भूकंप आया तो आपदा तय है.

20 फीसदी मकान ही अप्रूव्ड! 

दिल्ली हाईकोर्ट ने नगर निगम से पूछा था कि अगर उसी तरह की आपदा आई तो क्या उसके पास कोई एक्शन प्लान है? इसके बाद एमसीडी ने हाईकोर्ट में बताया था कि दिल्ली के सिर्फ 20 फीसदी मकान ही सेंक्शन प्लान के तहत अप्रूव्ड हैं.

अब अंदाजा लगाईए, जिस शहर के 80 फीसदी मकान असुरक्षित हों वो भूकंप की मार क्या झेल पाएगा? दिल्‍ली में बिना भूकंप के ही कई बिल्‍डिंगें गिर चुकी हैं. हर साल दो-तीन ऐसी बड़ी घटनाएं होती हैं. उसके बाद दो-चार दिन नगर निगम अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया जाता है और लीपापोती कर दी जाती है.

इसलिए बड़ा भूकंप आया तो हालात कैसे होंगे इसका आप अंदाजा नहीं लगा सकते. भूकंप आने पर मकान का भविष्य काफी हद तक जमीन की संरचना पर भी निर्भर करता है.

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दिल्ली-एनसीआर में फाल्ट लाइन


दिल्ली-एनसीआर में तीन फाल्ट लाइन

डिजास्‍टर मैनेजमेंट के प्रोफेसर अभय कुमार श्रीवास्‍तव का कहना है कि जहां फाल्‍ट लाइन होती है वहीं पर भूकंप का एपीसेंटर बनता है. दिल्‍ली-एनसीआर में जमीन के नीचे दिल्‍ली-मुरादाबाद फाल्‍ट लाइन, मथुरा फाल्‍ट लाइन और सोहना फाल्‍ट लाइन मौजूद है. इसलिए बेहतर है कि निर्माण भूकंपरोधी हों.

श्रीवास्‍तव कहते हैं कि दिल्‍ली ही नहीं गुड़गांव, फरीदाबाद भी खतरनाक जोन में हैं. फिर भी यहां के नगर निगम एवं अन्‍य अथॉरिटी यह नहीं चेक कर रही हैं कि मकान भूकंपरोधी बना है या नहीं. वह सिर्फ सर्टिफिकेट जारी करती हैं.

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