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भूकंप का बड़ा झटका झेल नहीं पाएंगे दिल्‍ली-NCR के ये इलाके, देखिए मैप!

मंगलवार शाम को दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं

मंगलवार शाम को दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं

Earthquake: बड़ा भूकंप आने पर दिल्ली में ज्यादा नुकसान की आशंका वाले क्षेत्रों में यमुना तट के करीबी इलाके, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर आदि आते हैं. दिल्‍ली-एनसीआर में जमीन के नीचे तीन फाल्‍ट लाइन मौजूद हैं.

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नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में मंगलवार शाम को भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए. भूकंप महसूस होते ही लोग इमारतों से बाहर निकल आए. हालांकि इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5 मापी गई है. इसका केंद्र भारत नेपाल सीमा बताया जा रहा है. हाल ही में भूकंप को लेकर केंद्र सरकार ने उन शहरों की सूची जारी की थी, जो भूकंप के लिहाज से सबसे खतरनाक जोन 5 और 4 में आते हैं. राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली और एनसीआर (Delhi-NCR) अधिक तीव्रता वाले जोन 4 में आते हैं. जहां रिक्‍टर पैमाने पर 8 तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है.

इसके बावजूद यहां सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर अंधाधुंध अवैध निर्माण हो रहे हैं. उसमें न तो नेशनल बिल्डिंग कोड का पालन किया जा रहा है और न ही स्‍ट्रक्‍चरल इंजीनियरिंग का. जियो हेजार्ड रिस्‍क मैनेजमेंट के प्रोफेसर चंदन घोष के मुताबिक ‘दिल्ली के ज्‍यादातर भवनों में कोई न कोई कमी है. कुछ में उसे ठीक किया जा सकता है लेकिन कुछ बिल्‍डिंगों की बीमारी लाइलाज है’.

Delhi_microzonation_report, earthquake      कौन सा क्षेत्र भूकंप के लिहाज से है खतरनाक

दिल्‍ली-एनसीआर में जमीन के नीचे तीन फाल्‍ट लाइन मौजूद हैं. इन्‍हें दिल्‍ली-मुरादाबाद फाल्‍ट लाइन, मथुरा फाल्‍ट लाइन और सोहना फाल्‍ट लाइन के नाम से जानते हैं. डिजास्‍टर मैनेजमेंट के प्रोफेसर अभय कुमार श्रीवास्‍तव के मुताबिक जहां फाल्‍ट लाइन होती है वहीं पर भूकंप का एपीसेंटर बनता है. इसलिए बेहतर है कि निर्माण भूकंपरोधी हों.

भूकंप के लिहाज से दिल्ली के ये इलाके हैं खतरनाक

दिल्ली के आसपास कई बड़े भूकंप आ चुके हैं. वैज्ञानिक प्रयासों से भूकंप के प्रभावों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्‍ली क्षेत्र की जमीन के नीचे की मिट्टी की जांच करवाकर यह पता किया है कि इसके कौन से क्षेत्र सबसे ज्‍यादा संवेदनशील हैं. इस रिपोर्ट में पता चला है कि घनी आबादी वाले यमुनापार समेत तीन जोन सर्वाधिक खतरनाक हैं. बड़ा भूकंप आने पर दिल्ली में ज्यादा नुकसान की आशंका वाले क्षेत्रों में यमुना तट के करीबी इलाके, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर आदि आते हैं. फरीदाबाद और गुरुग्राम (गुड़गांव) भी ऐसे ही क्षेत्र में आते हैं. दिल्ली की रिपोर्ट भू-विज्ञान और मौसम विज्ञान से जुड़े करीब 80 वैज्ञानिकों की मदद से तैयार की गई.

जमीन के भीतर के संरचना पर होने वाले अध्‍ययन को सिस्‍मिक माइक्रोजोनेशन कहते हैं. मिट्टी की संवेदनशीलता जांच कर इसे भूकंपीय खतरे के लिहाज से नौ जोन में बांटा गया है.

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दिल्ली-एनसीआर में फाल्ट लाइन


दिल्ली में ऐसे जांची गई जमीन

मिट्टी के नमूने लेने के लिए भू-वैज्ञानिकों ने राजधानी दिल्‍ली में करीब पांच सौ जगहों पर 30 मीटर और उससे अधिक नीचे तक ड्रिलिंग की. इससे मिट्टी की स्‍ट्रेंथ (शक्ति) का पता किया. उससे जानकारी मिली कि भूकंप के लिहाज से कौन से क्षेत्र सुरक्षित और खतरनाक हैं.

दिल्ली की तरह ही कोलकाता और बंगलुरु में भी जमीन के भीतर के संरचना की जांच की गई है. माइक्रोजोनिंग की रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी गई है. इसमें सिफारिश की गई है कि भवन निर्माण के दौरान माइक्रोजोनिंग के आधार पर भवनों में भूकंपरोधी तकनीक इस्तेमाल की जाए.

माइक्रोजोनिंग के काम में शामिल रहे सिस्‍मोलॉजिस्‍ट डॉ. एचएस मंडल ने न्यूज़ 18 हिंदी से इसका फायदा साझा किया था. उनके मुताबिक जब भूकंप आता है तो मकान का भविष्य काफी हद तक जमीन की संरचना पर भी निर्भर करता है.

Delhi_microzonation_report, earthquake         दिल्ली के आसपास आए बड़े भूकंप

जैसे यदि भवन नमी वाली सतह यानी रिज क्षेत्र या किसी ऐसी मिट्टी के ऊपर बना है जो लंबे समय तक पानी सोखती है तो उसे खतरा ज्यादा है. क्‍योंकि वहां भूकंप आने पर मिट्टी लूज (ढीली) हो जाती है. जहां मिट्टी शुष्क या बालू वाली हो, पत्थर की चट्टानें नीचे हों तो वहां भूकंप के दौरान अलग-अलग प्रभाव होते हैं.

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