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जहां भूकंप का एपिसेंटर था उस पूर्वी दिल्ली के बारे में भू-वैज्ञानिकों ने दी है ये रिपोर्ट

ये है भूकंप के लिहाज से दिल्ली का सबसे संवेदनशील क्षेत्र

ये है भूकंप के लिहाज से दिल्ली का सबसे संवेदनशील क्षेत्र

80 भू-वैज्ञानिकों की टीम ने सिस्‍मिक माइक्रोजोनेशन कर बताया था कि भूकंप (Earthquake) के लिहाज से खतरनाक है पूर्वी दिल्ली, आज यहीं पर बना एपिसेंटर

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नई दिल्ली. भले ही दिल्ली में आए भूकंप की तीव्रता 3.5 है लेकिन यह भविष्य में किसी बड़े खतरे का संकेत है. क्योंकि जहां भूकंप का एपिसेंटर था उस पूर्वी दिल्ली के बारे में 80 भू-वैज्ञानिकों की टीम ने जो रिपोर्ट दी हुई है उसे गंभीरता से लेने की जरूरत है. ये रिपोर्ट फाइलों में दबी रहती है लेकिन इससे अब जानने की जरूरत है. भूकंप के दुष्परिणामों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्‍ली क्षेत्र की जमीन के नीचे की मिट्टी की जांच करवाकर यह पता किया है कि इसके कौन से क्षेत्र सबसे ज्‍यादा संवेदनशील (Earthquake prone area) हैं. इसमें साफ बताया गया है कि घनी आबादी वाले यमुनापार समेत तीन जोन सर्वाधिक खतरनाक हैं.

बड़ा भूकंप आने पर दिल्ली में ज्यादा नुकसान की आशंका वाले क्षेत्रों में यमुना तट के करीबी इलाके, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर आदि आते हैं. जमीन के भीतर के संरचना पर होने वाले अध्‍ययन को भू-वैज्ञानिक सिस्‍मिक माइक्रोजोनेशन (Seismic microzonation) कहते हैं. आमतौर पर पश्चिमी दिल्ली, सोनीपत और रोहतक के आसपास कई भूकंप आ चुके हैं. लेकिन पूर्वी दिल्ली में केंद्र लंबे समय बाद सुनने को मिला है.

जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के रिटायर्ड निदेशक डॉ. हरि सिंह सैनी कहते हैं कि भूकंप का केंद्र पूर्वी दिल्ली और वो भी सिर्फ 6.5 किलोमीटर नीचे होना किसी बड़ी चिंता से कम नहीं है. क्योंकि पूर्वी दिल्ली की मिट्टी बहुत लूज है. यह यमुना नदी की डाली गई है. इसकी उम्र बहुत कम है. यही यहां के लोगों के लिए खतरा है. यह इलाका यमुना के प्लेन में बसा हुआ है और दूसरे यहां के ज्‍यादातर भवनों में कोई न कोई कमी है.

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दिल्ली-एनसीआर में फाल्ट लाइन


सैनी का कहना है कि जब भूकंप आता है तो मकान का भविष्य काफी हद तक जमीन की संरचना पर भी निर्भर करता है. जैसे यदि भवन नमी वाली सतह यानी रिज क्षेत्र या किसी ऐसी मिट्टी के ऊपर बना है जो लंबे समय तक पानी सोखती है तो उसे खतरा ज्यादा है. क्‍योंकि वहां भूकंप आने पर मिट्टी लूज (ढीली) हो जाती है. जहां मिट्टी शुष्क या बालू वाली हो, पत्थर की चट्टानें नीचे हों तो वहां भूकंप के दौरान अलग-अलग प्रभाव होते हैं.

दिल्ली-एनसीआर में तीन फाल्ट लाइन

उधर, डिजास्‍टर मैनेजमेंट के प्रोफेसर अभय कुमार श्रीवास्‍तव का कहना है कि जहां फाल्‍ट लाइन होती है वहीं पर भूकंप का एपीसेंटर बनता है. दिल्‍ली-एनसीआर में जमीन के नीचे दिल्‍ली-मुरादाबाद फाल्‍ट लाइन, मथुरा फाल्‍ट लाइन और सोहना फाल्‍ट लाइन मौजूद है. इसलिए बेहतर है कि निर्माण भूकंपरोधी हों.

ऐसे पता चला पूर्वी दिल्ली है ज्यादा खतरनाक

मिट्टी के नमूने लेने के लिए भू-वैज्ञानिकों ने राजधानी दिल्‍ली में करीब पांच सौ जगहों पर 30 मीटर और उससे अधिक नीचे तक ड्रिलिंग की. इससे मिट्टी की स्‍ट्रेंथ (शक्ति) का पता किया. उससे जानकारी मिली कि भूकंप के लिहाज से कौन से क्षेत्र सुरक्षित और खतरनाक हैं.

दिल्‍ली और एनसीआर और भूकंप

जियो हेजार्ड रिस्‍क मैनेजमेंट के प्रोफेसर चंदन घोष के मुताबिक ‘दिल्ली के ज्‍यादातर भवनों में कोई न कोई कमी है. कुछ में उसे ठीक किया जा सकता है लेकिन कुछ बिल्‍डिंगों की बीमारी लाइलाज है’. जबकि राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली और एनसीआर (Delhi-NCR) भूकंप को लेकर अधिक तीव्रता वाले जोन 4 में आते हैं. जहां रिक्‍टर पैमाने पर 8 तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है.

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