भारत से विवाद का असर: राखी पर बहनें चीन को देंगी ₹4 हजार करोड़ का झटका!
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भारत से विवाद का असर: राखी पर बहनें चीन को देंगी ₹4 हजार करोड़ का झटका!
CAIT ने 'हिंदुस्‍तानी राखी' के जरिये रक्षा बंधन के त्‍यौहार पर चीन को तगड़ी चपत लगाने की तैयार कर ली है.

रक्षाबंधन के त्‍योहार पर 6 हजार करोड़ रुपये का व्‍यापार होता है. इसमें से अकेले चीन (China) की ही हिस्‍सेदारी लगभग 4 हजार करोड़ रुपये की है. इस बार स्‍वदेशी राखी पर जोर है. ऐसे में चीन को तगड़ा नुकसान होने का अंदाजा है.

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  • Last Updated: July 16, 2020, 11:22 AM IST
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नई दिल्ली. रेशम की डोर नहीं बस मौली बांध देना भाई की कलाई पर मगर चीन (China) की राखी मत खरीदना. याद रखना एक और भाई भी खड़ा है सीमा की चढाई पर. इस बड़े संदेश के साथ इस वर्ष देश भर में राखी का त्‍योहार 'हिन्‍दुस्‍तानी राखी' के रूप में मनाया जाएगा. राखी बनाने अथवा बेचने में चीन का बना कोई भी सामान उपयोग में नहीं लाया जाएगा. इस संदेश को देश भर में फैलाते हुए कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) दिल्ली सहित देश भर में 'भारतीय सामान-हमारा अभिमान' के तहत चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का बहुआयामी राष्ट्रीय अभियान गत 10 जून से चलाया हुआ है. कैट का कहना है कि इस अभियान के शुरू होने बाद राखी वो पहला त्योहार होगा, जिससे चीन को पता लगेगा की किस मजबूती से देश चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कर चीन को एक बड़ा सबक देने की ठान चुका है.

कैट के कहना है की राखी का यह त्‍योहार चीन को लगभग 4 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का घाटा पहुंचाएगा. देश में राखी के त्‍योहार पर एक अनुमान के अनुसार लगभग 6 हजार करोड़ का राखियों का व्यापार होता है. जिसमें अकेले चीन की हिस्सेदारी लगभग 4 हजार करोड़ रुपये की होती है. राखी के अवसर पर चीन से जहां बनी हुई राखियां आती हैं, वहीं दूसरी ओर राखी बनाने का सामान जैसे फोम, कागज़ की पन्नी, राखी धागा, मोती, बूंदे, राखी के ऊपर लगने वाला सजावटी सामान आदि भी चीन से आयात होता है.

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राखी बनवाने में महिलाओं को मिल रहा रोजगार
राखियां बनवाने के इस काम से जहां महिलाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है. वहीं, राखी बनाने की उनकी कला भी सामने आ रही है और कैट का यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'लोकल पर वोकल' तथा 'आत्मनिर्भर भारत' के आह्वान को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. राखियों का यह त्‍योहार विभिन्न वर्गों की महिलाओं की कप्लानाशक्ति और क्रियाशीलता का जीता जागता प्रमाण है. महिला उद्यमी आंगनवाड़ी तथा घरों में काम करने वाली एवं कच्ची बस्तियों में रहने वाली महिलाओं से राखियां बनवाई जा रही हैं. वहीं, 10 राखी के एक पैकेट के साथ रोली एवं चावल भी रख रही हैं और मिठाई के तौर पर एक पैकेट में मिश्री भी रखी जा रही है. दिल्ली के अलावा नागपुर, भोपाल, ग्वालियर, सूरत, कानपुर, तिनसुकिया, गुवाहाटी, रायपुर, भुवनेश्वर, कोल्हापुर, जम्मू, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, पुडुचेरी, मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, वाराणसी, झाँसी, इलाहबाद आदि शहरों में राखियां बनवा कर व्यापारियों को वितरित करने का काम शुरू कर दिया गया है.
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