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OPINION: मोदी सरकार की दमदार विदेश नीति का असर, US-ईरान विवाद में ईरान ने जताया भारत पर भरोसा
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Anil Rai | News18Hindi
Updated: January 17, 2020, 11:27 PM IST
OPINION: मोदी सरकार की दमदार विदेश नीति का असर, US-ईरान विवाद में ईरान ने जताया भारत पर भरोसा
ईरान भारत से भले ही समझौते के लिए मध्यस्थता का प्रस्ताव रख रहा है लेकिन भारत सरकार फिलहाल इस मामले पर राष्ट्रीय हित का अनुमान लगा रही है.

एक बात तय है कि पीएम मोदी (PM Modi) के कार्यकाल में दुनिया भर में भारत का दबदबा बढ़ा है. ईरान (Iran) का भारत से समझौते के लिए मदद मांगना भारत के मजबूत विदेश नीति को दर्शाता है.

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  • Last Updated: January 17, 2020, 11:27 PM IST
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नई दिल्ली. 3 जनवरी को ईरान (Iran) के सेनाध्यक्ष कासिम सुलेमानी (Qasem Soleimani) की हत्या के बाद ईरान और अमेरिका (US) तनाव चरम पर है. ऐसे में पूरी दुनिया युद्ध की आहट के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ रहे तनाव को कम करना चाहती है. दुनिया के सभी बड़े देशों का मानना है कि अगर दोनों देशों में युद्ध हुआ तो इसका विपरीत परिणाम होंगे. ऐसे में दुनिया इन दोनों देशों में शांति चाहती है लेकिन इन दो शक्तियों के बीच वार्ताकार बने तो कौन?  इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है. लेकिन ईरान बार-बार ये कह रहा है कि भारत दो देशों के बीच तनाव को कम कर सकता है. ईरान भारत पर इतना भरोसा इन हालात में कर रहा है जब यूरोपीय देश अमेरिका के साथ खड़े हैं. ऐसे में दुनिया भर की उम्मीदें भारत के बयान पर टिकी हैं कि क्या भारत दोनों देशों के बीच कोई मध्यस्थता करेगा?

मोदी सरकार की विदेश नीति से भारत का बढ़ा पूरी दुनिया में दबदबा

भारत इन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करेगा कि नहीं ये फैसला तो भारत सरकार को करना है. लेकिन एक बात तय है कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में दुनिया भर में भारत का दबदबा बढ़ा है और ईरान का भारत से समझौते के लिए मदद मांगना भारत के मजबूत विदेश नीति को दर्शाता है. मोदी सरकार के दौरान भारत की मजबूत विदेश नीति का ही असर है कि पाकिस्तान की लगातार कोशिश के बाद भी जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने को दुनिया के सभी देशों ने इसे भारत का अंदरुनी मामला बताया. इसके पहले दुनिया के कई देश कश्मीर के मामले में वेबजह बयान देते रहते थे. यहां तक की चीन की लगातार कोशिशों के बाद भी सयुक्त राष्ट्र संघ ने इस मामले पर चर्चा कराना भी जरुरी नहीं समझा और दुनिया भर के प्रतिनिधियों ने कश्मीर का दौरा किया.

भारत का तटस्थ रहने का फैसला

ईरान भारत से भले ही समझौते के लिए मध्यस्थता का प्रस्ताव रख रहा है लेकिन भारत सरकार फिलहाल इस मामले पर राष्ट्रीय हित का अनुमान लगा रही है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ कर दिया है कि दोनों देश स्वायत्त देश है और उन्हें अपना फैसला लेने का हक है. जाहिर तौर पर वही होगा जो दोनों देश चाहेंगे.

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First published: January 17, 2020, 10:45 PM IST
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