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स्वतंत्रता सेनानी की 80 साल की विधवा पेंशन के लिए लगा रही चक्कर
Delhi-Ncr News in Hindi

Pawan Kumar | ETV Haryana/HP
Updated: November 5, 2017, 6:05 PM IST
स्वतंत्रता सेनानी की 80 साल की विधवा पेंशन के लिए लगा रही चक्कर
अपने पति की तस्‍वीर हाथ में लिए चांद कौर.

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिंद फौज में रहकर तिरंगा झंडा हाथ में लिए जिन स्वतंत्रता सेनानी सुलतान सिंह ने अंग्रेजी सिस्टम से देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, उनकी पत्‍नी आजादी के 70 साल बाद अब स्‍वदेशी सिस्टम से न्याय पाने की जंग लड़ रही है

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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिंद फौज में रहकर तिरंगा झंडा हाथ में लिए जिन स्वतंत्रता सेनानी सुलतान सिंह ने अंग्रेजी सिस्टम से देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, उनकी पत्‍नी आजादी के 70 साल बाद अब स्‍वदेशी सिस्टम से न्याय पाने की जंग लड़ रही है.

न्याय की इस लड़ाई में उम्र के अंतिम पड़ाव पर बैठी चांद कौर के साथ उनके परिवार को छोड़कर कोई साथ नहीं है. वे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व मुख्यमंत्री को लगातार पत्र लिखकर अपने पति की एवज में मिलने वाली सुविधाओं के लिए गुहार लगा रही हैं. खास बात यह है कि रिकार्ड में उनके पति को बकायदा स्वतंत्रता सेनानी माना गया है, लेकिन उसके बाद भी उन्‍हें पेंशन तक नहीं मिल रही है.

हरि‍याणा में रेवाड़ी शहर से करीब 23 किलोमीटर दूर गांव माजरा-भालखी में रहने वाली करीब 80 वर्षीय चांद कौर के पास मौजूद दस्तावेज ये साबित करने के लिए काफी हैं कि स्वतंत्रता सेनानी सुलतानसिंह ने आजादी की लड़ाई में अहम योगदान दिया और जेल में रहकर यातनाएं भी सहीं, लेकिन विडम्बना देखिए कि 1990 तक जब वो जिन्दा थे, इस सम्मान के लिए लड़ाई लड़ते रहे और अब उनकी पत्‍नी और परिवार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है.

स्वतंत्रता सेनानी सुलतान सिंह 5 मार्च 1941 को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए थे. उसके बाद पांच साल 23 जून 1946 तक सुलतान सिंह ने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी. इस लड़ाई में उन्होंने देश का सिर ऊंचा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. आजादी की इस लड़ाई में उन्हें काफी यातनाए भी झेलनी पड़ी थी. पंजाब की नाभा जेल में उन्होंने 3 माह 19 दिन तक जेल भी काटी. उसके बाद देश आजाद हुआ और फिर सुलतान सिंह हिमाचल पुलिस में भर्ती हो गए.

1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आजादी की लड़ाई में शामिल होने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के लिए पेंशन व सरकारी सुविधाओं की घोषणा की थी. घोषणा के बाद सुलतान सिंह को भी काफी उम्मीदें थीं. 7 साल तक पेंशन के लिए सुलतान सिंह अधिकारियों के कार्यालय में चक्कर लगाते रहे. आखिरकार 1990 में सुलतान सिंह गले में कैंसर के कारण जिदंगी की जंग हार गए. अब उनका परिवार इस सम्मान के लिए लड़ाई लड़ रहा है.

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First published: November 5, 2017, 6:05 PM IST
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