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'नेताओं को मोटी पेंशन तो CRPF-BSF के जवानों को क्यों नहीं'

'नेताओं को मोटी पेंशन तो CRPF-BSF के जवानों को क्यों नहीं'

प्रतीकात्मक फोटो

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नेता जितने पद पर रहता है उतनी पेंशन लेता है, हरियाणा में पूर्व विधायक हर महीने सवा दो लाख रुपये तक पेंशन ले रहे हैं, जबकि जवानों की पेंशन खत्म कर दी गई, कर्मचारी फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा भेदभाव के खिलाफ शुरू होगी लड़ाई.

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अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा है कि हरियाणा में विधायकों को प्रतिमाह दो से सवा दो लाख रुपये तक पेंशन मिल रही है. कई राज्यों में विधायकों, सांसदों को लाखों की पेंशन है. जबकि जो जवान हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं, जो कर्मचारी देश के लिए काम कर रहे हैं उनकी पेंशन खत्म कर दी गई है. ऐसा भेदभाव क्यों? पैरा मिलिट्री फोर्स के जवानों सहित सभी सरकारी विभागों में कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की मांग को लेकर गुरुवार को जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन होगा. इसका नेतृत्व फेडरेशन करेगा.

लांबा ने न्यूज18 से बातचीत में कहा, "सरकार पैरा मिलिट्री फोर्स के जवानों को पेंशन नहीं दे रही है और नेताओं को इससे मालामाल कर रही है. नेता विधायक, सांसद  शपथ भी ले ले तो वो पेंशन का हकदार हो जाता है. यही नहीं नेता जितने पद पर रहता है उतनी पेंशन लेता है. जबकि जिंदगी भर काम करने के बावजूद कर्मचारियों को पेंशन तक नसीब नहीं होती. जो जवान देश की रक्षा कर रहा है उसकी पेंशन तक बंद कर दी गई.  (ये भी पढ़ें: हरियाणा में पूर्व विधायकों की चांदी, हर महीने मिल रही 2.22 लाख रुपये तक पेंशन )

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लांबा ने बताया कि इस भेदभाव के खिलाफ 21 फरवरी को आंदोलन होगा. कर्मचारी सुरक्षाबलों और अपने लिए पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर संसद कूच करेंगे. आंदोलन शुरू करने से पहले  पुलवामा  हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी जाएगी. लांबा ने कहा कि जनवरी 2004 के बाद नौकरी लगे कर्मचारियों और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) आदि को पहले की तरह पेंशन नहीं मिल रही.

सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को एनपीएस प्रणाली के तहत लाया हुआ है. इसके चलते शहीद जवानों के परिजनों को पुरानी पेंशन स्कीम के तहत पेंशन नहीं मिल रही. लांबा ने कहा, "पुलवामा आतंकी हमले में शहीद सीआरपीएफ जवानों के लिए पुरानी स्कीम के तहत पेंशन की मांग प्रमुखता से रखी जाएगी. ( ये भी पढ़ें: शहीद हेमराज के भाई ने कहा- वादे करके भूल जाते हैं नेता, न पेट्रोल पंप दिया न स्मारक बनवाया!)

पुरानी और नई पेंशन में अंतर

लांबा ने बताया कि पुरानी पेंशन में अंतिम वेतन का आधा पेंशन के रूप में मिलता था और उसकी एवज में कर्मचारी के वेतन से कोई कटौती नहीं होती थी. जबकि एनपीएस में वेतन से 10 फीसदी कटता है और 10 परसेंट सरकार मिलाती है. जिस दिन कर्मचारी रिटायर होता है उस दिन पेंशन के लिए जमा कुल रकम का 40 फीसदी कैश दे दिया जाता है. सरकार शेष 60 परसेंट शेयर मार्केट में लगा देती है. उसकी रकम से जो पेंशन मिलती है उससे कर्मचारी अपना घर नहीं चला सकता. क्योंकि यह बहुत कम होती है.

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Tags: BJP, Central government, CRPF, Loksabha, New Pension Scheme, Pension fund

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