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Good News: ओखला लैंडफिल साइट के कूड़े से जल्‍दी मिलेगी निजात, जानें क्‍या है SDMC का प्‍लान

अगले साल तक तेहखंड में इंजीनियर्ड लैंडफिल स्थापित किया जाएगा.

अगले साल तक तेहखंड में इंजीनियर्ड लैंडफिल स्थापित किया जाएगा.

Engineered Landfill in Tehkhand : दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) ने अगले साल तक तेहखंड में लगभग 27 एकड़ क्षेत्र में लैंडफिल को स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इससे एक तरफ ओखला लैंडफिल साइट के कूड़े से निजात मिलेगी, तो वहीं वायु और भूजल दूषित नहीं होगा.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (South Delhi Municipal Corporation) ने राजधानी दिल्‍ली के तेहखंड में लगभग 27 एकड़ क्षेत्र में फैले लैंडफिल (Landfill in Tehkhand) को स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. वैसे इस वक्‍त दिल्ली में लैंडफिल खुले डंपिंग साइट हैं और इसमें वैज्ञानिक रूप से अपशिष्ट एकत्र करने या भूजल को प्रदूषित करने वाले लीचेट को रोकने के लिए कोई कारगार तरीका नहीं है, लेकिन आने वाले समय इसका समाधान तय है.

    इंडियन एक्सप्रेस ने एक इंजीनियर के हवाले से खबर दी है कि एक इंजीनियर्ड लैंडफिल साइट में निष्क्रिय कचरे का उपयोग सबसे पहले बिजली पैदा करने के लिए किया जाता है. वर्तमान में दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में प्रतिदिन 3,600 टन से अधिक कचरा उत्पन्न होता है. जबकि अधिकारी ने इसका काम एक साल में पूरा होने की उम्मीद जताई है.

    लैंडफिल में लीचेट संग्रह, सुरक्षित डंपिंग, प्रसंस्करण और निपटान के प्रावधान होंगे. दिल्ली में वर्तमान लैंडफिल खुले डंपिंग साइट हैं और इसमें वैज्ञानिक रूप से अपशिष्ट एकत्र करने या भूजल को प्रदूषित करने वाले लीचेट को रोकने के लिए कोई तंत्र नहीं है. साउथ एमसीडी ने जून 2022 तक ओखला लैंडफिल साइट पर कचरे के डंपिंग को रोकने और 2023 के अंत तक इसे वैज्ञानिक रूप से बंद करने का लक्ष्य भी रखा है.इसके लिए नगर निकाय ने कहा कि लैंडफिल पर विरासती कचरे के जैव-खनन की प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न इनर्ट मैटेरियल का उपयोग सड़कों के निर्माण में किया जाएगा.

    एसडीएमसी आयुक्त ने कही ये बात
    एसडीएमसी आयुक्त ज्ञानेश भारती ने कहा कि सड़कों के निर्माण के लिए इनर्ट मैटेरियल के उपयोग के संबंध में नागरिक निकाय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के साथ बैठकें की हैं. उन्होंने कहा कि हम बहुत सकारात्मक और आशान्वित हैं कि वे सड़क निर्माण के लिए अक्रिय सामग्री का उपयोग करेंगे. वे सामग्री के स्थायित्व की जांच कर रहे हैं.

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    जबकि एसडीएमसी में पर्यावरण प्रबंधन सेवा विभाग (डीईएमएस) के निदेशक दिनेश यादव ने कहा कि सड़क विकास परियोजनाओं के लिए निष्क्रिय सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) ने भी इस पर एक अध्ययन किया है. यादव ने कहा, ‘अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो हम एनएचएआई को अक्रिय सामग्री की आपूर्ति करेंगे, जिसका उपयोग वे शहरी विस्तार रोड -2 (यूईआर -2) और कालिंदी कुंज (कालिंदी कुंज बाईपास) के पास एक राजमार्ग के निर्माण परियोजनाओं में करेंगे.’

    इससे पहले पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने इस साल मार्च में, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पास कल्याणपुरी में एक सर्विस रोड के 800 मीटर के हिस्से के निर्माण में अक्रिय सामग्री के उपयोग की घोषणा की थी. एसडीएमसी ने अपने निष्क्रिय कचरे को इकट्ठा करने के लिए 13 निजी एजेंसियों को सूचीबद्ध किया है, जो साइट पर तैयार हो रहे थे. दक्षिण दिल्ली में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले लगभग 3,600 मीट्रिक टन कचरे में से केवल 50 प्रतिशत को ही एसडीएमसी द्वारा प्रोसेस्ड किया जाता है और शेष को ओखला लैंडफिल में डंप किया जाता है.

    यादव ने कहा कि नगर निकाय जून 2022 में अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्र का संचालन शुरू कर देगा. तहखंड संयंत्र में 2,000 मीट्रिक टन कचरे को प्रोसेस करने की क्षमता होगी. यादव ने कहा कि इस संयंत्र के चालू होने के बाद हम 2023 के अंत तक ओखला लैंडफिल साइट में कचरा डंप करना रोक देंगे.

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