प्रकाश संश्लेषण के जरिए हो सकता है पॉल्यूशन के सॉल्यूशन: पर्यावरणकर्मी पीपल बाबा

दिल्ली के आसमान में बुधवार सुबह से ही धुंध छाई हुई है. प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. इसका असर लोगों की सेहत पर भी पड़ सकता है.
दिल्ली के आसमान में बुधवार सुबह से ही धुंध छाई हुई है. प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. इसका असर लोगों की सेहत पर भी पड़ सकता है.

पीपल बाबा के अनुसार दिल्ली एनसीआर से प्रदूषण की समस्या के स्थाई निदान के लिए प्रकाश-संश्लेषण अभिक्रिया वरदान साबित हो सकती है. इस अभिक्रिया के बारे में बचपन में सभी ने पढ़ा होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 18, 2020, 10:44 PM IST
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दिल्ली में ठंड के मौसम में फॉग की समस्या अब स्थाई बनती जा रही है. दिल्ली सरकार ने बीते सालों में ऑड इवन (Odd-Even) के जरिए इससे निपटने की कोशिश की. इस साल रेड लाइट पर बत्ती बंद करने के अभियान  “युद्ध प्रदूषण के विरुद्ध” जरिए अपने-अपने तरीके से इस समस्या से उबरने की कवायदें देखी जा रही हैं. राष्ट्रीय हरित न्याधिकरण (NGT) ने दिवाली पर पटाखे न जलाने के आदेश और अपील भी इसी दिशा में एक कदम थे. लेकिन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम की चर्चा पीआरएस-दिल्ली की तरफ से आयोजित किये गए जनरेशन नेक्स्ट आइडिया आइडिया सीरीज के वॉल्यूम -10 में पर्यावरणकर्मी पीपल बाबा सुझाई.


पीपल बाबा ने कहा कि इस समस्या का स्थाई निदान प्रकाश-संश्लेषण अभिक्रिया है. इस अभिक्रिया के बारे में बचपन में सभी ने पढ़ा होगा. दरअसल, पीपल बाबा कहना है कि पौधे लगेंगे तो प्रकाश-संश्लेषण बढ़ेगा और प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी. अन्यथा धरती समस्याओं के दलदल में फंसती जाएगी. उल्लेखनीय है कि पीपल बाबा अपने गीव मी ट्री ट्रस्ट के जरिए देश दो करोड़ से ज्यादे पेड़ लगा चुके हैं. अब उन्होंने पेड़ लगाने के अभियान के बारे में दिल्ली पीआर सोसाइटी के वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में उठाई है. इसमें सरकार से जुड़े लोग, उद्यमी, वरिष्ठ जनसंपर्क पेशेवर व्यवसायी और गैर सरकारी संगठन के लोग शामिल हुए थे.


चर्चा में शामिल लोगों ने जब पहले की तुलने में ठंड कम पड़ने को लेकर सवाल पूछा तो पीपल बाबा ने कहा, यह मुख्य रूप से हरे भरे स्थानों के कारण है जो दिन-प्रतिदिन कम हो रहे हैं और पेड़ों के कम होने के वजह से कार्बन स्तर तेजी से बढ़ रहा है. बढ़ते तापमान का दूसरा कारण यह है कि पिछले कुछ वर्षों में बारिश का पैटर्न बदल गया है. पीपल बाबा ने कहा, अगर हम वास्तव में बारिश  को ठीक करना चाहते हैं और फिर हमें बड़े पैमाने पर पेड़ों की संख्या को बढ़ाना होगा. अगर हम वर्ष 2026-2027  के पहले कुछ नहीं करते है तो हम फिर कुछ भी नहीं कर पाएंगे.


एक व्यवसायी ने सवाल पूछते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने स्तर पर  जंगल बनाना चाहता है तो इस प्रक्रिया को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है  सकता है? इस पर पीपल बाबा ने कहा, सबसे पहले आपको एक बंजर भूमि मिलनी चाहिए क्योंकि बंजर भूमि उपयोग की गई भूमि की तुलना में सस्ती है. इसके बाद उस जमीन पर लेवेलिंग और फंसिंग व कम्पोस्टिंग और तालाब निर्माण की प्रक्रिया शुरू करें. दूसरी तरफ अगर आपके पास उपजाऊ जमीन है और आप जानते हैं कि इसका सही इस्तेमाल कैसे किया जाए तो आप इससे अच्छा लाभ कमा सकते हैं. जैविक खेती करके लाभ कमा सकते हैं. दोनों उद्देश्य इससे पूरे हो सकते हैं.

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