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Delhi News: DSGMC चीफ मनजिंदर सिंह सिरसा की मुश्किलें बढ़ीं, EOW ने दर्ज किया केस

मनजिंदर सिंह सिरसा के खिलाफ एफआईआर. . . (File Pic PTI)
मनजिंदर सिंह सिरसा के खिलाफ एफआईआर. . . (File Pic PTI)

शिरोमणि अकाली दल और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा के खिलाफ धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज दिल्ली पुलिस की  आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने दर्ज  किया है.

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दिल्ली. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) के खिलाफ धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज किया है. अधिकारियों ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी है. खबरों के अनुसार, दिल्ली की एक अदालत ने पिछले साल नवंबर में ईओडब्ल्यू को सिरसा के खिलाफ डीएसजीएमसी में महासचिव पद पर रहते हुए कोष की हेरा फेरी करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे.

पुलिस ने बताया कि सिरसा और अन्य लोगों के खिलाफ बुधवार को मामला दर्ज किया गया था. उन पर धोखाधड़ी करने और गुरुद्वारे के कोष से टेंट, कंबल और त्रिपाल खरीदने के नाम पर एक करोड़ रूपए का बेहिसाब भुगतान करने का आरोप है. पुलिस का कहना है कि डीएसजीएमसी को मिलने वाले कोष में एक पक्षकार भूपिंदर सिंह की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है.

दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला



दिल्ली हाई कोर्ट ने एमसीडी कर्मचारियों को वेतन भगुतान नहीं करने को लेकर गुरुवार को दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगमों के पार्षदों और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने सुनवाई में यहां तक कह दिया कि अगर ऐसे मामलों में नेताओं और अधिकारियों की पिटाई हो जाए तो उस हैरानी नहीं होगी. कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति राजनीति के चलते उत्पन्न हुई है. कोर्ट ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा, 'अपने नेताओं को बताएं कि उन्हें परिपक्व होना पड़ेगा और इन सबसे ऊपर उठना होगा. अगर चीजें नहीं बदलीं और ऐसे ही चलता रहा तो हमें हैरानी नहीं होगी, यदि इसमें शामिल नेता और लोगों को जनता सरेआम पीटना शुरू कर दे.'
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हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि नगर निगमों और स्थानीय निकायों के बकाया कर्ज के एवज में उनसे लिए गए धन को 2 सप्ताह के भीतर उन्हें लौटाया जाए. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि दिल्ली सरकार के राजस्व में कमी आई है लेकिन कोरोना महामारी के दौरान जिस तरह से विज्ञापनों पर पैसा बहाया गया, उससे सवाल जरूर खड़े होते हैं. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा, 'आपने कितना पैसा विज्ञपनों पर खर्च किया है. हम जानना चाहते हैं.' कोर्ट ने कहा कि आपके पास विज्ञापन पर खर्च करने के लिए पैसा है लेकिन एमसीडी के गरीब कर्मचारियों को देने के लिए नहीं. हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि हम CAG को भी इस मामले में जांच करने के आदेश दे सकते हैं.
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