दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र को लिखे पत्र, पूछा- Quarantine पूरा किए तबलीगियों को छोड़ा जाए?

दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेष सीईओ ने इस संबंध में एक पत्र लिखा है. (फाइल फोटो)
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेष सीईओ ने इस संबंध में एक पत्र लिखा है. (फाइल फोटो)

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को दो बार पत्र लिखा और पूछा है कि क्वारंटाइन पूरा कर चुके तबलीगी जमात के तीन हजार सदस्यों को अस्पतालों और सेंटरों से छोड़ा या स्थानांतरित किया जा सकता है?

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नई दिल्ली. तबलीगी (Tabligi Jamaat) के 3,000 से अधिक सदस्यों को COVID-19 के टेस्ट के नेगेटिव परिणाम आने और और अनिवार्य क्वारंटाइन अवधि को पूरा करने के बावजूद दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों क्वारंटाइन केंद्रों में रोक कर रखा गया है. दिल्ली सरकार (Delhi Government) के स्वास्थ्य विभाग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (Central Home Affairs) को 17 अप्रैल और 3 मई को दो बार पत्र लिखा है, जिसमें तबलीगियों को उनकी रिहाई पर "निर्देश और प्रोटोकॉल" की मांग की गई है. पत्र में लिखा गया है कि टेस्ट परिणाम नेगेटिव आये हैं और उन्होंने अस्पतालों/क्वारंटाइन सुविधा केंद्रों में 28 दिनों से अधिक का प्रवास भी पूरा कर लिया है.

पुलिस कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है: स्वास्थ्य मंत्री

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, 7 मई को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने संवाददाताओं से कहा कि तबलीगी जमात के सदस्यों को उनकी क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बावजूद 3 मई तक देशव्यापी लॉकडाउन के कारण नहीं छोड़ा जा सकता था. सत्येंद्र जैन ने यह भी कहा कि अगर पुलिस को किसी के खिलाफ कार्रवाई करनी है, तो वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं. अन्यथा, जो लोग क्वारंटाइन में हैं और जो पहले पॉजिटिव थे और अब टेस्ट में नेगेटिव आ चुके हैं, उन लोगों को छोड़ दिया जाना चाहिए.



'क्वारंटाइन पूरा किए लोगों को कहीं और स्थानांतरित की जाए'
सत्येंद्र जैन से यह पूछे जाने पर कि क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद भी तबलीगियों को जाने से क्यों रोका गया, पर उन्होंने कहा कि ऐसा पहले लॉकडाउन के कारण किया गया था. तीन मई तक पूर्ण रूप से तालाबंदी थी, जब सभी तरह की गतिविधियों पर रोक थी. अब यहां फंसे हुए लोगों को कहीं भी भेजा जा सकता है और यही वजह है कि इन लोगों को भी जो यहाँ फंसे हुए हैं उन्हें भी कहीं और स्थानांतरित किया जाना चाहिए. इस संबंध में दिल्ली और देश के विभिन्न हिस्सों में एफआईआर दर्ज की गई हैं. तबलीगी जमात के वे सदस्य जो विभिन्न देशों से भारत की यात्रा पर आए उनके खिलाफ वीजा शर्तों के कथित उल्लंघन के लिए मामला दर्ज है. अधिकारियों का कहना है कि वे पर्यटक वीजा पर आए थे लेकिन एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे.

राज्यों को तबलीगी जमात की सूची दे दी गई: जैन

सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली सरकार ने अन्य राज्यों को तबलीगी जमात के उन सदस्यों की सूची पहुंचा दी है, जिन्हें 7 मई तक भी अस्पतालों और क्वारंटाइन सेंटर से छोड़ा नहीं गया था. अपने 3 मई के पत्र में स्वास्थ्य विभाग ने लिखा कि सरकार पर तबलीगी जमात के सदस्यों को छोड़ने का बहुत भारी दबाव है.

स्वास्थ्य विभाग सचिव पद्मिनी सिंगला ने बताया कि विभाग को अन्य राज्यों से भी पत्र आ रहे हैं कि उनके राज्य से जुड़े तबलीगी जमात के सदस्यों को छोड़ दिया जाए. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने तबलीगी जमात के सदस्यों की रिहाई पर एक विशिष्ट प्रोटोकॉल क्यों मांगा. इस पर स्वास्थ्य विभाग सचिव पद्मिनी गुरुवार को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने संवाददाताओं से कहा कि तबलीगी जमात के सदस्यों को उनकी क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बावजूद 3 मई तक देशव्यापी लॉकडाउन के कारण नहीं छोड़ा जा सकता था. सत्येंद्र जैन ने यह भी कहा कि अगर पुलिस को किसी के खिलाफ कार्रवाई करनी है, तो वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं. अन्यथा, जो लोग क्वारंटाइन में हैं और जो पहले पॉजिटिव थे और अब टेस्ट में नेगेटिव आ चुके हैं, उन लोगों को छोड़ दिया जाना चाहिए."

सिंगला ने टिप्पणियों का नहीं दिया जवाब

यह पूछे जाने पर कि क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद भी उन्हें जाने से क्यों रोका गया, जैन ने कहा कि यह लॉकडाउन के कारण था. तीन मई तक पूर्ण रूप से तालाबंदी थी, जब सभी तरह की गतिविधियों पर रोक थी. अब फंसे हुए लोगों को कहीं भी भेजा जा सकता है और यही वजह है कि इन लोगों को भी जो यहाँ फंसे हुए हैं उन्हें भी कहीं और स्थानांतरित किया जाना चाहिए. हालांकि सिंगला ने टिप्पणियों का जवाब नहीं दिया.

191 दिल्ली के नागरिक हैं

फिलहाल क्वारंटाइन केंद्रों में 3,013 में से, 567 विदेशी नागरिक और 2,446 भारतीय हैं. तबलीगी जमातियों में 191 दिल्ली के नागरिक हैं. सरकार ने निजामुद्दीन में मरकज़ इमारत से लगभग 2,346 लोगों को निकाला था. खाली कराए गए लोगों में से 536 को अस्पतालों और बाकी को क्वारंटाइन केंद्रों में स्थानांतरित कर दिया गया.

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