बिल्डर यदि ऋण नहीं चुकाता है तो भी अलॉटी के अधिकारों पर नहीं पडे़गा फर्क-HRERA

हरेरा गुरुग्राम ने कहा है कि बैंक अथवा वित्तीय संस्था की ओर से प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग में जो कमी रही उसका खामियाजा अलॉटी क्यों भुगतें
हरेरा गुरुग्राम ने कहा है कि बैंक अथवा वित्तीय संस्था की ओर से प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग में जो कमी रही उसका खामियाजा अलॉटी क्यों भुगतें

हरेरा गुरुग्राम की ओर से पहली बार यह तय किया गया है कि वित्तीय संस्थान (financial institution), जिनके पास सम्पति गिरवी है और जिसने टेक आवर किया है. वह प्रमोटर की परिभाषा में आएगा और उसकी देनदारी की वही जिम्मेदारी बनी रहेगी. जो मूल रूप से पहले प्रमोटर अथवा बिल्डर (builder) की थी.

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गुरुग्राम. बिल्डर या डेवलपर फ्लैट या अन्य किसी निर्माण कार्य के लिए बैंक (Bank)  या किसी वित्तीय संस्था से जमीन या रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को गिरवी रखकर ऋण (Loan) लेता है और समय पर उसे अदा नहीं कर पाता है तब अलॉटी का पैसा सुरक्षित रहेगा.अलॉटी के हितों की रक्षा के लिए यह अभूतपूर्व, ऐतिहासिक और समय अनुकूल फैसला हरेरा गुरुग्राम (HRERA) ने लिया है. आज इस फैसले की जानकारी हरेरा गुरुग्राम के चेयरमैन डा. के के खंडेलवाल ने दी.

डॉ खंडेलवाल ने बताया कि रियल स्टेट प्रोजक्ट और अलाटियों से मिली राशि बैंको में गिरवी रखने की स्थिति में बैंक और वित्तीय संस्था भी प्रमोटर की परिभाषा में आएंगे और वो अलाटियों के प्रति उत्तरदायी होंगे.  उन्होंने हरेरा गुरुग्राम के दीपक चैधरी बनाम मैसर्स पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड मामले में सुनाए गए फैसले का उल्लेख करते हुए बताया कि इस मामले में सुपरटेक लिमिटेड प्रमोटर की भूमिका में था. इसे सरकार ने लाइसेंस नहीं दिया था और ना ही वह कोलोब्रेटर था. सुपरटेक लिमिटेड ने पीएनबी फाइनेंस लिमिटेड से सुपरटेक हयूज नामक प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए ऋण लिया.इसमें मैसर्स सर्व रियलटर प्राइवेट लिमिटेड , जिसके नाम प्रोजेक्ट का लाइसेंस जारी किया गया था, भी हिस्सेदार था. लेकिन मैसर्स सुपरटेक लिमिटेड ऋण की वापसी करने में नाकाम रहा और डिफाल्टर हो गया.परिणामस्वरूप बैंक ने प्रोजेक्ट को टेकओवर करके ई-ऑक्शन पर डाल दिया.

अलॉटी ने की थी दखल की मांग
दीपक चौधरी नामक अलॉटी ने इस मामले में हरेरा से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए हरेरा गुरुग्राम ने ई-ऑक्शन प्रक्रिया को स्टे कर दिया. क्योंकि नीलामी के लिए अथॉरिटी की इजाज़त नहीं ली गई थी. इससे प्रोजेक्ट में शामिल 950 अलाॅटियों के हितों का कुठाराघात होता जिन्होंने इस प्रोजेक्ट में 328 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा की थी.
ऐतिहासिक फैसला


इस मामले में सुनाए गए अपने ऐतिहासिक फैसले में हरेरा गुरुग्राम ने कहा है कि बैंक अथवा वित्तीय संस्था की ओर से प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग में जो कमी रही उसका खामियाजा अलॉटी क्यों भुगतें. अथॉरिटी ने यह भी कहा कि वह बैंक द्वारा अपने ऋण की वसूली के लिए प्रोजेक्ट की नीलामी के विरोध में नहीं है. लेकिन बैंक अलॉटियों के हितों की रक्षा करते हुए नीलामी कर सकता है. डा. खंडेलवाल ने कहा कि हरेरा गुरुग्राम का इस मामले में यही प्रयास रहा कि प्रोजेक्ट पूरा हो और उसके बाद ऋण देने वाली संस्था अपने पैसे की वसूली तैयार फ्लैट अथवा यूनिट बेचकर कर सकती है.इससे अलॉटियों के हितों की रक्षा होगी. उन्होंने कहा चूंकि प्रोजेक्ट हरेरा में रजिस्टर है, इसलिए प्रमोटर और रियल एस्टेट एजेंट या अलॉटी तीनों में से कोई भी पक्ष अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करता है तो अन्य प्रभावित पक्ष हरेरा के पास आ सकता है. हरेरा उस पक्ष को अपनी जिम्मेदारी पूरी करने की हिदायत देगा.

ये है प्रावधान
डॉ खंडेलवाल ने बताया कि इस मामले में ऋण देने वाली बैंक को हिदायत दी गई हैं कि प्रोजेक्ट हरेरा में रजिस्टर होने की वजह से अथॉरिटी बीच में है और सेफ्टी वॉल्व का काम कर रही है. चूंकि प्रोजेक्ट में यूनिट के लिये जो पैसा अलॉटी ने लगाया है उसके लिये बिल्डर बायर ऐग्रीमेंट में जो संबंध बनता है, वह अलॉटी और प्रमोटर के बीच में था. वित्तीय संस्थान जिसने प्रोमोटर को लोन दिया है उनका अलाटी से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है.वित्तीय संस्थान ने इसलिये टेक ओवर किया कि उन्हें अपनी वसूली करनी थी. लेकिन सरफैसरी एक्ट में यह प्रावधान है कि वह प्रोजेक्ट की सभी देनदारियों और जिम्मेवारियों को ध्यान में रखते हुए नीलाम कर सकता है. हरियाणा रीयल स्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी गुरुग्राम द्वारा निर्धारित  किया गया है कि गिरवी रखे गए प्रोजेक्ट को वित्तीय संस्थान टेक ओवर करता है तो वह प्रमोटर के स्थान पर आ जाएगा और वह प्रोमोटर कहलाएगा. ऐसी स्थिति में अलाॅटियों के हितों को वित्तीय संस्थान को की जाने वाली देनदारियों के अधीन नहीं रखा जा सकता.बिल्डर  बायर एग्रीमेंट होने के बाद कोई भी प्रॉपर्टी गिरवी नहीं रखी जा सकती है. यदि गिरवी रखी गई तो अलाॅटी के अधिकार सुरक्षित रहेंगे.

प्रमोटर कौन
इस निर्णय से हरेरा गुरुग्राम की ओर से पहली बार यह तय किया गया है कि वित्तीय संस्थान, जिनके पास सम्पति गिरवी है और जिसने टेक आवर किया है. वह प्रमोटर की परिभाषा में आएगा और उसकी देनदारी की वही जिम्मेदारी बनी रहेगी. जो मूल रूप से पहले प्रमोटर अथवा बिल्डर की थी. यदि वह सम्पत्ति को नीलाम करते हैं तो वह सारे एसेट घोषित करेंगे और अथॉरिटी से अनुमति लेंगे. उसके बाद ही नीलाम कर सकते हैं. वित्तीय संस्थान यह सुनिश्चित करेंगे कि अलॉटियों से मिली 70 प्रतिशत राशि का प्रयोग प्रोजेक्ट पूरा करने  पर खर्च होगा. यदि यह पाया गया कि कोई वित्तीय संस्थान प्राधिकरण के अनुमोदन के बिना परियोजना को नीलाम करने में शामिल है तो इसे गम्भीरता से लिया जाएगा. उस देनदार प्रोमोटर औ वित्तीय संस्थान /व्यक्तियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी
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