Covid 19 : 4000 कैदियों को मिली इमरजेंसी पैरोल को बढ़ाए जाने की उठी मांग

दिल्‍ली में जेल में बंद कैदी (File Photo)
दिल्‍ली में जेल में बंद कैदी (File Photo)

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 12:08 AM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना (Covid 19) के मद्देनजर दिल्‍ली की जेलों के कैदियों को दी गई पैरोल की अवधि बढ़ाए जाने की मांग उठी है. वकील और सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी ने दिल्‍ली सरकार (Delhi Govt) द्वारा कैदियों को दी गई पैरोल (Parole) का विस्तार करने के लिए दिल्‍ली के गृह एवं जेल मंत्री सत्येन्द्र जैन को पत्र लिखा है. इस पत्र में कहा गया है कि पैरोल खत्‍म होने पर अगर 4000 कैदी सरेंडर कर देते हैं तो तिहाड़ जेल में सोशल डिस्टेंसिंग को बरकरार नहीं रखा जा सकेगा, ऐसे में तिहाड़ जेल (Tihar Jail) में अत्यधिक भीड़ होने पर तिहाड़ में स्थिति खराब हो सकती है और यह न केवल कैदियों, बल्कि जेल प्रशासन के लिए भी हानिकारक साबित होगा.

साहनी ने जेल मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि चूंकि दिल्ली की जेलों में पहले से ही भीड़भाड़ है और इस तरह की दिल्ली की जेलें अपने आप में महामारी के चलते बेहद प्रभावित हैं, ऐसे में जेलों में "सोशल डिस्‍टेंसिंग" व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है.

उन्‍होंने कहा है कि यहां तक की खुद तिहाड़ जेल के महानिदेशक कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं और अंडर क्‍वारंटीन हैं. जब तिहाड़ मुख्यालय सुरक्षित नहीं है और तिहाड़ मुख्यालय में तैनात कई अधिकारी अंडर क्‍वारंटीन हैं, ऐसे में सेल/बैरक में, जहां कैदियों को रखा जाता है, वहां व्यवस्था और सोशल डिस्‍टेंसिंग के कायम होने पर टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है.




पत्र में मांग की गई है कि “दिल्ली की जेलों में 10026 कैदियों को रखने की क्षमता है और वर्तमान में लगभग 4000 कैदियों को छोड़कर, जो वर्तमान में अंतरिम जमानत/आपातकालीन पैरोल पर रिहा हैं, दिल्ली की जेलों में लगभग 14000 कैदी बंद हैं.” पत्र में आग्रह किया गया है कि देश में स्थिति काफी गंभीर है और कोविड-19 मामले 61.45 लाख को पार कर चुके हैं और दिल्ली में यह आंकड़ा 2.73 लाख को पार कर चुका है.

साहनी ने पत्र में कहा है कि “जेल प्रशासन ने वर्तमान में कैदियों की दी गई आपातकालीन पैरोल को 30 सितंबर से आगे बढ़ाए जाने का विरोध किया है, जोकि कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न परिस्थितियों के विपरीत है, विशेषकर जब दिल्ली जेलों के प्रमुख (डीजी जेल) को खुद कोविड पॉजिटिव पाया गया है. साहनी का कहना है कि अगर पैरोल खत्‍म होने पर सभी कैदियों को सरेंडर करना पड़ा तो सभी जेलों में 80 प्रतिशत तक अधिक भीड़ हो जाएगी, जिससे हालात बेहद बुरे होंगे.

लिहाजा, जेल मंत्री से अनुरोध किया गया है कि इस मुद्दे पर विस्तृत विचार-विमर्श की आवश्यकता है और कैदियों के आत्मसमर्पण को आयु, विकलांगता, बीमारी से पीडि़त कैदी/अंडरट्रायल या ऐसे कैदी जो किसी जघन्य अपराध में शामिल हैं और क्या इस तरह के दोषी द्वारा आपातकाल पैरोल / जमानत का दुरुपयोग किया गया है, को ध्‍यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से इस बारे में फैसला लिया जाना चाहिए.

वकील और एक्टिविस्ट अमित साहनी ने कैदियों और जेल प्रशासन के बड़े हित में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई पावर कमेटी के समक्ष इस मुद्दे को उचित तरीके से निपटने और इसे लागू करने का अनुरोध भी किया.
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