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आंदोलन में शामिल किसान बेटी की शादी पर नहीं गया घर, वीडियो कॉल कर दिया आशीर्वाद

बेटी की शादी में शामिल नहीं हुआ किसान (प्रतिकात्मक तस्वीर)
बेटी की शादी में शामिल नहीं हुआ किसान (प्रतिकात्मक तस्वीर)

Kisan Aandolan: यूपी के अमरोहा के रहने वाले 58 साल के सुभाष चीमा (Suhash Cheema) भारतीय किसान यूनियन (BKU) के सदस्य हैं और कई वर्षों से इससे जुड़े रहे हैं. बेटी की शादी में न जाकर वे इन दिनों गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का साथ देने में जुटे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 4, 2020, 10:42 AM IST
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दिल्ली. नई कृषि नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का शुक्रवार को 9वां दिन है और किसान नेताओं ने एक बार फिर अपनी मांगों को दोहराया है. गुरुवार को केंद्र सरकार के साथ किसानों की एक और दौर की बातचीत हुई लेकिन किसानों (Farmers) और सरकार के बीच सहमति नहीं बनी. किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए है. किसान अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को राजी नहीं हैं. किसान अपने घर का सारा कामकाज छोड़कर प्रदर्शन में डटे हुए हैं. एक ऐसे ही किसान हैं सुभाष चीमा (Subhash Cheema) जिनकी बेटी की शादी (Daughter Marriage)  थी लेकिन वे इसमें शामिल नहीं हुए क्योंकि उनके लिए किसानों की आवाज उठाना ज्यादा जरूरी है.

किसान सुभाष चीमा ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से की बातचीत में कहा कि आज वो जो कुछ भी हैं अपनी खेती-किसानी की वजह से हैं. जिंदगी भर उन्होंने खेती का काम किया और इसी से उनका परिवार चलता है. ऐसी स्थिति में वे किसान आंदोलन से अपनी नजरें नहीं मोड़ सकते और इसे बीच में छोड़कर नहीं भाग सकते. सुभाष चीमा ने कहा कि गुरुवार को उनकी बेटी की शादी थी लेकिन उन्होंने इसमें हिस्सा नहीं लिया. 58 साल के सुभाष चीमा भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के सदस्य हैं और कई वर्षों से इससे जुड़े रहे हैं.





वीडियो कॉल पर देखी बेटी की शादी
सुभाष चीमा जो उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे हैं. चीमा पिछले 6 दिन से आंदोलन में डटे हुए हैं. गुरुवार को दिल्ली से 111 किमी दूर अमरोहा में उनकी बेटी की शादी थी. उन्होंने वीडियो कॉल के जरिये बेटी की शादी देखी. शहनाई की आवाज भी उन्होंने अपने फोन पर ही सुनी. धरना स्थल पर बैठे किसानों का कहना है कि चीमा इसलिए घर नहीं जाना चाहते थे क्योंकि इससे किसान बिरादरी में गलत संकेत जाएगा कि पदाधिकारी स्तर का कोई व्यक्ति ही जब आंदोलन छोड़ दे तो बाकी लोगों का क्या होगा.
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