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  • FARMERS WHO HAVE BEEN AGITATING FOR 108 DAYS ARE NOW BUILDING PUCCA HOUSES ON THE SINGHU BORDER NODSSP

Kisan Aandolan: 108 दिन से आंदोलन कर रहे किसान सिंघू बॉर्डर पर अब बना रहे पक्के घर, गर्मी से बचने की तैयारी

दिल्ली की सीमाओं पर 108 दिन से चल रहे किसान आंदोलन में अब किसानों ने पक्के घर बनाने शुरू कर दिए हैं. वो कहते हैं कि ये गर्मी से बचने का इंतजाम है.

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में 108 दिन से किसान आंदोलन चल रहा है. इसमें शामिल किसानों ने दिल्ली बॉर्डर पर गर्मी से बचने के लिए इंतजाम शुरू कर दिए हैं. इसके लिए सिंघु बार्डर पर ईंटों के पक्के मकान बनाए जा रहे हैं.

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    नई दिल्ली. दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 108 दिन से कृषि कानूनों के खिलाफ धरना दे रहे किसान अब ईंटो के पक्के घर बना रहे हैं. सिंघू बॉर्डर पर ईंट से बने घरों के निर्माण का काम चल रहा है. चारों तरफ ईंट की दीवार बनी है. अभी यहां सिर्फ दीवार खड़ी की गई हैं जिस पर पक्की छत भी डाली जाएगी. इन पक्के घरों के ढांचे की बाहरी दीवारों पर मिट्टी का और अंदर की दीवारों पर कंक्रीट के मसाले से दीवार खड़ी की जा रही हैं.

    सिंघू बॉर्डर पर 3 से 4 की संख्या में ऐसे पक्के घर बनाये जा रहे हैं. 10 मार्च से यहां निर्माण कार्य शुरू हुआ है. मौके पर फिलहाल इन घरों की दीवार खड़ी हुई नजर आ रही हैं. किसान नेता मंजीत राय ने कहा कि 'किसान तपती गर्मी में कहां रहेगा इसलिए ये पक्के घर बनाये जा रहे हैं. पंजाब के लोगों की विरासत है कि वो अच्छा खाते हैं, अच्छा पहनते हैं और अच्छा रहते हैं. इसलिए पक्के घर बनाकर इसमें AC लगाई जाएंगी. जिसमें बुजुर्ग और माता- बहने इसमें रहेंगी.'

    मंजीत राय ने आगे बताया कि 'कल कुंडली थाने के SHO आये थे जिन्होंने काम रुकवाया है. लेकिन हम बताना चाहते हैं कि ये काम नहीं रुकेगा. यहां पक्के घर बनेंगे और ये तब तक रहेंगे जब तक सरकार हमारी मांगे नहीं मान लेती. चाहे हमें इसके लिए 2024 तक रुकना पड़े.'

    गर्मी से बचने के लिए किसान कर रहे हैं तैयारी
    पक्के घरों पर जय किसान आंदोलन से जुड़े परमजीत सिंह कात्याल ने कहा कि 'गर्मी के मौसम से बचने के लिए किसान अपनी तैयारी कर रहे हैं. किसानों को लगता है सरकार उनकी मांग अभी नहीं मानेगी लिहाजा लंबे समय तक रुकने के लिए पक्के ढांचे तैयार किये जा रहे हैं.

    परमजीत कात्याल ने आगे बताया कि 'ये संयुक्त किसान मोर्चा की कॉल नहीं लेकिन कुछ किसान भाई अपने स्तर पर ये पक्के घर बना रहे हैं. करीब से तीन-चार ऐसे पक्के घर सिंघू बॉर्डर पर बनाये जा रहे हैं. किसानों ने सर्दियों का मौसम निकाल लिया अब गर्मी की तैयारी की जा रही है. इसके अलावा गर्मी से बचने के लिए पंखे, कूलर, AC और ठंडे पानी की व्यवस्था भी धरनास्थल पर की जा रही है.'

    किसान आंदोलन में अबतक क्या हुआ?
    26 नवंबर 2020 को पंजाब और हरियाणा से निकले किसानों के जत्थों ने दिल्ली की तरफ कूच किया था. दिल्ली की सीमाओं पर पुलिस के साथ हुए संघर्ष में किसानों को बॉर्डर पर ही रोक दिया गया था. 1 दिसंबर से सरकार और किसानों के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ. एक के बाद एक 11 दौर की बातचीत सरकार और तकरीबन 40 किसान संगठनों के नेताओं के बीच हुई. ये सारी बैठक बेनतीजा रहीं. 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर रोक लगा दी थी और एक कमेटी का गठन किया था.

    26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के बाद लगने लगा था कि किसान आंदोलन कमज़ोर पड़ रहा है, लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत के आंसुओं ने आंदोलन में नई जान डाल दी. जिसके बाद आंदोलन अगले चरण में ले जाते हुए किसान संगठनों ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान समेत देश के कई राज्यों पंचायत और महापंचायत की जो अभी भी जारी है.