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Lockdown: नेपाल से इलाज के लिए दिल्ली आई किशोरी, तकलीफ ऐसी कि खाने में खिचड़ी का रहता है इंतजार

Lockdown: नेपाल से इलाज के लिए दिल्ली आई किशोरी, तकलीफ ऐसी कि खाने में खिचड़ी का रहता है इंतजार

नेपाल से दिल्ली के एम्स अस्पताल आए पिता-पुत्री दोनों को इलाज का इंतजार  है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नेपाल से दिल्ली के एम्स अस्पताल आए पिता-पुत्री दोनों को इलाज का इंतजार है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

तकलीफ से गुजर रही नेपाल की रहने वाली स्नेहा ने ऐसे हालात में भी हौसले नहीं खोया है, बल्कि कहती है, 'जिस दिन खाने में खिचड़ी होती है, मुझे अच्छा लगता है क्योंकि उस दिन मुझे भूखा नहीं रहना पड़ता.’

    नई दिल्ली. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण से बचाव की खातिर देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) है. कोरोना (COVID-19) से जूझने में सारा स्वास्थ्य महकमा लगा हुआ है, ऐसे में दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. पड़ोसी देशों से इलाज के लिए भी बहुत से मरीज भारत आते हैं. नेपाल से दिल्ली के एम्स (AIIMS Delhi) में इलाज कराने आई एक किशोरी की दास्तां बहुत मार्मिक है. लेकिन इन हालातों में न तो किसी को दोषी ठहराया जा सकता है और न ही सवाल उठाए जा सकते हैं.

    नेपाल से फरवरी में इलाज के लिए आए थे
    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences) के बाहर लगे टेंट में रोज जब एनजीओ (NGO) के सदस्य खाना बांटने आते हैं, तो 16 साल की स्नेहा मन ही मन यही सोच रही होती है कि खाने में आज खिचड़ी ही हो. ऐसा नहीं है कि उसे खिचड़ी ज्यादा पसंद है, बल्कि उसका जबड़ा टूटा हुआ है. ऐसे में वो खिचड़ी या अन्य किसी लिक्विड डाइट के अलावा कुछ और नहीं खा पाती है. लॉकडाउन के कारण 24 मार्च से ही एम्स के बाहर टेंट में रह रही स्नेहा कुमारी ने बताया, ‘मेरे जबड़े में बहुत दर्द रहता है, इस कारण मैं कुछ खा नहीं पाती. दर्द के कारण मैं सिर्फ जूस जैसी चीजें ही लेना पसंद करती हूं.’

    नेपाल के पारसा जिले से फरवरी में अपने टूटे हुए जबड़े और पिता की टूटी कमर का इलाज कराने दिल्ली आए पिता-पुत्री 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा होने के कारण यहीं फंस गए. ऐसे में अब ना तो उनकी सर्जरी हो पा रही है और ना ही वो अपने घर लौट पा रहे हैं. स्नेहा के जबड़े में एक ट्यूमर था, जिसे दो साल पहले एम्स के डॉक्टरों ने सर्जरी कर के निकाल दिया था. वो बताती हैं कि डॉक्टर ने जबड़ा निकाल कर उसकी जगह पर धातु की प्लेटें लगा दी थीं.

    स्नेहा के पिता नंद किशोर ने बताया कि 'नेपाल के एक कैंसर अस्पताल ने हमें दिल्ली के एम्स रेफर किया था जिसके बाद हम फरवरी 2018 में यहां आए. डॉक्टरों ने उसका जबड़ा निकाल दिया और उसकी जगह पर धातु की प्लेटें लगा दीं. उन्होंने कहा था कि एक साल बाद वो स्नेहा के पैर की हड्डी निकाल कर उसे जबड़े में लगाएंगे.’ स्नेहा के पिता नंदकिशोर खुद भी कमर में लगी चोट के कारण छड़ी के सहारे के बिना नहीं चल सकते हैं, हालांकि इस चोट के लिए करीब चार साल पहले नेपाल में उनकी सर्जरी भी हुई थी. एम्स में स्नेहा की सर्जरी पहले 25 फरवरी को होनी थी, लेकिन कई बार टलने के बाद अंतत: 24 मार्च को होनी तय हुई थी. स्नेहा के पिता ने कहा 'लेकिन 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में लॉकडाउन लगा दिया. मैंने डॉक्टरों से बातचीत की और उन्होंने कहा कि जब तक लॉकडाउन है, वो मेरी बेटी के लिए कुछ नहीं कर सकते हैं.’ स्नेहा के जबड़े में लगी धातु की प्लेटें अपनी जगह से हट गई हैं, जिसके कारण उसे हमेशा तेज दर्द रहता है और उसे तत्काल सर्जरी की जरूरत है.

    अब घर लौटना चाहते हैं
    नेपाल में एक एनजीओ के साथ काम करने वाले नंदकिशोर ने बताया, ‘जब मैं नेपाल से चला था तो मेरे पास 15 हजार रुपए थे और मुझे लगा था कि 15 दिन तक काम चलाने के लिए इतना पर्याप्त होगा. लेकिन अब हम इतने दिन से यहां फंसे हैं. सारे पैसे भी खत्म हो गए हैं. हम अपने देश भी नहीं लौट सकते.’ लॉकडाउन के कारण नंदकिशोर और स्नेहा नेपाल वापस नहीं जा सकते. फिलहाल दोनों एम्स के बाहर टेंट में रहने और दिल्ली सरकार, पुलिस तथा विभिन्न एनजीओ द्वारा बांटे जाने वाले खाना को खाकर गुजारा करने को मजबूर हैं. तकलीफ से गुजर रही स्नेहा ऐसे हालात में भी हौसला नहीं खोती है बल्कि कहती है, 'जिस दिन खाने में खिचड़ी होती है, मुझे अच्छा लगता है क्योंकि उस दिन मुझे भूखा नहीं रहना पड़ता. उसका कहना है, ‘अगर मैं दाल-चावल खाने की कोशिश करती हूं तो उसे चबाने में बहुत दर्द होता है.’

    बेटी की सर्जरी का कुछ पक्का पता नहीं होने के कारण नंदकिशोर अब घर लौटना चाहते हैं. वो कहते हैं, ‘जब लॉकडाउन खुलेगा तो वो नेपाल मे किसी से कहेंगे कि वो उनके खाते में कुछ पैसे डाले, ताकि वो अपने घर लौट सकें.’

    (भाषा से इनपुट)

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    Tags: Coronavirus, Covid19, Lockdown, Nepal

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