तिहाड़ जेल में बंद नताशा नरवाल के वैज्ञानिक पिता का निधन, आखिरी झलक भी नहीं हुई नसीब

नताशा और उनके पिता महावीर नरवाल की यह तस्वीर ट्विटर पर साझा की जा रही है.

नताशा और उनके पिता महावीर नरवाल की यह तस्वीर ट्विटर पर साझा की जा रही है.

दिल्ली दंगों (Delhi Communal Riots) के मामले में पिछले एक साल से कैद नरवाल को 'पिंजड़ा तोड़' आंदोलन के लिए शोहरत मिली थी. उनके वैज्ञानिक पिता महावीर नरवाल (Mahavir Narwal) के कोरोना संक्रमण से दम तोड़ने संबंधी चर्चा सोशल मीडिया पर जारी है.

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दिल्ली. कोरोना महामारी के समय में लोगों के लिए सबसे बड़ा दुख यही रहा है कि इस संक्रमण से काल के गाल में समाने वाले अपने परिजनों तक के अंतिम दर्शन नहीं कर सके हैं.​ 'पिंजरा तोड़' मुहिम की एक्टिविस्ट नताशा नरवाल के पिता महावीर नरवाल की मौत हुई तो दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में तिहाड़ जेल में बंद नताशा आखिरी वक्त भी अपने पिता को देख नहीं सकीं. कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने महावीर को श्रद्धांजलि दी तो कुछ ने नताशा के हक में आवाज़ भी उठाई.

CPIML की नेता कविता कृष्णन, कम्युनिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेता वृंदा करात और एक्टिविस्ट हर्ष मंदर ने नरवाल के निधन पर शोक जताया. करात ने कहा कि गलत तरीके से साल भर से नताशा को जेल में रखा गया है और आखिरी वक्त भी वह अपने पिता को नहीं देख सकीं, यह एक बेटी के साथ अन्यायपूर्ण है. वहीं, कृष्णन ने भी ट्वीट में कहा कि महावीर को अपनी बेटी पर गर्व था, जो सरकार के खिलाफ आवाज़ उठा रही थी.

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नताशा की रिहाई के पक्ष में सोशल मीडिया पर मुहिम भी चल रही है.

कौन हैं नताशा नरवाल?

पिछले साल फरवरी के महीने में दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे हुए थे और उसके बाद दंगे से जुड़े मामलों की जांच हुई थी. तब नताशा का नाम सामने आया था, जिन्होंने 'पिंजरा तोड़' मुहिम चलाई थी. एक्टिविस्ट नताशा पर केंद्र सरकार ने दंगों की साज़िश में शामिल होने का आरोप लगाकर UAPA के तहत मुकदमा दर्ज किया था. फिलहाल नताशा को तिहाड़ जेल में रखा गया है.

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खबरों में नताशा के परिवार से जुड़े लोगों के हवाले से कहा गया है कि एक्टिविस्ट और राजनीति से जुड़ी शख्सियतें लगातार मांग कर रही हैं कि कोरोना काल में संवेदनशीलता बरतते हुए राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाए. वहीं, कृष्णन के मुताबिक फेमिनिस्ट महिलाओं को सरकार ने जबरन जेलों में बंद कर रखा है, वो भी तब, जब उनके परिवार के लोग कोविड संक्रमण से काल के गाल में समा रहे हैं.

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